26/02/26 | 3:41 pm | DSCI | Meity

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साइबर सिक्योरिटी ग्रैंड चैलेंज 2.0 में विजेताओं को मिला ₹6.85 करोड़ का पुरस्कार

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (DSCI) द्वारा आयोजित ‘साइबर सिक्योरिटी ग्रैंड चैलेंज 2.0’ के विजेताओं को सम्मानित किया गया। इस पहल का उद्देश्य देश में साइबर सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करना और डिजिटल इकोसिस्टम को अधिक सुरक्षित बनाना है।

यह प्रतियोगिता ₹6.85 करोड़ के कुल पुरस्कार पूल के साथ आयोजित की गई, जो देश की बड़ी सरकारी साइबर सुरक्षा नवाचार प्रतियोगिताओं में से एक है। विजेता को ₹1 करोड़, पहले रनर-अप को ₹50 लाख और दूसरे रनर-अप को ₹25 लाख की नकद राशि दी गई।

प्रतियोगिता में Cambrian Skillsda Technologies and Consultancy Services LLP (CSTCS) को विजेता चुना गया, जिसने नेक्स्ट-जेन बायोमेट्रिक सिस्टम की सुरक्षा पर समाधान तैयार किया। Crypsis ने क्लोन और फेक ऐप्स से निपटने का समाधान देकर पहला रनर-अप स्थान हासिल किया, जबकि Ziriz.ai को API सुरक्षा क्षेत्र में काम के लिए दूसरा रनर-अप चुना गया।

जनवरी 2025 में MyGov प्लेटफॉर्म पर शुरू हुई इस चुनौती में छह प्रमुख क्षेत्रों — API सुरक्षा, डेटा सुरक्षा, वियरेबल डिवाइस सुरक्षा, फेक ऐप रोकथाम, एआई आधारित खतरा पहचान और बायोमेट्रिक सिस्टम सुरक्षा — पर नवाचार को बढ़ावा दिया गया।

इस पहल की विशेष बात यह रही कि विकसित तकनीक के बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) संबंधित स्टार्टअप्स के पास ही रहेंगे, जिससे नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलता है।

चैलेंज को चार चरणों में आयोजित किया गया। शुरुआती चरण में 36 स्टार्टअप्स को चुना गया और प्रत्येक को ₹5 लाख दिए गए। इसके बाद तकनीकी मार्गदर्शन और प्रोटोटाइप विकास के चरणों से गुजरते हुए सर्वश्रेष्ठ टीमों का चयन किया गया। अंतिम चरण में बाजार तैयारियों और स्केलेबिलिटी के आधार पर विजेताओं का निर्णय लिया गया।

MeitY के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता विकसित करना समय की आवश्यकता है, क्योंकि डिजिटल इकोनॉमी के साथ सुरक्षा चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। उन्होंने इस प्रतियोगिता में छात्र टीमों, स्टार्टअप्स और महिला नेतृत्व वाली कंपनियों की भागीदारी को उत्साहजनक बताया।

उन्होंने कहा कि डेटा शेयरिंग और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ मजबूत सुरक्षा ढांचा बनाना जरूरी है और इस तरह की पहल देश की दीर्घकालिक साइबर सुरक्षा क्षमता को मजबूत करेगी।

कुल मिलाकर, साइबर सिक्योरिटी ग्रैंड चैलेंज 2.0 भारत में नवाचार आधारित डिजिटल सुरक्षा समाधान विकसित करने और आत्मनिर्भर साइबर सुरक्षा इकोसिस्टम बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।