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बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में BRICS का बढ़ता प्रभाव, भारत की अध्यक्षता से नई उम्मीदें

भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता देश के लिए निर्यात बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी साझेदारी मजबूत करने तथा सप्लाई चेन में विविधता लाने के लिहाज से महत्वपूर्ण अवसर लेकर आई है। एक लेख के अनुसार, इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में BRICS के प्रभाव को भी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

यूरोपियन टाइम्स की वेबसाइट पर प्रकाशित लेख में कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था तेजी से बदल रही है। उभरती अर्थव्यवस्थाएं व्यापार, निवेश, विकास वित्त और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीतियों को तय करने में पहले की तुलना में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। इसी बदलाव के केंद्र में BRICS भी तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत कर रहा BRICS

BRICS शुरुआत में पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह था, लेकिन अब यह ग्लोबल साउथ की आर्थिक और रणनीतिक आकांक्षाओं को सामने रखने वाले एक बड़े मंच में बदल गया है।

2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है। वर्तमान में BRICS में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इसके अलावा 10 पार्टनर देश—बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम—भी इसके आउटरीच को व्यापक बनाते हैं।

इस विस्तार से भारत के लिए निर्यात बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने, सप्लाई चेन को विविध बनाने और टेक्नोलॉजी साझेदारी को बढ़ावा देने के नए अवसर पैदा हुए हैं। साथ ही, यह अधिक समावेशी और बहुध्रुवीय वैश्विक आर्थिक व्यवस्था बनाने में भारत की भूमिका को भी मजबूत कर सकता है।

BRICS में मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस, बड़े ऊर्जा निर्यातक, कृषि उत्पादक, बड़े उपभोक्ता बाजार, टेक्नोलॉजी हब और तेजी से विकास कर रही अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। इससे इनके बीच आर्थिक सहयोग की काफी संभावनाएं बनती हैं। मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्थाओं को ऊर्जा और कच्चे माल की जरूरत होती है, जबकि कमोडिटी उत्पादक देशों को टेक्नोलॉजी, निवेश और औद्योगिक विकास की जरूरत होती है।

व्यापार से आगे बढ़ रहा सहयोग

लेख के अनुसार, BRICS अब केवल व्यापार तक सीमित आर्थिक समूह नहीं रह गया है। इसके सहयोग का दायरा वित्त, टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, जलवायु कार्रवाई और डिजिटल बदलाव तक फैल गया है।

BRICS दक्षिण-दक्षिण सहयोग के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में भी उभर रहा है। इसका जोर संप्रभु समानता, समावेशिता, आपसी सम्मान और सहमति आधारित सहयोग पर है।

नई दिल्ली में 14-15 मई को भारत की अध्यक्षता में हुई BRICS Foreign Ministers’ Meeting में भी राजनीतिक, आर्थिक, वित्तीय, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों में सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया गया था। बैठक में अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वपूर्ण और जवाबदेह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की जरूरत भी बताई गई।

लेख में कहा गया है कि BRICS अब सिर्फ एक आर्थिक समूह नहीं रह गया है, बल्कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया में अपनी आवाज मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच बनता जा रहा है।

-(इनपुटः IANS)

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