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BRICS Summit 2026: भारत की अध्यक्षता में ग्लोबल साउथ की आवाज को मिलेगी नई मजबूती

चार उभरते बाजारों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एक आर्थिक शब्द से शुरू हुआ BRICS आज चार महाद्वीपों तक फैले एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक समूह में बदल चुका है। तेल उत्पादक देशों, अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के जुड़ने के साथ इसका दायरा लगातार बढ़ा है। इस वर्ष इस विस्तारित समूह की अध्यक्षता भारत कर रहा है और यह चौथी बार है जब भारत BRICS की अध्यक्षता संभाल रहा है।

BRICS प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक नीतियों के समन्वय का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। यह वैश्विक शासन व्यवस्था पर साझा दृष्टिकोण तैयार करने के लिए इन देशों का प्रमुख मंच है। लगातार संवाद के जरिए BRICS ने बहुपक्षीय संस्थानों में Global South के हितों को आगे बढ़ाने के लिए भी एक माध्यम के रूप में अपनी भूमिका मजबूत की है।

भारत की अध्यक्षता में 18वां BRICS Summit

भारत 2026 की अध्यक्षता के तहत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS Summit की मेजबानी करेगा। भारत की अध्यक्षता की थीम ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ है।

इस थीम में BRICS की अब तक की उपलब्धियों और संस्थागत प्रभावशीलता को मजबूत करने पर भारत के फोकस को दर्शाया गया है। इसमें विकास, sustainability और innovation को एजेंडे के केंद्र में रखा गया है और Global South की आकांक्षाओं को भी महत्व दिया गया है।

भारत BRICS को एक रचनात्मक और समाधान-केंद्रित मंच के रूप में और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

11 देशों तक पहुंचा BRICS

वर्तमान में BRICS में 11 देश शामिल हैं- ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और UAE।

ये देश मिलकर दुनिया की 49.5 प्रतिशत आबादी, वैश्विक GDP का 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का 26 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं।

जनवरी 2024 में हुए विस्तार के बाद BRICS में Partner Country की एक नई श्रेणी भी बनाई गई। इस विस्तार से समूह की भौगोलिक पहुंच एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका तक बढ़ी है।

जनवरी 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE BRICS के पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया 11वां पूर्ण सदस्य बना।

वहीं, 2025 के दौरान 10 देशों ने Partner Country के रूप में BRICS के इस ढांचे से जुड़ने का फैसला किया। इनमें बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं।

व्यापार से लेकर जलवायु और ऊर्जा सुरक्षा तक एजेंडा

BRICS का सहयोग लगातार बढ़कर रणनीतिक वैश्विक मुद्दों और व्यावहारिक सहयोग के कई क्षेत्रों तक पहुंच गया है। इसके एजेंडे में आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और कृषि जैसे मुद्दे शामिल हैं।

इसके अलावा श्रम और रोजगार, दूरसंचार, अंतरराष्ट्रीय वित्त और वैश्विक आर्थिक स्थिति पर भी BRICS देशों के बीच सहयोग और चर्चा होती है।

BRICS विश्व व्यापार संगठन (WTO) और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में अधिक प्रतिनिधित्व और समानता की वकालत करता है।

इन प्रयासों का उद्देश्य वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी, प्रभावी और मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप बनाना है।

-(इनपुटः IANS)