प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने मंगलवार को चार राज्यों में तीन मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी। इन परियोजनाओं पर कुल 9,072 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। चार राज्यों में तीन मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को दी गई मंजूरी इन परियोजनाओं में गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन का दोहरीकरण, पुनारख-किउल तीसरी और चौथी लाइन तथा गम्हरिया-चांडिल तीसरी और चौथी लाइन शामिल हैं।

ये तीनों परियोजनाएं महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के आठ जिलों को कवर करेंगी

ये तीनों परियोजनाएं महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के आठ जिलों को कवर करेंगी, जिससे भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 307 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी, और इन परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

लगभग 5,407 गांवों को मिलेगा बेहतर रेल संपर्क 

प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 5,407 गांवों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा, जिनकी कुल आबादी करीब 98 लाख है। क्षमता बढ़ने से देश के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। इनमें जबलपुर का कचनार शिव मंदिर, बालाघाट का कान्हा नेशनल पार्क, गंगुलपारा बांध और जलप्रपात, पेंच नेशनल पार्क, धुआंधार जलप्रपात, बरगी बांध, गोमजी-सोमजी मंदिर, चांडिल बांध, दलमा हिल टॉप, हेसाकोचा जलप्रपात, रायजामा घाटी और दलमा वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं।

लाइन क्षमता बढ़ने से आवाजाही में होगा सुधार

लाइन क्षमता बढ़ने से आवाजाही में सुधार होगा और भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता तथा सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। ये मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं संचालन को सुगम बनाएंगी और भीड़भाड़ कम करेंगी।

ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नए भारत’ के विजन के अनुरूप

आधिकारिक बयान के अनुसार, ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नए भारत’ के विजन के अनुरूप हैं, जिससे क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से ‘आत्मनिर्भर’ बनने और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलेगी।

ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत

ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई हैं, जिनका उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों से परामर्श के माध्यम से मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। बयान में कहा गया है कि ये परियोजनाएं लोगों, सामान और सेवाओं के सुगम आवागमन को सुनिश्चित करेंगी।

क्षमता बढ़ाने से हर साल लगभग 52 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव

ये परियोजनाएं कोयला, स्टील, लौह अयस्क, सीमेंट, गिट्टी-पत्थर, फ्लाई ऐश, उर्वरक, चूना पत्थर, मैंगनीज, डोलोमाइट, खाद्यान्न और पेट्रोलियम उत्पाद जैसे माल के परिवहन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। क्षमता बढ़ाने से हर साल लगभग 52 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी।

रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा दक्ष परिवहन माध्यम है, जिससे देश के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने और लॉजिस्टिक लागत कम करने में मदद मिलेगी। इससे 6 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी और 30 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन में कमी आएगी, जो एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। (इनपुट-एजेंसी)

RELATED ARTICLES

35 mins ago | Artisan Livelihood

भारत ट्यूलिप से पारंपरिक कारीगरों के उत्पादों को मिला डिजिटल बाजार

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीस...

58 mins ago

33,660 करोड़ रुपए की भव्य योजना से बदलेगा भारत का विनिर्माण इकोसिस्टम

भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) 33,660 करोड़ रुपए की एक पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर में 100 प्लग-एंड-प...