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असमिया संस्कृति के महानायक ज्योतिप्रसाद अग्रवाला को CM हिमंत बिस्वा सरमा ने दी श्रद्धांजलि

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को महान साहित्यकार, संगीतकार और फिल्मकार रूपकंवर ज्योतिप्रसाद अग्रवाला की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि ज्योतिप्रसाद अग्रवाला एक दूरदर्शी व्यक्तित्व थे, जिन्होंने साहित्य, संगीत, रंगमंच और सिनेमा के जरिए आधुनिक असमिया सांस्कृतिक पहचान की नींव रखी।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ज्योतिप्रसाद अग्रवाला की विरासत आज भी असम की कई पीढ़ियों को प्रेरित कर रही है।

उन्होंने लिखा, “जयंती के अवसर पर मैं असमिया संस्कृति के महानायक रूपकंवर ज्योतिप्रसाद अग्रवाला को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। वे अपने समय से आगे सोचने वाले दूरदर्शी थे। उन्होंने 1935 में ‘जॉयमती’ फिल्म के जरिए असमिया सिनेमा की नींव रखी और नाटककार, कवि तथा संगीतकार के रूप में हमारी सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध किया। उनका ‘ज्योति संगीत’ आज भी उनकी कलात्मक प्रतिभा और क्रांतिकारी सोच का अमर उदाहरण है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्योतिप्रसाद अग्रवाला ने केवल कला का सृजन नहीं किया, बल्कि असम की आधुनिक सांस्कृतिक चेतना को आकार देने में भी बड़ी भूमिका निभाई।

ज्योतिप्रसाद अग्रवाला का जन्म 17 जून 1903 को वर्तमान डिब्रूगढ़ जिले के तामुलबाड़ी टी एस्टेट में हुआ था। उन्हें आधुनिक असमिया संस्कृति के प्रमुख निर्माताओं में गिना जाता है।

वे एक प्रसिद्ध कवि, नाटककार, गीतकार, संगीतकार, फिल्म निर्माता और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने बीसवीं सदी के शुरुआती दौर में असम के सांस्कृतिक पुनर्जागरण में अहम भूमिका निभाई।

उन्होंने 1935 में ‘जॉयमती’ फिल्म बनाकर इतिहास रच दिया। यह असमिया भाषा की पहली फीचर फिल्म थी, जिसे उन्होंने स्वयं लिखा, निर्देशित किया और निर्मित किया। यह फिल्म आज भी असम के सांस्कृतिक इतिहास में मील का पत्थर मानी जाती है।

संगीत के क्षेत्र में भी उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा। ‘ज्योति संगीत’ के नाम से प्रसिद्ध उनके सैकड़ों गीत आज भी असमिया समाज में देशभक्ति, मानवीय मूल्यों और गहरी भावनात्मक अभिव्यक्ति के लिए विशेष स्थान रखते हैं।

कलात्मक उपलब्धियों के अलावा ज्योतिप्रसाद अग्रवाला भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। उन्होंने साहित्य और संगीत को सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय चेतना जगाने का माध्यम बनाया।

हर वर्ष उनकी जयंती पर असम भर में सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्यिक आयोजन और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाता है। असमिया संस्कृति में उन्हें सम्मानपूर्वक “रूपकंवर” यानी “सौंदर्य का राजकुमार” कहा जाता है।

(इनपुट-आईएएनएस)