दूरसंचार विभाग (डीओटी) के प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संस्थान सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) ने दिल्ली परिसर में वार्षिक आईपी पुरस्कार समारोह-2026 का आयोजन कर बौद्धिक संपदा (आईपी) सृजन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 64 वैज्ञानिकों को सम्मानित किया। समारोह के दौरान दिल्ली परिसर द्वारा हासिल किए गए 47 पेटेंट, 3 कॉपीराइट और 8 शोध-पत्रों को भी मान्यता दी गई।
स्वदेशी दूरसंचार नवाचार को मिला प्रोत्साहन
सी-डॉट ने कहा कि समारोह का उद्देश्य उन शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों को सम्मानित करना है, जिनके कार्यों ने भारत के स्वदेशी दूरसंचार प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया है। कार्यक्रम में शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और विशेषज्ञों के योगदान को सराहा गया, जिनकी उपलब्धियों से संगठन का बौद्धिक संपदा पोर्टफोलियो लगातार मजबूत हो रहा है।
अनुसंधान उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता
संस्थान ने कहा कि पेटेंट पोर्टफोलियो के निरंतर विस्तार और बढ़ती संख्या में नवप्रवर्तकों को सम्मानित किए जाने से सी-डॉट स्वदेशी दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास के प्रमुख संस्थान के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है। संगठन ने कहा कि ये उपलब्धियां अनुसंधान उत्कृष्टता, बौद्धिक संपदा सृजन और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रौद्योगिकियों के विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं, जो भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और डिजिटल परिवर्तन के लक्ष्य को आगे बढ़ाती हैं।
‘नवाचार ही सी-डॉट की आधारशिला’
सी-डॉट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि नवाचार, स्वदेशी, सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार दूरसंचार प्रौद्योगिकियों के निर्माण के सी-डॉट के मिशन की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं द्वारा विकसित प्रत्येक पेटेंट, शोध-पत्र और बौद्धिक संपदा भारत की तकनीकी संप्रभुता को मजबूत करती है तथा आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाती है। उन्होंने वैज्ञानिकों से भारत को वैश्विक दूरसंचार नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।
नई तकनीकों पर केंद्रित अनुसंधान
सी-डॉट ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उसने अगली पीढ़ी की संचार प्रौद्योगिकियों, साइबर सुरक्षा, क्वांटम संचार, आपदा प्रबंधन प्रणालियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित दूरसंचार समाधान और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में मजबूत बौद्धिक संपदा पोर्टफोलियो तैयार किया है। संस्थान का लक्ष्य ऐसी स्वदेशी तकनीकों का विकास करना है, जो राष्ट्रीय आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ वैश्विक दूरसंचार क्षेत्र में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ाएं।
बेंगलुरु परिसर में भी सम्मानित हुए नवप्रवर्तक
सी-डॉट ने हाल ही में अपने बेंगलुरु परिसर में भी वार्षिक आईपी पुरस्कार समारोह-2026 आयोजित किया था। वहां बौद्धिक संपदा सृजन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 78 नवप्रवर्तकों को सम्मानित किया गया। समारोह में 36 पेटेंट, 18 कॉपीराइट, 9 ट्रेडमार्क और 3 शोध-पत्रों को मान्यता दी गई। संस्थान ने कहा कि दिल्ली और बेंगलुरु परिसरों में आयोजित ये समारोह नवाचार, बौद्धिक संपदा सृजन और स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास के प्रति उसकी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। (इनपुट: पीआईबी)


