अहमदाबाद में ब्रिक्स पारंपरिक खेलों का आयोजन, सांस्कृतिक विविधता और खेल विरासत का दिखा संगम

गुजरात के अहमदाबाद स्थित वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, नारणपुरा में सोमवार को ब्रिक्स पारंपरिक एवं स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 का आयोजन किया गया। दिनभर चले इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों, खिलाड़ियों, पारंपरिक खेलों के विशेषज्ञों, तकनीकी अधिकारियों और संस्थानों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य पारंपरिक खेल विरासत को संरक्षित करने, सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने और सदस्य देशों के बीच आपसी संपर्क मजबूत करने के लिए मंच उपलब्ध कराना था। केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की उपस्थिति में आयोजन का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में 10 देशों ने अपने पारंपरिक और स्वदेशी खेलों का प्रदर्शन किया।

खेलों को राष्ट्र निर्माण के केंद्र में रखने पर जोर

केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि भारत भविष्य की जरूरतों के अनुरूप खेल बुनियादी ढांचे में निवेश कर खेलों को राष्ट्र निर्माण के केंद्र में रख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का खेल पारिस्थितिकी तंत्र लगातार विकसित हो रहा है और खिलाड़ियों के लिए जमीनी स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिभाओं की पहचान, प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, बुनियादी ढांचे के विकास, खिलाड़ियों के कल्याण और अंतरराष्ट्रीय अनुभव को शामिल करते हुए व्यापक रणनीति अपनाई जा रही है, ताकि भविष्य के लिए टिकाऊ खेल व्यवस्था तैयार की जा सके।

खेल विकास के लिए 3.76 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता

मनसुख मांडविया ने खेलो इंडिया पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत खेल क्षेत्र में बदलाव को गति देने के लिए लगभग 3.76 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रतिबद्धता जता चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य खेलों में जनभागीदारी बढ़ाना और ऐसा वातावरण तैयार करना है, जिसमें खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और अवसर मिल सकें। उन्होंने पारंपरिक खेलों को भी इस व्यापक खेल विकास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

पारंपरिक खेलों के संरक्षण के लिए ब्रिक्स देशों को तीन प्रस्ताव

केंद्रीय खेल मंत्री ने ब्रिक्स देशों के बीच पारंपरिक एवं स्वदेशी खेलों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए तीन प्रमुख प्रस्ताव रखे। पहले प्रस्ताव के तहत पारंपरिक खेलों का एक स्वैच्छिक ब्रिक्स संग्रह तैयार करने की बात कही गई, जिसमें खेलों के इतिहास, सांस्कृतिक महत्व, नियमों, उपकरणों और मैदान संबंधी आवश्यकताओं का दस्तावेजीकरण किया जाए। दूसरे प्रस्ताव में खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, शोधकर्ताओं, शिक्षण संस्थानों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों के बीच आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। तीसरे प्रस्ताव में भविष्य के ब्रिक्स खेल आयोजनों में पारंपरिक एवं स्वदेशी खेलों के नियमित प्रदर्शन की संभावनाएं तलाशने की बात कही गई।

खेलों के जरिए इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर

मनसुख मांडविया ने कहा कि ब्रिक्स पारंपरिक एवं स्वदेशी प्रदर्शन खेल केवल खेलों को प्रदर्शित करने का मंच नहीं है, बल्कि इनके पीछे मौजूद इतिहास, मूल्यों और सांस्कृतिक संदर्भों को समझने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल विभिन्न देशों की पारंपरिक विरासत को संरक्षित करने के साथ लोगों के बीच आपसी समझ, मित्रता और सहयोग को मजबूत कर सकती है। पारंपरिक खेलों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और विभिन्न समाजों की विशिष्टताओं से परिचित कराने में भी मदद मिल सकती है।

फिट इंडिया अभियान से बढ़ रही जनभागीदारी

केंद्रीय मंत्री ने फिट इंडिया मूवमेंट के जरिए शारीरिक फिटनेस को जीवनशैली का हिस्सा बनाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ‘संडे ऑन साइकिल’ अभियान के तहत प्रत्येक रविवार 3 लाख से अधिक स्थानों पर 50 लाख से ज्यादा लोगों की साइकिलिंग में भागीदारी दर्ज की गई है। उनके अनुसार, देशभर में इस अभियान के 94 कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इस पहल का उद्देश्य लोगों को नियमित शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना और फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

10 देशों ने प्रस्तुत किए अपने पारंपरिक और स्वदेशी खेल

आयोजन में शामिल देशों ने अपनी विशिष्ट खेल परंपराओं का प्रदर्शन किया। बेलारूस ने गोरोदकी, जबकि बोलीविया ने लुचा दे चोलितास, टिंकू, रायुएला, ट्रोम्पो, काचिनास और बोरी दौड़ जैसे खेल प्रस्तुत किए। ब्राजील ने स्वदेशी ब्लोपाइप, लकड़ी के लट्ठों की दौड़, ब्राजीलियाई पैरा-जिउ-जित्सु और कैपोइरा का प्रदर्शन किया। चीन की ओर से वुशु, लायन डांस और हेल्थ चीगोंग प्रस्तुत किए गए। भारत ने मल्लखंभ, योगासन और कलारीपयट्टू के जरिए अपनी पारंपरिक खेल एवं शारीरिक साधना की समृद्ध विरासत को सामने रखा।

ईरान, कजाखस्तान और रूस की खेल परंपराओं ने भी खींचा ध्यान

ईरान ने जुर्खानेह, हफ्त संग और घानियेह जैसे पारंपरिक खेल प्रस्तुत किए। कजाखस्तान ने असिक अतु, तोगिजकुमालक और कजाख कुरेसी का प्रदर्शन किया, जबकि रूस ने गोरोदकी और साम्बो के जरिए अपनी खेल परंपराओं को दर्शाया। दक्षिण अफ्रीका ने कगाती और इंटोंगा तथा संयुक्त अरब अमीरात ने अल तब्बाह खेल प्रस्तुत किया। इन प्रदर्शनों से प्रतिभागियों और दर्शकों को विभिन्न देशों की पारंपरिक खेल शैलियों, उनके सामाजिक महत्व और सांस्कृतिक पहचान को करीब से जानने का अवसर मिला।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ समापन

खेल प्रदर्शनों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और दर्शकों की भागीदारी से जुड़ी गतिविधियां भी आयोजित की गईं। समापन पर भाग लेने वाली टीमों को सम्मानित किया गया। आयोजन ने पारंपरिक खेलों से जुड़े सामुदायिक ज्ञान के संरक्षण, खेलों में समावेशी भागीदारी बढ़ाने और आधुनिक खेल व्यवस्था के साथ सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही, इसने ब्रिक्स देशों के बीच मित्रता, सांस्कृतिक समझ और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराया। (इनपुट: पीआईबी)