राहुल के बयान और चीन का सम्मान कोर्ट को लगे भारत का अपमान

देश की सेना का शौर्य और सम्मान हर भारतीय के लिए गर्व की बात होता है, लेकिन कई बार सेना पर सियासी टिप्पणी विवाद की वजह बन जाती है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की सेना पर की गयी ऐसी ही एक टिप्पणी पर बवाल जारी है।

सुप्रीम कोर्ट ने आज राहुल गांधी को ‘चीन के भारत की जमीन को कब्जे में’ करने वाली टिप्पणी पर न केवल फटकार लगायी बल्कि तल्ख सवाल भी पूछे। कोर्ट ने राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि आपको कैसे पता चला कि चीन ने हमारी 2000 वर्ग किलोमीटर ज़मीन पर कब्ज़ा लिया है ? आपके पास इसे साबित करने के लिए कौन सा पुख्ता सबूत है। एक सच्चा भारतीय ऐसा कभी नहीं कहेगा! जब सीमा पर कोई विवाद हो… तो क्या यह सब कहना ज़रूरी है! आप संसद में भी तो इसको लेकर सवाल पूछ सकते थे ।

राहुल गांधी की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि वो विपक्ष के नेता है अगर विपक्ष का नेता मीडिया में छपी खबर को लेकर बयान नहीं दे सकता तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी। इस पर कोर्ट ने कहा- आपको जो भी बात कहनी है, वो संसद में कहनी चाहिए, सोशल मीडिया पोस्ट में यह सब कहने की क्या ज़रूरत थी। हालांकि कोर्ट ने राहुल गांधी को राहत देते हुए लखनऊ की अदालत की ओर से जारी समन यानी हाजिरी आदेश पर अंतरिम रोक भी लगा दी है।

इस मामले में पूरी कहानी विस्तार से समझे, उससे पहले आपको बता देते है कि राहुल गाँधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान 9 दिसंबर 2022 को दिए बयान में आखिर कहा क्या था। राहुल ने कहा था कि चीन ने भारतीय सीमा के 2000 स्क्वायर किलोमीटर पर अपना कब्जा कर लिया है। चीन के सैनिकों ने 20 भारतीय सैनिकों को मार गिराया है और वो अरुणाचल प्रदेश में हमारे सैनिकों की पिटाई कर रहे है। भारतीय मीडिया इस बारे में कोई सवाल नहीं पूछेगी। अब राहुल का यही बयान उनके गले की फांस बन गया है । सीमा सड़क संगठन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने राहुल के बयान पर आपत्ति जताते हुए लखनऊ की निचली अदालत में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है।

उदय शंकर श्रीवास्तव का कहना है कि राहुल के सेना पर दिए बयान से न सिर्फ सेना बल्कि उनके परिवार के लोगों की भावनाएं भी आहत हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का बयान “झूठा और निराधार” है और इसका मकसद भारतीय सेना और देश का मनोबल गिराना है। कोर्ट ने राहुल को हाजिर होने के लिए समन भेजा था। बाद में मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय पहुंचा, जहां कोर्ट ने राहुल गांधी द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने आपराधिक मानहानि के मामले को रद्द करने की मांग की थी।

राहुल गांधी की ओर से यह दलील दी गई थी कि शिकायतकर्ता (उदय शंकर श्रीवास्तव) का नाम बयान में लिया ही नहीं गया था, इसलिए उनके पास केस दर्ज कराने का कानूनी अधिकार नहीं है। लेकिन अदालत ने इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया था। अदालत ने यह भी कहा कि निचली अदालत ने सभी जरूरी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राहुल गांधी को भारतीय दंड संहिता की धारा 500 (मानहानि) के तहत मुकदमे का सामना करने के लिए समन भेजा है और यह फैसला सही है।

वहीं, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि निचली अदालत द्वारा 11 फरवरी 2025 को जारी किया गया समन आदेश “किसी भी तरह से अवैध नहीं है,” इसलिए उसमें कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। इस आदेश के बाद राहुल गांधी लखनऊ स्थित एमपी-एमएलए (सांसद-विधायक) अदालत में पेश हुए और उन्होंने 20 हजार का निजी मुचलका और 20 हजार की दो जमानत राशियां जमा कराई थी।

अब कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी राहुल पर हमलावर है । बीजेपी का कहना है कि जो राहुल गांधी संविधान को लेकर घूमते हैं उसको राहुल गांधी ने तार तार कर दिया है और सेना का मनोबल तोड़ने का काम कर रहें हैं । बीजेपी का कहना है कि राहुल गांधी ने यह प्रण लिया हैं वो भारत को कमजोर करेंगे , चीन को मजबूत करेंगे वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल को सलाह दी है कि उन्हें देश के मनोबल के खिलाफ काम नहीं करना चाहिए। साथ ही उन्होंने अपील की कि वो चीन को लेकर बेमतलब बयान न दें।

दरअसल, बीजेपी राहुल पर यूं ही आक्रामक नहीं है। उनका कहना है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अक्सर ऐसी बयानबाजी करते रहते हैं। चीन को लेकर भी राहुल गांधी ने एक नहीं बल्कि कई मौकों पर इस तरह की टिप्पणियां की हैं मगर हर बार उन्होंने अलग-अलग आंकड़े बताए हैं और वो भी बिना तथ्यों, तर्कों और सबूतों के । अक्टूबर 2020 में राहुल गांधी कहते हैं कि चीन ने भारत की 1200 स्क्वायर किलोमीटर जमीन ले ली। दिसंबर 2022 में राहुल गांधी कहते हैं कि चीन ने 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय जमीन कब्जा कर ली। जबकि इस साल अप्रैल में राहुल गांधी ने कहा कि चीन भारत का 4,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा जमाए बैठा है। यानी हर बार राहुल ने चीनी कब्जे को लेकर खुद जो आंकड़े पेश किए हैं, वो अलग-अलग हैं। अब सुप्रीम कोर्ट पूछ ही चुका है कि राहुल की इस जानकारी का आधार क्या है ? यह बात हम सभी जानते हैं कि 15 जून 2020 को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे, जबकि इस झड़प में 40 चीनी सैनिक भी मारे गए थे। फिर 9 दिसंबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश के तवांग में सीमा पर चीनी सैनिकों के साथ झड़प हुई थी और गलवान से लेकर तवांग तक भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब दिया था।

बीजेपी राहुल के चीनी कनेक्शन के मुद्दे को जोर शोर से उठा रही है। बीजेपी का आरोप है कि राहुल का चीनी कनेक्शन सिर्फ बयानों में ही नहीं बल्कि मेल-मुलाकातों के ज़रिये भी सामने आता रहता है। आपको याद होगा जून 2017 में डोकलाम में चीनी सैनिकों को भारतीय सेना ने रोक दिया था। भारतीय सेना की इस जांबाज़ी पर हर भारतीय गर्व की अनुभूति कर रहा था। वहीं, दूसरी तरफ 8 जुलाई 2017 को राहुल गांधी दिल्ली में चीनी राजदूत से गुपचुप मिल रहे थे।बीजेपी जब इस मामले पर हमलावर हुई तो पहले तो कांग्रेस ने इन दावों को झूठा बताया, लेकिन बाद में 10 जुलाई को चीनी दूतावास की वेबसाइट पर राहुल गांधी की वो तस्वीर छप गई जिसमें वो चीनी राजदूत से मिलते नज़र आ रहे थे… इसके बाद आखिरकार मजबूरी में कांग्रेस ने इस मुलाकात की पुष्टि करते हुए कहा कि यह राजनयिकों से होने वाली सामान्य मुलाकात का हिस्सा थी… लेकिन बड़ा सवाल ये है कि अगर ये मुलाकात इतनी ही सामान्य थी तो कांग्रेस ने इसे छुपाया क्यों? सवाल इस मुलाकात की टाइमिंग पर भी है, क्योंकि जब डोकलाम में भारत चीन की सेना आमने सामने थीं तब राहुल गांधी को इस मुलाकात की ज़रुरत क्यों पड़ गई।

राहुल गांधी और कांग्रेस के चीनी कनेक्शन पर और भी कई विवाद होते रहे हैं । कांग्रेस और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच 7 अगस्त 2008 में एक समझौता हुआ था, जिसमें तय हुआ था कि दोनों पार्टी M.O.U. के तहत क्षेत्रीय, द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मसले पर एक दूसरे से बात करेंगीं। इस एम.ओ.यू. पर राहुल गांधी और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के मंत्री वांग जिया रुई ने हस्ताक्षर किए थे। इस मौके पर सोनिया गांधी और चीन के तत्कालीन उपराष्ट्रपति शी जिनपिंग उपस्थित थे। इस एम.ओ.यू. में दोनों पार्टियों के बीच विचारों के आदान प्रदान को बढ़ावा देने की भी बात की गई थी।

वहीं आरोप है कि गांधी परिवार से जुड़े राजीव गांधी फाउंडेशन को चीनी दूतावास से चंदा मिला था। गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में बताया था कि 2005 से 2007 के बीच राजीव गांधी फाउंडेशन को चीनी दूतावास से 1 करोड़ 35 लाख रुपये का चंदा मिला था, ये नियमों का उल्लंघन था और इसी कारण राजीव गांधी फाउंडेशन का FCRA रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया गया था। कांग्रेस और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच हुआ M.O.U. हो फिर गांधी परिवार के राजीव गांधी फाउंडेशन को चीनी दूतावास से चंदा मिलने का विवाद हो राहुल पर सवाल उठते रहे हैं ।

वैसे राहुल के बयानों पर विवाद कोई नयी बात नहीं है । अभी हाल ही में राहुल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान का समर्थन किया और भारतीय इकोनॉमी को डेड इकोनॉमी बताया। जबकि तथ्य ये है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढती अर्थव्यवस्था है । राहुल ने कहा अरुण जेटली ने उन्हें कृषि कानूनों पर विरोध न करने के लिए कहा था जबकि सच ये है कि ये कानून अरुण जेटली की मृत्यु के बाद आया। इसके अलावा राहुल चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्थाओं पर भी लगातार सवाल उठा रहे हैं ।ईडी और सीबीआई पर हमला तो वो लगातार करते रहते हैं । वीर सावरकर पर आपत्तिजनक टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट उनको पहली ही नसीहत दे चुका है ।

यही नहीं, भारत के लोकतंत्र के कमजोर होने और संकट होने का आरोप भी वो लगाते रहे हैं । राहुल पर विदेशों में जाकर भारत का अपमान करने का भी आरोप है । सितंबर 2023 में बेल्जियम में राहुल ने कहा कि नरेंद्र मोदी के PM बनने के बाद से भारत में भेदभाव और हिंसा बढ़ी है, मई 2023 में राहुल ने अमेरिका में कहा कि भारत में लोकतंत्र खतरे में है, मई 2022 में लंदन में राहुल ने भारत की तुलना पाकिस्तान से की । अगस्त 2018 में लंदन में राहुल ने आरएसएस की सोच मुस्लिम ब्रदरहुड सी की । इन तमाम बयानों मे कई पर राहुल के खिलाफ कोर्ट में भी मुकदमे चल रहे हैं । राहुल ऐसे देश विरोधी और विवादत बयान देते हैं और फिर वो मीडिया से भी उम्मीद करते हैं कि वो उसको हेड लाइन भी बनाए।

(लेखक सुरेश जायसवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वे डीडी न्यूज़ से जुड़े हुए हैं और राजनीतिक मामलों के जानकार हैं।)