गुजरात के छोटा उदेपुर जिले के आदिवासी इलाकों में अब बैंकिंग सेवाएं घर के पास ही उपलब्ध हो गई हैं। स्थानीय ‘बैंक सखी’ महिलाओं की मदद से ग्रामीणों को दूर की बैंक शाखाओं तक जाने की जरूरत नहीं पड़ रही।
मोरखाला गांव में सुष्माबेन का BC पॉइंट
मोरखाला गांव की सुष्माबेन शांतिलाल राठवा पिछले दो साल से अपने घर से ही बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट (BC) पॉइंट चला रही हैं। वे आस-पास के गांव वालों को कैश जमा करने, पैसे निकालने और KYC जैसी सेवाएं दे रही हैं। सुष्माबेन ने बताया, “पहले खाता खोलने या लेन-देन के लिए बैंक में लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था। अब गांव वाले इसी पॉइंट पर आसानी से पैसे जमा- पैसे निकालने और अन्य सेवाएं ले सकते हैं।”
सखी मंडल से शुरू हुआ सफर
उनका बैंकिंग सफर नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन (NRLM) के तहत ‘सखी मंडल’ से जुड़ने के बाद शुरू हुआ। ट्रेनिंग लेकर ‘बैंक सखी’ का सर्टिफिकेट हासिल करने के बाद उन्होंने बैंक में प्रैक्टिकल अनुभव लिया। हफ्ते में तीन दिन बैंक जाकर काम करने के लिए उन्हें 3,000 रुपये मासिक मिलते थे। इसके बाद उन्होंने गांव में अपना सर्विस पॉइंट शुरू किया।
गांव वालों को मिली बड़ी राहत
पहले मोरखाला और आस-पास के लोगों को बोदेली (12-13 किमी) या सूर्यगोडा (7-8 किमी) जाना पड़ता था। अब सेवाएं गांव में ही उपलब्ध हैं। स्थानीय निवासी प्रफुलभाई रणछोरभाई बारिया ने कहा, “घर के पास बैंकिंग सुविधा होने से पैसे जमा-निकलना बहुत आसान और भरोसेमंद हो गया है।”
एक अन्य निवासी नवनीत कुमार ने बताया, “पहले दो-तीन किलोमीटर जाना पड़ता था। अब सारे लेन-देन गांव में ही हो जाते हैं।”
महिलाओं को रोजगार और वित्तीय समावेशन
‘फिनटेक सखी’ पहल ग्रामीण समुदायों को जरूरी वित्तीय सेवाओं से जोड़ रही है और प्रशिक्षित महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा कर रही है। डिजिटल बैंकिंग को स्थानीय उद्यमिता से जोड़कर यह आदिवासी क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन बढ़ा रही है। सुष्माबेन जैसी महिलाएं आर्थिक स्वतंत्रता हासिल कर रही हैं और समुदाय के लिए बैंकिंग को सुविधाजनक बना रही हैं।यह मॉडल दिखाता है कि ट्रेनिंग और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच महिलाओं को स्थानीय सेवा प्रदाता बना सकती है। (इनपुट-एजेंसी)


