केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय फ्लोरोसिस दिवस के अवसर पर फ्लोरोसिस की रोकथाम, शीघ्र पहचान, प्रबंधन और नियंत्रण को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय बहु-हितधारक कार्यशाला का आयोजन किया। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के माध्यम से राष्ट्रीय फ्लोरोसिस रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (एनपीपीसीएफ) के तहत आयोजित कार्यशाला में अनुसंधान, नवाचार और बहुक्षेत्रीय कार्रवाई के जरिए कार्यक्रम की पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ हुए शामिल
कार्यशाला में जल शक्ति मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, राष्ट्रीय दंत आयोग, राज्य नोडल अधिकारियों और सलाहकारों समेत विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और संस्थानों की भागीदारी ने फ्लोरोसिस की समस्या से निपटने के लिए समन्वित और बहुक्षेत्रीय दृष्टिकोण की आवश्यकता को रेखांकित किया।
कार्यक्रम की पहुंच बढ़ाने पर जोर
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य एनपीपीसीएफ की पहुंच और कवरेज का विस्तार करना, अनुसंधान एवं नवाचार के जरिए कार्यक्रम के कार्यान्वयन को मजबूत करना और फ्लोरोसिस की प्रभावी रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वित कार्रवाई को बढ़ावा देना था। मंच पर कार्यक्रम से जुड़े मौजूदा प्रयासों की समीक्षा के साथ भविष्य की रणनीतियों पर भी चर्चा की गई।
वास्तविक समय में सूचना साझा करने की जरूरत
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अपर महानिदेशक डॉ. पुष्पा लता ने राष्ट्रीय फ्लोरोसिस रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम और इसके प्रमुख उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने फ्लोरोसिस की रोकथाम, शीघ्र पहचान और प्रभावी प्रबंधन के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वास्तविक समय में सूचना साझा करना भी फ्लोरोसिस नियंत्रण प्रयासों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पेयजल और स्वच्छता क्षेत्र अहम
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव ललित वधवा ने अंतर-क्षेत्रीय समन्वय के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने विशेष रूप से पेयजल और स्वच्छता से जुड़े क्षेत्रों की भूमिका पर जोर दिया। कार्यशाला में बताया गया कि अत्यधिक फ्लोराइड के संपर्क और फ्लोरोसिस की व्यापकता के बीच घनिष्ठ संबंध है, इसलिए स्वास्थ्य क्षेत्र के साथ पेयजल और स्वच्छता से जुड़े विभागों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
निगरानी और शीघ्र निदान पर फोकस
राष्ट्रीय फ्लोरोसिस रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम का उद्देश्य निगरानी, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य शिक्षा, मामलों के शीघ्र निदान और प्रबंधन के जरिए फ्लोरोसिस की रोकथाम और नियंत्रण करना है। इसके साथ ही अत्यधिक फ्लोराइड के संपर्क को कम करने के लिए उपयुक्त अंतर-क्षेत्रीय उपायों पर भी ध्यान दिया जाता है।
राज्यों ने साझा किए अनुभव
बहु-हितधारक मंच ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ अन्य संबंधित हितधारकों को अपने अनुभव, सर्वोत्तम कार्य प्रणालियां और जमीनी स्तर की सीख साझा करने का अवसर दिया। इन अनुभवों के जरिए कार्यक्रम के कार्यान्वयन में मौजूद चुनौतियों को समझने और फ्लोरोसिस की रोकथाम एवं नियंत्रण के उपायों को और प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।
जागरूकता और उचित देखभाल तक पहुंच बढ़ाने की प्रतिबद्धता
कार्यशाला के माध्यम से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने फ्लोरोसिस से जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। मंत्रालय ने जागरूकता बढ़ाने, शीघ्र निदान को प्रोत्साहित करने और प्रभावित लोगों तक उचित देखभाल की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इन प्रयासों का उद्देश्य स्वस्थ समुदायों को बढ़ावा देना और लोगों की जीवन गुणवत्ता में सुधार करना है। (इनपुट: पीआईबी)


