भारत-अमेरिका ट्रेड डील काफी आगे बढ़ चुकी है, सेक्शन 301 अभी भी मुख्य मुद्दा: विदेश मंत्री

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में एक आम सहमति तो बन गई है, लेकिन अमेरिकी टैरिफ नियमों में बदलाव और चल रही सेक्शन 301 की प्रक्रिया अभी भी मुख्य मुद्दे बने हुए हैं। एशिया सोसाइटी द्वारा आयोजित एक खास बातचीत में डॉ. एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि सेक्शन 301 की चल रही प्रक्रिया यह तय करने में अहम कारक है कि डील को कब अंतिम रूप दिया जाए। उन्होंने कहा, “301 प्रक्रिया अभी भी चल रही है, अभी भी इस पर काम हो रहा है। इसलिए हमारे लिए मुद्दा यह है कि किस चरण पर हम उस समझौते को अंतिम रूप दें जो पहले से ही काफी आगे बढ़ चुका है।”

सेक्शन 301 क्या है और भारत पर इसका असर

अमेरिकी ट्रेड एक्ट 1974 का सेक्शन 301 अमेरिका को उन व्यापारिक तौर-तरीकों की जांच करने की अनुमति देता है जिन्हें वह अनुचित मानता है। इसके तहत अतिरिक्त टैरिफ लगाने सहित प्रवर्तन कार्रवाई की जा सकती है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ऐसी जांच करने और उन प्रथाओं पर प्रतिक्रिया देने के लिए जिम्मेदार है जो अमेरिकी व्यापार अधिकारों या समझौतों का उल्लंघन कर सकते हैं। जुलाई में यूएसटीआर ने भारत सहित 60 अर्थव्यवस्थाओं में जबरन श्रम से संबंधित आयात प्रतिबंधों और प्रवर्तन प्रथाओं की जांच के बाद सेक्शन 301 के तहत अंतिम उपायों की घोषणा की। यूएसटीआर ने भारतीय आयात पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ भी लगाया, जो जून में शुरू में प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत से कम था। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका के साथ लगातार बातचीत से भारत को कम टैरिफ वाले दायरे में लाने में मदद मिली।

छोटे उत्पादकों वाला भारत, धैर्य की जरूरत

बातचीत की जटिलता को समझाते हुए डॉ. एस. जयशंकर ने भारतीय और अमेरिकी अर्थव्यवस्थाओं की संरचना में अंतर की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “भारत छोटे उत्पादकों, छोटे कृषि उत्पादकों और छोटी फैक्ट्रियों वाला समाज है। इसलिए भारत और अमेरिका के बीच प्रति व्यक्ति आय के अंतर के अलावा, उत्पादन का स्वरूप और समाज का स्वरूप भी बहुत अलग है। इसलिए व्यापार वार्ता को पूरा करने के लिए काफी धैर्य और बारीकियों पर ध्यान देने की आवश्यकता थी।” डॉ. एस. जयशंकर के अनुसार, दोनों पक्ष अब किसी समझौते पर पहुंचने के करीब हैं। उन्होंने कहा, “तेजी से आगे बढ़ने की जो उम्मीद थी, उसे जमीनी हकीकत की कसौटी पर परखा गया, जो कहीं ज्यादा जटिल थी। इसलिए आज हम ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं जहां ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर लगभग सहमति बन गई है।”

गोयल ने पहले कहा था—समझौता पूरी तरह तय

इससे पहले वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को “पूरी तरह तय” बताया था। उन्होंने कहा था कि जब भारत को अमेरिकी बाजार में आसियान देशों, चीन और बांग्लादेश जैसे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों की तुलना में सही प्रतिस्पर्धी फायदे मिल जाएंगे, तब यह समझौता आगे बढ़ सकता है। (इनपुट-एजेंसी)