मेक्सिको के आंतरिक मामलों में विदेशी दखल मंजूर नहीं: राष्ट्रपति क्लाउडिया शेनबौम

मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शेनबौम ने एक बार फिर कहा है कि उनकी सरकार देश के आंतरिक मामलों में किसी भी विदेशी दखल या हस्तक्षेप को मंजूर नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ संबंध सहयोग और तालमेल पर आधारित होने चाहिए। सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेनबौम ने उन लोगों की आलोचना की जो, उनके मुताबिक, विदेशी हस्तक्षेप का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अमेरिका के कुछ वर्गों और मेक्सिको के विपक्षी दलों में भी मौजूद हैं।

उन्होंने कहा, “हम हमेशा इस सिद्धांत का बचाव करेंगे कि किसी तरह का हस्तक्षेप या दखल नहीं होना चाहिए। सिर्फ सहयोग और समन्वय होना चाहिए और वह भी बिना किसी अधीनता के। यही हमारा रुख रहेगा, क्योंकि यह हमारे सिद्धांतों, हमारे इतिहास, हमारी सोच और हमारे संविधान के अनुरूप है।” स‍िन्हुआ न्यूज के अनुसार, शेनबौम ने एक जनमत सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा कि 91 प्रतिशत लोगों ने किसी विदेशी हस्तक्षेप का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह सवाल उठाना जरूरी है कि आखिर किसे फायदा होता है जब यह धारणा फैलाने की कोशिश की जाती है कि मेक्सिको के लोग कुछ और सोचते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के कुछ समूह और दक्षिणपंथी मीडिया हस्तक्षेप को बढ़ावा देना चाहते हैं।

इस बीच, निजी क्षेत्र के आर्थिक अध्ययन केंद्र (सीईईएसपी) ने सोमवार को कहा कि मेक्सिको सरकार का 2027 के लिए प्रस्तावित आर्थिक पैकेज पहले की तुलना में ज्यादा यथार्थवादी आर्थिक तस्वीर पेश करता है, क्योंकि सरकार ने आर्थिक विकास (ग्रोथ) के अनुमान कम कर दिए हैं। हालांकि, इससे सार्वजनिक कर्ज को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं। अपने साप्ताहिक आर्थिक विश्लेषण में सीईईएसपी ने कहा कि पिछले सप्ताह संसद (कांग्रेस) में पेश किए गए बजट प्रस्ताव में 2026 और 2027 के विकास अनुमान घटाए गए हैं। इससे ये अनुमान अब वित्तीय विश्लेषकों और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के आकलनों के ज्यादा करीब आ गए हैं।

सीईईएसपी ने कहा, “मैक्रोइकोनॉमिक फ्रेमवर्क के आंकड़ों में किया गया यह बदलाव ज्यादा वास्तविक स्थिति को दर्शाता है।” हालांकि, संगठन ने चेतावनी दी कि बजट में अभी भी कुछ ऐसे अनुमान शामिल हैं जो जरूरत से ज्यादा आशावादी हो सकते हैं। मेक्सिको सरकार कई वर्षों से वित्तीय अनुशासन (फिस्कल कंसॉलिडेशन) की नीति पर काम कर रही है। उसका लक्ष्य धीरे-धीरे बजट घाटा कम करना और सार्वजनिक कर्ज को स्थिर रखना है, ताकि सरकारी खर्चों को पूरा करने के लिए लगातार बढ़ते कर्ज पर निर्भरता न बढ़े।(इनपुट-आईएएनएस)

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