‘कैच द रेन’ अभियान को मिली रफ्तार, देशभर के शहरों में जल संरक्षण पर एमओएचयूए का जोर

प्रधानमंत्री के “कैच द रेन – जहां वर्षा हो, जब वर्षा हो” अभियान को गति देते हुए आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) ने अमृत 2.0 के तहत देशभर के शहरों में जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और जल निकायों के पुनर्जीवन से जुड़े प्रयास तेज कर दिए हैं। मंत्रालय के अनुसार, 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 900 से अधिक शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। इसके तहत 1.21 लाख एकड़ जल निकायों के पुनर्जीवन और 12,750 एकड़ हरित क्षेत्रों के विकास का कार्य किया जा रहा है।

भूजल पुनर्भरण के लिए बड़े स्तर पर काम

जल शक्ति अभियान–जन भागीदारी (जेएसजेबी) 2.0 के तहत जल शक्ति मंत्रालय के सहयोग से 79 नगर निगमों में 1,99,278 भूजल पुनर्भरण संरचनाओं पर कार्य शुरू किया गया है। इसके अलावा 738 शहरी स्थानीय निकायों में 73,036 पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण और क्रियान्वयन किया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में भूजल स्तर को मजबूत करना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है।

उथले जलभृत प्रबंधन कार्यक्रम से मिल रहे बेहतर परिणाम

अमृत 2.0 के तहत उथले जलभृत प्रबंधन (एसएएम) कार्यक्रम के जरिए वैज्ञानिक जलभृत मानचित्रण और लक्षित हस्तक्षेपों पर काम किया जा रहा है। बर्दवान (पश्चिम बंगाल) और विजयनगरम (आंध्र प्रदेश) में इंजेक्शन बोरवेल युक्त पुनर्भरण गड्ढों के माध्यम से वर्षा जल को गहरे जलदायी स्तर तक पहुंचाया जा रहा है। वहीं, ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश) में छत आधारित वर्षा जल संचयन प्रणालियों और भंडारण सुविधाओं से जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिल रहा है।

मानसून से पहले सक्रिय हुईं पुनर्भरण संरचनाएं

कोरबा (छत्तीसगढ़) और वारंगल (तेलंगाना) में मानसून से पहले ही पुनर्भरण संरचनाओं को चालू कर दिया गया है, ताकि वर्षा जल का अधिकतम संचयन कर भूजल स्तर को बेहतर बनाया जा सके। मंत्रालय का कहना है कि ऐसे उपाय शहरों को दीर्घकालिक जल सुरक्षा प्रदान करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

1.21 लाख एकड़ जल निकायों का पुनर्जीवन

अमृत 2.0 के जल निकाय पुनर्जीवन (डब्ल्यूबीआर) घटक के तहत लगभग 1.21 लाख एकड़ क्षेत्र में जल निकायों का पुनर्जीवन किया जा रहा है। इसके तहत गाद हटाने, इनलेट और आउटलेट में सुधार, तट संरक्षण, भूदृश्य विकास और जैव विविधता संवर्धन जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से जल भंडारण क्षमता बढ़ेगी, भूजल पुनर्भरण को बल मिलेगा और शहरी बाढ़ से निपटने की क्षमता मजबूत होगी।

हरित क्षेत्रों के विकास पर भी फोकस

मंत्रालय ने बताया कि जल संरक्षण प्रयासों के पूरक के रूप में देशभर के शहरों में 12,750 एकड़ हरित क्षेत्रों और पार्कों का विकास किया जा रहा है। ये परियोजनाएं पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने, भूजल पुनर्भरण में सहयोग करने, शहरी ताप प्रभाव को कम करने और नागरिकों के लिए बेहतर सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराने में मदद करेंगी।

जल सुरक्षा को भविष्य का निवेश बताया

एमओएचयूए ने कहा कि इन पहलों के माध्यम से “कैच द रेन – जहां वर्षा हो, जब वर्षा हो” अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि आज बचाई गई हर बूंद, आने वाली पीढ़ियों की जल सुरक्षा में किया गया महत्वपूर्ण निवेश है। (इनपुट: पीआईबी)

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