केंद्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने भारत के जैव प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी और जीवन विज्ञान के क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादों एवं प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने, उद्योग की पहुंच मजबूत करने और अधिक निजी निवेश आकर्षित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की स्वदेशी जैव प्रौद्योगिकी क्षमताओं, उद्योग और निवेशकों के बीच मजबूत संबंध बनाकर नवाचारों को अनुसंधान एवं विकास से व्यावसायीकरण तक तेजी से पहुंचाया जा सकता है।
उद्योग और निवेशकों के बीच मजबूत संपर्क पर जोर
जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में ये बातें कहीं। बैठक में भारत के जैव प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम के लिए निवेश, उद्योग की भागीदारी और बाजार अवसरों का विस्तार करने के उपायों पर चर्चा की गई। उन्होंने स्वदेशी जैव प्रौद्योगिकी उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए उद्योग जगत के साथ प्रभावी संपर्क तंत्र विकसित करने की जरूरत बताई।
5200 करोड़ रुपए के बीआईआरएसी-आरडीआईएफ पर फोकस
बैठक में बीआईआरएसी अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष (बीआईआरएसी-आरडीआईएफ) के कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान दिया गया। 5200 करोड़ रुपए के सहयोग से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य उच्च जोखिम और प्रौद्योगिकी-गहन स्वदेशी जैव प्रौद्योगिकी नवाचारों के विकास तथा उनके व्यावसायीकरण में तेजी लाना है। इसके साथ ही जैव प्रौद्योगिकी में उद्योग की भागीदारी, जीवन विज्ञान वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) का एकीकरण, सीएसआर का उपयोग, बीआईआरएसी की अंतरराष्ट्रीय दृश्यता और स्टार्टअप-निवेशक संपर्क बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
1 लाख करोड़ रुपए के आरडीआई कोष का प्रमुख घटक
बीआईआरएसी-आरडीआईएफ सरकार के 1 लाख करोड़ रुपए के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (आरडीआई) कोष का प्रमुख घटक है। इसका उद्देश्य विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप गहन तकनीकी नवाचार और उच्च प्रभाव वाले स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री ने 3 नवंबर 2025 को आरडीआई कोष की शुरुआत की थी। इसका प्रबंधन अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा किया जाता है। बीआईआरएसी को जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए द्वितीय स्तर के फंड मैनेजर के रूप में नामित किया गया है।
टीआरएल-4 से 9 तक की परियोजनाओं को सहायता
बीआईआरएसी-आरडीआईएफ को टीआरएल-4 से टीआरएल-9 तक की उच्च जोखिम वाली और प्रौद्योगिकी-गहन परियोजनाओं के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य स्वदेशी जैव प्रौद्योगिकी नवाचारों को विकास से व्यावसायीकरण तक सहायता देना है। पात्र प्रौद्योगिकी संस्थाएं, जिनमें स्टार्टअप और उद्योग शामिल हैं, 5 करोड़ रुपए से 200 करोड़ रुपए तक की वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती हैं। यह सहायता कुल परियोजना लागत के 50% तक हो सकती है।
ऋण, इक्विटी और हाइब्रिड साधनों से मदद
फंड के तहत बिना गारंटी के दीर्घकालिक ऋण, इक्विटी और हाइब्रिड वित्तीय साधनों के जरिए सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से रणनीतिक सह-निवेश ढांचा भी शामिल है। बीआईआरएसी ने फंड के सुचारू कार्यान्वयन के लिए एक समर्पित बीआईआरएसी-आरडीआईएफ प्रभाग स्थापित किया है।
198 आवेदन मिले, आठ संस्थाओं का चयन
बीआईआरएसी-आरडीआईएफ के तहत पहला नेशनल कॉल 13 फरवरी 2026 को शुरू किया गया था। इसके लिए बीआईआरएसी-आरडीआईएफ वेबसाइट और पात्र स्टार्टअप तथा उद्योगों से आवेदन प्राप्त करने के लिए एकीकृत ई-पोर्टल उपलब्ध कराया गया। अब तक कुल 198 आवेदन मिले हैं, जिनका योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार मूल्यांकन किया जा रहा है। पहले 50 आवेदनों की जांच और मूल्यांकन पूरा हो चुका है तथा निवेश समिति की सिफारिशों के आधार पर आठ पात्र प्रौद्योगिकी संस्थाओं का चयन किया गया है। ये संस्थाएं ऋण या इक्विटी समझौते में प्रवेश से पहले विस्तृत जांच प्रक्रिया से गुजर रही हैं।
1700 से अधिक जीसीसी को जैव प्रौद्योगिकी से जोड़ने की तैयारी
बैठक में भारत के जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उद्योग की भागीदारी बढ़ाने के लिए लाइफ साइंसेज ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) इकोसिस्टम का लाभ उठाने पर भी चर्चा हुई। भारत में वर्तमान में 1700 से अधिक जीसीसी हैं, जिनमें करीब 19 लाख पेशेवर कार्यरत हैं। लाइफ साइंसेज और हेल्थकेयर जीसीसी जैव फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण और डिजिटल स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास के महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरे हैं।
बायो-फाउंड्री और स्टार्टअप से जोड़े जाएंगे जीसीसी
बीआईआरएसी वर्तमान और संभावित जीसीसी को भारत के घरेलू जैव प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम से बेहतर तरीके से जोड़ने में मदद करेगा। इसके लिए जीसीसी की बुनियादी ढांचे, पायलट-स्केल विनिर्माण और अनुसंधान एवं विकास से जुड़ी जरूरतों का आकलन किया जाएगा। इसके बाद उन्हें भारत की बायोई3 बायो-फाउंड्री, बायो-इनक्यूबेटर और स्टार्टअप इकोसिस्टम से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा।
जैव प्रौद्योगिकी सामाजिक नवाचार के लिए सीएसआर का उपयोग
बैठक में जैव प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम के विस्तार में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) की भूमिका पर भी विचार किया गया। बीआईआरएसी ने अपनी वैज्ञानिक जांच-पड़ताल क्षमता, राष्ट्रव्यापी नेटवर्क और पारदर्शी अनुदान प्रबंधन ढांचे का उपयोग करते हुए सीएसआर निवेश को जैव प्रौद्योगिकी आधारित सामाजिक नवाचारों की ओर निर्देशित करने का प्रस्ताव रखा है।
स्वास्थ्य और कृषि से जुड़े क्षेत्रों पर फोकस
सीएसआर साझेदारी के लिए किफायती स्वास्थ्य सेवा, निदान, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों की पहचान की गई है। बीआईआरएसी के पास पहले से सीएसआर कार्यान्वयन एजेंसी ढांचा मौजूद है और उसने प्रायोगिक कॉर्पोरेट सीएसआर पहल भी शुरू की हैं। इन पहलों को आगे व्यापक स्तर पर विस्तार देने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
जम्मू और वडोदरा हवाई अड्डों पर ब्रांडिंग पहल
बीआईआरएसी की पहुंच और दृश्यता बढ़ाना भी बैठक के प्रमुख एजेंडे में रहा। बीआईआरएसी ने जम्मू और वडोदरा हवाई अड्डों पर ब्रांडिंग पहल का प्रस्ताव रखा है। इसके जरिए डीबीटी-बीआईआरएसी की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के साथ कॉरपोरेट्स, निवेशकों और वैश्विक भागीदारों के बीच भारत के जैव प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम के साथ सहयोग की संभावनाओं को सामने लाया जाएगा। जम्मू जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और कृषि नवाचार के क्षेत्र में उभर रहा है, जबकि वडोदरा में फार्मा-बायोटेक विनिर्माण का मजबूत आधार मौजूद है।
स्टार्टअप और निवेशकों के लिए बनेगा समर्पित मंच
बैठक में विकास-चरण की पूंजी तक पहुंच मजबूत करने के लिए भारत के जैव प्रौद्योगिकी निवेश तंत्र को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। इस दिशा में बीआईआरएसी ने ‘बीआईआरएसी स्टार्टअप इन्वेस्टर कनेक्ट’ का प्रस्ताव रखा है। यह निवेश के लिए तैयार जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप और निवेशकों को एक मंच पर लाने के लिए समर्पित प्लेटफॉर्म होगा।
व्यावसायीकरण में तेजी लाने का लक्ष्य
‘बीआईआरएसी स्टार्टअप इन्वेस्टर कनेक्ट’ का उद्देश्य जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश के अवसरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, रणनीतिक साझेदारी को सुगम बनाना, निवेश नेटवर्क को मजबूत करना और नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण में तेजी लाना है।
विकसित भारत 2047 के अनुरूप मजबूत होगा इकोसिस्टम
बैठक में चर्चा की गई पहलों का व्यापक उद्देश्य भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं, स्वदेशी जैव प्रौद्योगिकी उत्पादों, उद्योग और निवेश के बीच संबंध मजबूत करना तथा सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए अधिक अवसर पैदा करना है। इसके जरिए भारतीय जैव प्रौद्योगिकी नवाचारों को प्रयोगशाला सत्यापन से व्यावसायीकरण तक पहुंचाने की प्रक्रिया में तेजी लाने और विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी जैव प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम की नींव मजबूत करने का लक्ष्य है। (इनपुट: पीआईबी)


