प्रतिक्रिया | Friday, April 04, 2025

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लोकसभा में पारित हुआ कोस्टल शिपिंग विधेयक 2024, समुद्री व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

लोकसभा ने आज गुरुवार को कोस्टल शिपिंग विधेयक, 2024 को मंजूरी दे दी है, इससे भारत के विशाल और रणनीतिक तटीय क्षेत्र का अधिकतम उपयोग हो सकेगा। यह विधेयक देश के तटीय व्यापार के लिए एक समर्पित कानूनी ढांचा प्रदान करता है, ताकि भारतीय समुद्री क्षेत्र सस्ता, विश्वसनीय और सतत परिवहन माध्यम बन सके। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि इस विधेयक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के अनुरूप तैयार किया गया है। यह भारत में लॉजिस्टिक्स मूवमेंट को अधिक किफायती और स्थायी बनाने में मदद करेगा।

पारदर्शिता और प्रशासनिक समन्वय के लिए राष्ट्रीय कोस्टल शिपिंग डाटाबेस होगा तैयार

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य तटीय व्यापार को सरल, प्रतिस्पर्धी और बेहतर बनाना है। यह 1958 के मर्चेंट शिपिंग एक्ट को अपडेट करते हुए आधुनिक प्रावधानों को शामिल करता है। विधेयक के तहत विदेशी जहाजों को भारतीय तटीय व्यापार में शामिल करने के लिए लाइसेंसिंग और रेगुलेशन की व्यवस्था की गई है। साथ ही, राष्ट्रीय तटीय और अंतर्देशीय शिपिंग रणनीतिक योजना तैयार करने का प्रावधान किया गया है, जिससे नदी और तटीय क्षेत्रों का समग्र विकास होगा। इसके अलावा, राष्ट्रीय कोस्टल शिपिंग डाटाबेस बनाया जाएगा, जिससे व्यापार की पारदर्शिता और प्रशासनिक समन्वय बढ़ेगा। यह विधेयक भारत में समुद्री कानूनों को सरल और प्रभावी बनाते हुए अनुपालन बोझ को कम करेगा।

सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 से अब तक भारत का तटीय कार्गो यातायात 119% तक बढ़ा है और 2030 तक 230 मिलियन टन का लक्ष्य रखा गया है। यह विधेयक ‘मेक इन इंडिया’ पहल को समर्थन देगा, जिससे भारतीय जहाज निर्माण, बंदरगाह सेवाओं और नौवहन क्षेत्र में हजारों नौकरियां सृजित होंगी। साथ ही, यह तटीय व्यापार के लिए वैश्विक मानकों के अनुरूप एक समर्पित कानून प्रदान करता है।
कोस्टल शिपिंग विधेयक, 2024 के प्रमुख प्रावधानों में भारतीय जहाजों के लिए जनरल ट्रेडिंग लाइसेंस की आवश्यकता समाप्त करना (क्लॉज 3), विदेशी जहाजों के लिए लाइसेंस अनिवार्य करना (क्लॉज 4), हर दो साल में नेशनल कोस्टल और इनलैंड शिपिंग रणनीतिक योजना तैयार करना (क्लॉज 8) और तटीय जलमार्गों को अंतर्देशीय जलमार्गों से जोड़ने का प्रावधान शामिल है। इससे भारत के भीड़भाड़ वाले सड़क और रेलवे नेटवर्क पर दबाव कम होगा और एक सस्ता, हरित और विश्वसनीय परिवहन विकल्प मिलेगा।

विधेयक के अंतर्गत तटीय व्यापार को आसान बनाने के लिए प्राथमिकता वाले बर्थिंग, ग्रीन क्लीयरेंस चैनल और बंकर ईंधन पर जीएसटी कटौती जैसे सुधारों को भी शामिल किया गया है। इससे भारतीय जहाज मालिकों की विदेशी जहाजों पर निर्भरता कम होगी और देश में तटीय नौवहन को आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा।

इस विधेयक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। यह सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना पर आधारित है, जिसमें राज्य समुद्री बोर्डों और विशेषज्ञों की भागीदारी से एक राष्ट्रीय रणनीतिक योजना बनाई जाएगी। यह योजना न केवल तटीय व्यापार को मजबूत करेगी, बल्कि ओडिशा, कर्नाटक, गोवा जैसे राज्यों में नदी और तटीय जलमार्गों के विकास को भी बढ़ावा देगी।

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आखरी अपडेट: 4th Apr 2025