150 करोड़ रुपए से अधिक की केंद्रीय परियोजनाओं की पैमाना पोर्टल से हो रही निगरानी : सरकार

केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में बताया कि 150 करोड़ रुपए और उससे अधिक लागत वाली जारी केंद्रीय ढांचागत परियोजनाओं की निगरानी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा की जा रही है। इसके लिए ‘पैमाना’ (Project Assessment, Infrastructure Monitoring and Analytics for Nation-building) नामक ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य परियोजनाओं में देरी और लागत वृद्धि को रोकना तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

राज्यसभा में मंत्री ने दी जानकारी

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), योजना राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संस्कृति राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने राज्यसभा में बताया कि सभी संबंधित मंत्रालय, विभाग और कार्यान्वयन एजेंसियां एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) और डेटा एंट्री के माध्यम से पैमाना पोर्टल पर परियोजनाओं की जानकारी नियमित रूप से अपडेट करती हैं।

वेबसाइट पर उपलब्ध है परियोजनाओं का विवरण

सरकार ने बताया कि सभी जारी ढांचागत परियोजनाओं का परियोजना-वार विवरण मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रकाशित फ्लैश रिपोर्ट में उपलब्ध कराया जाता है। इससे परियोजनाओं की प्रगति और स्थिति की जानकारी सार्वजनिक रूप से देखी जा सकती है।

डैशबोर्ड और डेटा विश्लेषण से निगरानी आसान

मंत्री ने बताया कि पैमाना पोर्टल में डेटा विश्लेषण, आउटपुट रिपोर्ट और शीर्ष स्तर की निगरानी के लिए अनुकूलित डैशबोर्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इनकी मदद से परियोजनाओं की प्रगति की प्रभावी समीक्षा की जा सकती है और समय पर आवश्यक निर्णय लिए जा सकते हैं।

इन कारणों से होती है परियोजनाओं में देरी

सरकार के अनुसार, परियोजनाओं में समय और लागत बढ़ने के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक भूमि अधिग्रहण, वन, वन्यजीव एवं पर्यावरण संबंधी स्वीकृतियां, कानून-व्यवस्था की स्थिति, उपयोगिता स्थानांतरण और सिविल कार्यों में देरी प्रमुख कारण हैं।

मासिक समीक्षा बैठकों से होता है समन्वय

मंत्री ने बताया कि बुनियादी ढांचा से जुड़े सभी मंत्रालयों और विभागों को पैमाना पोर्टल के डेटा विश्लेषण के आधार पर नियमित फीडबैक दिया जाता है, ताकि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आवश्यक सुधार किए जा सकें। इसके अलावा मासिक समीक्षा बैठकों और अन्य संचार माध्यमों के जरिए हितधारकों के साथ नियमित समन्वय स्थापित किया जाता है, जिससे साक्ष्य-आधारित निगरानी को मजबूती मिलती है।

मंत्रालयों को दी गई है सीधे पोर्टल तक पहुंच

सरकार ने बताया कि सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को अनुकूलित डैशबोर्ड के लिए लॉगिन क्रेडेंशियल उपलब्ध कराए गए हैं। इससे वे सीधे पोर्टल पर जाकर अपनी परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर सकते हैं। (इनपुट: पीआईबी)