गुजरात उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीरेन अनिरुद्ध वैष्णव ने बुधवार को गांधीनगर स्थित लोक भवन में आयोजित समारोह में गुजरात के लोकायुक्त के रूप में शपथ ली। उन्हें आचार्य देवव्रत ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण समारोह में भूपेंद्र पटेल, शंकर चौधरी, हर्ष संघवी, राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
नियुक्ति पर दी गई बधाई
समारोह के बाद राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने बीरेन वैष्णव को लोकायुक्त नियुक्त होने पर शुभकामनाएं दीं।
2016 में बने थे हाई कोर्ट के न्यायाधीश
बीरेन वैष्णव ने अप्रैल 2016 से मई 2025 तक गुजरात उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दीं। उन्हें 6 अप्रैल 2016 को अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया था, जबकि मार्च 2018 में स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति मिली थी।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सेवा कानून, प्रशासनिक विवादों और संवैधानिक मामलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की। इस वर्ष की शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल की अनुपस्थिति के दौरान उन्होंने कई बार गुजरात उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी भी संभाली।
कई महत्वपूर्ण फैसलों के लिए रहे चर्चित
केंद्र सरकार ने फरवरी और अप्रैल 2025 में उन्हें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने संबंधी अधिसूचनाएं जारी की थीं। न्यायमूर्ति वैष्णव के कई फैसले सरकारी सेवा मामलों, कर्मचारी अधिकारों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े रहे।
रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2022 के एक फैसले में उन्होंने कहा था कि सरकारी कर्मचारियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों को यांत्रिक तरीके से खारिज नहीं किया जाना चाहिए।
भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच करेगा लोकायुक्त
लोकायुक्त एक भ्रष्टाचार-रोधी संवैधानिक संस्था है, जिसे लोक सेवकों और राज्य प्राधिकरणों के खिलाफ भ्रष्टाचार तथा कुप्रशासन संबंधी शिकायतों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। बीरेन वैष्णव की नियुक्ति के साथ गुजरात में यह महत्वपूर्ण संवैधानिक पद भर गया है। (इनपुट: आईएएनएस)


