युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) को सहायता देने की संशोधित योजना के संचालन संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक इस योजना को जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके लिए कुल 7,386.74 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। संशोधित योजना में 2030 राष्ट्रमंडल खेलों और 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत की दावेदारी को ध्यान में रखते हुए कई नई पहल शामिल की गई हैं।
यह योजना ओलंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, पैरालंपिक और विश्व चैंपियनशिप जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी में भारतीय खिलाड़ियों की मदद करने का प्रमुख माध्यम है। इसके तहत राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों, खेल अकादमियों में अभ्यास, खिलाड़ियों के रहने-खाने, खेल किट, बीमा और खेल विज्ञान से जुड़ी सेवाओं के लिए सहायता दी जाती है।
योजना में विदेशी प्रशिक्षकों, उच्च प्रदर्शन निदेशकों और फिजियोथेरेपिस्ट, खेल वैज्ञानिकों तथा डॉक्टरों जैसे सहयोगी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए भी सहायता का प्रावधान है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भागीदारी, वरिष्ठ, जूनियर और सब-जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप के आयोजन, जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान और युवा खिलाड़ियों के विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय खेल महासंघों के प्रशासन और संचालन को मजबूत करने में भी मदद दी जाती है।
संशोधित योजना के तहत भारत में अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाई गई है। अब प्रतियोगिता की प्रकृति, महत्व, भाग लेने वाले देशों और खिलाड़ियों की संख्या के आधार पर राष्ट्रीय खेल महासंघों को अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक की सहायता मिल सकती है। महासंघों के प्रस्तावों का मूल्यांकन खेल सचिव की अध्यक्षता वाली निर्धारित समिति करेगी।
खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्र (ओटीसी) स्थापित करने की भी योजना है। इन केंद्रों में आधुनिक खेल विज्ञान उपकरण, उन्नत प्रशिक्षण सुविधाएं और विशेषज्ञ उपलब्ध होंगे। प्रत्येक केंद्र किसी एक खेल पर केंद्रित होगा। इसका उद्देश्य भारतीय खिलाड़ियों की विदेशी प्रशिक्षण सुविधाओं पर निर्भरता कम करना है। इन केंद्रों में प्रशिक्षण लेने वाले शीर्ष भारतीय खिलाड़ियों को प्रशिक्षकों, तकनीकी कर्मचारियों, खेल विज्ञान सेवाओं, विशेष उपकरणों और तकनीकी सहायता के लिए मदद दी जाएगी।
राष्ट्रीय खेलों के आयोजन को बेहतर स्तर और व्यापक पैमाने पर कराने के लिए भी संशोधित योजना में प्रावधान किया गया है। इसके तहत खेल उपकरण, समय निर्धारण, स्कोरिंग और परिणाम सेवाओं, तकनीकी अधिकारियों के पारिश्रमिक तथा प्रतियोगिताओं के तकनीकी संचालन के लिए अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जा सकेगी।
भारतीय पारंपरिक खेलों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए भी सहायता का नया प्रावधान शामिल किया गया है। इसके तहत संबंधित राष्ट्रीय खेल महासंघों को ओलंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों जैसी प्रतियोगिताओं में पारंपरिक खेलों को प्रदर्शन स्पर्धा के रूप में शामिल कराने के प्रयासों में मदद दी जाएगी। इसके अलावा, दूसरे देशों में इन खेलों के राष्ट्रीय महासंघ स्थापित करने और भारत में कार्यालय रखने वाले संबंधित अंतरराष्ट्रीय या महाद्वीपीय महासंघों को जरूरी सहायता देने का भी प्रावधान है।
संशोधित योजना में ग्लोबल साउथ के देशों के साथ खेल सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। भारत के भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के केंद्रों और अन्य संस्थानों में उपलब्ध उच्च प्रदर्शन केंद्रों तथा प्रशिक्षण सुविधाओं का उपयोग दूसरे देशों के खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जा सकेगा। इसके लिए छात्रवृत्ति और रियायती दरों पर प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़ी गतिविधियों को भी सहायता दी जाएगी।
इसके अलावा, ब्रिक्स, बिम्सटेक और अन्य समान बहुपक्षीय संगठनों के लिए खेल प्रतियोगिताओं, खेल संबंधी सम्मेलनों, बैठकों, शोध कार्यों और कार्यशालाओं के आयोजन को वित्तीय सहायता देने का प्रावधान किया गया है।
भारत में कार्यालय रखने वाले मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय और महाद्वीपीय खेल संगठनों को सहयोग देने के लिए भी योजना में व्यवस्था की गई है। इसके तहत राष्ट्रीय खेल महासंघों या राष्ट्रीय ओलंपिक समिति को जरूरत के अनुसार सहायता दी जा सकेगी। इस संबंध में खेल सचिव की अध्यक्षता वाली निर्धारित समिति की सिफारिश के आधार पर मामले-दर-मामले निर्णय लिया जाएगा।
-(इनपुटः पीआईबी)


