उत्तर प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को प्रौद्योगिकी से जोड़ने की दिशा में प्रदेश सरकार ने बहुस्तरीय पहल की गति तेज कर दी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, तकनीकी उन्नयन और नीतिगत सुधारों के माध्यम से प्रदेश की 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों को प्रतिस्पर्धी और बाजारोन्मुख बनाने का प्रयास किया गया है। सरकार के इन कदमों से उत्पादन क्षमता बढ़ी है और रोजगार सृजन को नई गति मिली है।
डिजिटल आधार और बजटीय प्रोत्साहन
डिजिटल अवसंरचना, नीतिगत सरलता और वित्तीय सहयोग के संयोजन ने प्रदेश को अग्रणी औद्योगिक केंद्र बनाने की आधारभूमि तैयार की है। एमएसएमई क्षेत्र की योजनाओं के लिए बजट 2026-27 में 3,822 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए गए हैं, जो वर्ष 2025-26 की तुलना में 19 % अधिक है।
ओडीओपी के जरिए बाजार विस्तार
वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के तहत मार्केटिंग डेवलपमेंट, टूलकिट वितरण और प्रशिक्षण के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। इसके माध्यम से एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के कारीगरों को तकनीक आधारित कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पारंपरिक उत्पादों को ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग से जोड़ने से स्थानीय वस्तुओं की पहुंच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक बढ़ी है।
डिजिटल उन्नयन और तकनीकी सहायता
एमएसएमई चैम्पियनशिप इनीशिएटिव (चैंपियंस पोर्टल) के तहत चयनित इकाइयों को आधुनिक मशीनरी अपनाने, गुणवत्ता सुधार और डिजिटल टूल्स के उपयोग के लिए तकनीकी सहायता दी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य उत्पादन लागत घटाकर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करना है। लाखों इकाइयों को डिजिटल उन्नयन और विपणन सहयोग का लाभ मिल रहा है।
उद्यम सारथी ऐप और आरएएमपी योजना
24 जनवरी 2021 को लॉन्च की गई उद्यम सारथी ऐप के जरिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन, योजनाओं की जानकारी और संचालन मार्गदर्शन एक ही मंच पर उपलब्ध कराया गया है, जिससे उद्यमियों की सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान हुई है। प्रदेश में आरएएमपी (राइजिंग एंड एक्सेलेरेटिंग एमएसएमई परफार्मेंस) योजना विश्व बैंक समर्थित पहल है। इसके अंतर्गत वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जिससे इकाइयों के विस्तार और आधुनिकीकरण को बल मिला है।
नीतिगत सुधार और निवेश वातावरण
वर्ष 2022 से लागू एमएसएमई नीति के माध्यम से प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। प्लग एंड प्ले मॉडल के तहत 72 घंटे में संचालन शुरू करने की सुविधा दी गई है। क्रेडिट प्रवाह में वृद्धि और पांच लाख रुपए तक बीमा कवरेज जैसी व्यवस्थाओं ने उद्यमियों को जोखिम प्रबंधन में सहूलियत दी है, जिससे निवेश वातावरण मजबूत हुआ है।
रोजगार सृजन और ग्रामीण इकाइयों को लाभ
प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों का सकारात्मक असर रोजगार सृजन पर भी पड़ा है। एमएसएमई क्षेत्र पहले से ही करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार रहा है और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से इसमें नए अवसर जुड़े हैं। ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सप्लाई चेन से जुड़ने के कारण ग्रामीण और अर्धशहरी इकाइयों को व्यापक बाजार मिला है। (इनपुट: आईएएनएस)


