विदिशा मेडिकल कॉलेज में डे-केयर कैंसर सुविधा शुरू, डॉ. जितेंद्र सिंह बोले- घर के पास मिलेगा गुणवत्तापूर्ण इलाज

कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच देश में महानगरों से बाहर भी आधुनिक कैंसर देखभाल सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को मध्य प्रदेश के विदिशा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय में कैंसर के लिए डे-केयर केंद्र का उद्घाटन करते हुए कहा कि परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) और टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) के सहयोग से कैंसर उपचार की सुविधाओं को लोगों के घरों के करीब पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अनुमान के अनुसार 2030 तक भारत में हर साल करीब 20 लाख नए कैंसर के मामले सामने आ सकते हैं, ऐसे में रोकथाम, शीघ्र पहचान, निदान और उपचार की क्षमता बढ़ाना जरूरी है।

मिलावट जैसी कुप्रथाओं को रोकने की अपील

डॉ. जितेंद्र सिंह ने नागरिकों और समाज से खाद्य पदार्थों में मिलावट जैसी कुप्रथाओं को रोकने में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि कैंसर का बढ़ता बोझ केवल उपचार सुविधाओं के विस्तार से कम नहीं किया जा सकता, बल्कि रोकथाम और समय रहते बीमारी की पहचान पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।

डीएई-टीएमसी के सहयोग से विकसित हो रहा केंद्र

विदिशा मेडिकल कॉलेज में कैंसर देखभाल सेवाओं को मजबूत करने के लिए यह केंद्र परमाणु ऊर्जा विभाग के टाटा मेमोरियल सेंटर के तकनीकी सहयोग से विकसित किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

स्क्रीनिंग में 586 कैंसर रोगियों की पहचान

विदिशा कार्यक्रम की शुरुआत 5 से 7 जून 2026 तक टीएमसी के वरिष्ठ विशेषज्ञों की बहुविषयक टीम द्वारा कैंसर गैप केयर विश्लेषण से हुई थी। टीम में सर्जिकल, मेडिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, पैथोलॉजी तथा निवारक देखभाल के विशेषज्ञ शामिल थे। इसी दौरान व्यापक कैंसर स्क्रीनिंग और जागरूकता शिविर लगाया गया। दो दिवसीय स्क्रीनिंग में 586 कैंसर रोगियों और 254 संदिग्ध मामलों की पहचान की गई। संबंधित मरीजों के लिए आगे के उपचार और रेफरल की व्यवस्था की गई।

डे-केयर सुविधा पहला चरण

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विदिशा मेडिकल कॉलेज में डे-केयर सुविधा व्यापक कैंसर देखभाल कार्यक्रम का पहला चरण है। टीएमसी ने उपकरण एवं दवा खरीद, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, रेडियोथेरेपी, पैथोलॉजी, सामुदायिक संपर्क, कैंसर रजिस्ट्री और प्रशामक देखभाल को शामिल करते हुए आगे की कार्ययोजना तैयार की है।

डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों को प्रशिक्षण

मानव संसाधन विकास के तहत विदिशा मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा विभाग के दो डॉक्टरों और सात नर्सिंग अधिकारियों ने मुंबई स्थित एसीटीआरईसी में कैंसर विज्ञान का विशेष प्रशिक्षण पूरा किया है। विदिशा के सर्जनों और सर्जिकल स्टाफ का प्रशिक्षण भी खारघर स्थित एसीटीआरईसी में शुरू किया जाना है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर सामान्य सर्जिकल कैंसर के उपचार की क्षमता विकसित करना है।

रेडियोथेरेपी और लिनैक सुविधा का विस्तार

विदिशा कैंसर देखभाल योजना में रेडियोथेरेपी को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेज में रेडियोथेरेपी सुविधा विकसित करने की घोषणा की है। इसमें लीनियर एक्सीलरेटर (लिनैक) सुविधा अगले दो से तीन वर्षों में शुरू होने की उम्मीद है। इससे विदिशा और आसपास के जिलों के मरीजों को उन्नत विकिरण उपचार के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।

आधुनिक पैथोलॉजी और सटीक निदान पर जोर

कैंसर के सटीक निदान और उप-वर्गीकरण के लिए विदिशा में पैथोलॉजी सेवाओं को भी मजबूत किया जा रहा है। टीएमसी ने इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री (आईएचसी) और आणविक मार्करों की व्यापक सूची उपलब्ध कराई है। विदिशा के पैथोलॉजी कर्मियों को मुंबई स्थित टीएमसी में ऑन्कोपैथोलॉजी, आईएचसी तकनीक और आणविक निदान का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

रोकथाम और शीघ्र पहचान पर भी फोकस

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कैंसर देखभाल का मतलब केवल बीमारी की पहचान के बाद उपचार करना नहीं है। रोकथाम और शीघ्र पहचान को भी कार्यक्रम का अहम हिस्सा बनाया जाना चाहिए। टीएमसी मेडिकल कॉलेज के साथ मिलकर कैंसर की रोकथाम और शुरुआती पहचान के लिए शिक्षा एवं अनुसंधान आधारित उत्कृष्टता केंद्र विकसित करेगा। स्वास्थ्यकर्मियों को कैंसर का बोझ कम करने के लिए साक्ष्य आधारित रणनीतियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कैंसर रजिस्ट्री से जुटाया जाएगा स्थानीय डेटा

विदिशा कार्यक्रम में जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्ट्री (पीबीसीआर) और अस्पताल आधारित कैंसर रजिस्ट्री (एचबीसीआर) भी स्थापित की जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर कैंसर के मामलों, बीमारी के चरण और उपचार के परिणामों से जुड़ा डेटा उपलब्ध होगा। यह जानकारी भविष्य की स्वास्थ्य योजनाओं और संसाधनों के बेहतर आवंटन में मदद करेगी।

प्रशामक देखभाल की सुविधा भी विकसित होगी

कार्यक्रम के तहत प्रशामक देखभाल सेवाओं को भी विकसित किया जा रहा है। डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों को पेलिएटिव मेडिसिन में संरचित प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि गंभीर और उन्नत अवस्था वाले कैंसर मरीजों को उपचार के साथ बेहतर सहायक देखभाल मिल सके।

2030 तक 20 लाख नए मामले आने का अनुमान

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कैंसर के बढ़ते बोझ का उल्लेख करते हुए कहा कि 2030 तक भारत में हर साल करीब 20 लाख नए कैंसर मामले सामने आने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में कैंसर देखभाल को कुछ चुनिंदा महानगरीय केंद्रों तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं होगा। देश के विभिन्न क्षेत्रों में रोकथाम, स्क्रीनिंग, निदान, उपचार और फॉलो-अप की क्षमता विकसित करनी होगी।

टीएमसी का नेटवर्क 11 संस्थागत इकाइयों तक पहुंचा

जितेंद्र सिंह ने कहा कि परमाणु ऊर्जा विभाग ने टीएमसी के माध्यम से देश में कैंसर देखभाल का व्यापक संस्थागत नेटवर्क तैयार किया है। मार्च 2026 की पीआईबी जानकारी के अनुसार, टीएमसी का नेटवर्क मुंबई, खारघर-नई मुंबई, पंजाब, वाराणसी, विशाखापत्तनम, मुजफ्फरपुर और गुवाहाटी समेत सात राज्यों में 11 अस्पतालों और संस्थागत इकाइयों तक फैल चुका है।

380 से अधिक केंद्रों से जुड़ा राष्ट्रीय कैंसर ग्रिड

उन्होंने कहा कि इस संस्थागत नेटवर्क को राष्ट्रीय कैंसर ग्रिड (एनसीजी) का सहयोग प्राप्त है। एनसीजी में 380 से अधिक कैंसर केंद्र, अनुसंधान संगठन, रोगी समूह और पेशेवर संस्थाएं शामिल हैं। यह नेटवर्क गुणवत्ता सुधार, उपचार के मानकीकरण, मानव संसाधन प्रशिक्षण और कैंसर अनुसंधान में सहयोग उपलब्ध कराता है।

कठुआ मेडिकल कॉलेज भी नेटवर्क का हिस्सा

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि टाटा मेमोरियल सेंटर के सहयोग से वहां भी कैंसर देखभाल क्षमता मजबूत की जा रही है। उद्देश्य यह है कि महानगरों के बाहर स्थित चिकित्सा संस्थान अपने-अपने क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार धीरे-धीरे विशेष कैंसर सेवाएं विकसित कर सकें।

उपचार से लेकर रोकथाम तक एकीकृत व्यवस्था

उन्होंने कहा कि डीएई-टीएमसी की पहल केवल अलग-अलग कैंसर उपचार केंद्र स्थापित करने तक सीमित नहीं है। इसमें मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, उन्नत पैथोलॉजी, रोकथाम, शीघ्र पहचान, कैंसर निगरानी, प्रशामक देखभाल और डॉक्टरों तथा नर्सिंग कर्मियों का प्रशिक्षण शामिल है।

घर के करीब पहुंचेगी कैंसर देखभाल

विदिशा पहल इसी एकीकृत मॉडल का उदाहरण है। डे-केयर सुविधा से शुरू होकर मेडिकल कॉलेज को धीरे-धीरे उपचार, निदान, रेडियोथेरेपी, प्रशिक्षित मानव संसाधन, रोकथाम, शुरुआती पहचान, कैंसर रजिस्ट्री और प्रशामक देखभाल से युक्त व्यापक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसका व्यापक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को कैंसर के निदान और उपचार के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े और उन्हें अपने घर के नजदीक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। (इनपुट: पीआईबी)