भारत में महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा को मजबूत करने और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए खान मंत्रालय ने महत्वपूर्ण खनिज पुनर्चक्रण प्रोत्साहन योजना के तहत 58 कंपनियों को भागीदारी के लिए पात्र घोषित किया है।
राष्ट्रीय मिशन के तहत लागू योजना
यह योजना राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के अंतर्गत 1,500 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ लागू की गई है। 2 अक्टूबर 2025 को अधिसूचित इस योजना का उद्देश्य लिथियम-आयन बैटरियों, ई-कचरे और औद्योगिक स्क्रैप से महत्वपूर्ण खनिजों का घरेलू पुनर्चक्रण बढ़ाना है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।
उद्योग जगत से मिला उत्साहजनक प्रतिसाद
आवेदन प्रक्रिया 2 अक्टूबर 2025 से 1 अप्रैल 2026 तक चली, जिसमें उद्योग जगत से बड़ी संख्या में प्रस्ताव प्राप्त हुए। इन प्रस्तावों का मूल्यांकन जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान विकास और डिजाइन केंद्र द्वारा किया गया।
कार्यकारी समिति ने दी मंजूरी
मूल्यांकन के आधार पर कार्यकारी समिति ने 58 संस्थाओं को पात्र घोषित किया। इनमें से 20 संस्थाओं को 30 मार्च 2026 और 38 संस्थाओं को 29 अप्रैल 2026 की बैठकों में स्वीकृति दी गई। चयनित कंपनियां बैटरी पुनर्चक्रण, ई-कचरा प्रसंस्करण और अन्य अपशिष्ट से खनिज पुनर्प्राप्ति जैसे क्षेत्रों में काम करेंगी।
बड़े निवेश और क्षमता निर्माण की तैयारी
इन कंपनियों द्वारा लगभग 850 केटीपीए की क्षमता विकसित करने और करीब 5,000 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव है। यह भारत में महत्वपूर्ण खनिज पुनर्चक्रण इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में मजबूत औद्योगिक रुचि को दर्शाता है।
अब शुरू होगा क्रियान्वयन चरण
योजना के अगले चरण में चयनित कंपनियां परियोजनाओं का क्रियान्वयन करेंगी। क्षमता विकास और उत्पादन शुरू होने के बाद उन्हें योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। (इनपुट: पीआईबी)


