रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने सुरक्षित संचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संगठन ने क्वांटम की (कुंजी) डिस्ट्रिब्यूशन (क्यूकेडी) प्लेटफार्म को सफलतापूर्वक स्थापित कर उसका परीक्षण किया है। इस तकनीक से तोपों और बख्तरबंद हथियारों के परीक्षण के दौरान मिलने वाली महत्वपूर्ण जानकारियों और आंकड़ों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
दरअसल, क्वांटम कुंजी वितरण ऐसी तकनीक है, जिसका उपयोग संचार के दौरान सूचनाओं को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। इसके माध्यम से संदेशों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक गोपनीय कुंजियों का आदान-प्रदान किया जाता है। इसकी एक प्रमुख विशेषता यह है कि यदि कोई बाहरी व्यक्ति संचार के दौरान इन कुंजियों की जानकारी हासिल करने की कोशिश करता है, तो उसकी गतिविधि का पता लगाया जा सकता है।
यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित प्रूफ एंड एक्सपेरिमेंटल एस्टैब्लिशमेंट (पीएक्सई) परीक्षण क्षेत्र के लाइव संचार नेटवर्क में किया गया। इस परीक्षण ने रियल टाइम में महत्वपूर्ण सूचनाओं के सुरक्षित आदान-प्रदान के लिए क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन तकनीक की उपयोगिता प्रदर्शित की है। तोपों और बख्तरबंद हथियारों के परीक्षण तथा उनके मूल्यांकन के दौरान विभिन्न प्रकार की महत्वपूर्ण जानकारियां और आंकड़े एकत्र किए जाते हैं। इनमें परीक्षण से जुड़े अवलोकन और उपकरणों से मिलने वाले तकनीकी आंकड़े भी शामिल होते हैं। इन सूचनाओं की सुरक्षा परीक्षण प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।
डीआरडीओ का यह सफल परीक्षण ऐसे आंकड़ों व सूचनाओं को सुरक्षित रखने में इस तकनीक की भूमिका को दर्शाता है। डीआरडीओ के अनुसार, प्लेटफार्म को इस तरह विकसित किया गया है कि यह महत्वपूर्ण सैन्य संचार को सुरक्षा प्रदान करता है। साथ ही साथ इस संचार में किसी की ओर से सेंध लगाने या सूचनाएं चुराने की कोशिश का पता लगाने में भी सक्षम है। इससे हथियारों के परीक्षण से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों की सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है।
डीआरडीओ ने निजी क्षेत्र के सहयोग से इसे विकसित किया है। क्वांटम कुंजी वितरण प्लेटफार्म को डीआरडीओ के सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और साइबर सुरक्षा समूह के अंतर्गत विकसित किया गया है। इसके विकास में तैकबिट लैब्स ने उत्पादन भागीदार के रूप में सहयोग किया है। यह क्वांटम आधारित सुरक्षित संचार तकनीक के व्यावहारिक उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह तकनीक विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोगी हो सकती है, जहां हथियारों के परीक्षण और मूल्यांकन के दौरान जुटाई गई संवेदनशील सूचनाओं को सुरक्षित रखना आवश्यक होता है। (इनपुट-आईएएनएस)


