भारत और अमेरिका के बीच संभावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर उद्योग जगत में चर्चाओं के बीच ब्लू स्टार लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक तथा सीआईआई पश्चिमी क्षेत्र के अध्यक्ष वीर एस. आडवाणी ने शुक्रवार को कहा कि मुक्त व्यापार समझौते भारत के निर्यात और वैश्विक व्यापार विस्तार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि दुनिया में भू-राजनीतिक बदलाव लगातार होते रहेंगे और उद्योगों को इन चुनौतियों के बीच आगे बढ़ना होगा।
आडवाणी ने कहा, “एफटीए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि हाल के वर्षों में भारत ने कई मित्र देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देश भारतीय निर्यातकों के लिए बेहद अहम बाजार हैं। भू-राजनीतिक घटनाक्रम आगे भी जारी रहेंगे और समय-समय पर बदलाव आते रहेंगे।”
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सतर्क टिप्पणी
भारत-अमेरिका संभावित व्यापार समझौते पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि फिलहाल कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है, इसलिए इसकी शर्तों और प्रभावों पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। आडवाणी ने स्पष्ट किया, “भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते की चर्चा जरूर चल रही है, लेकिन अभी तक कोई समझौता हस्ताक्षरित नहीं हुआ है। इसलिए इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं है।” उन्होंने ईरान और पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट का जिक्र करते हुए कहा कि इससे वैश्विक व्यापार के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
उन्होंने आशंका जताई कि 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने का खतरा भी बना हुआ है, जिसका असर भारतीय निर्यात पर पड़ सकता है। आडवाणी ने कहा, “ईरान और पश्चिम एशिया संकट के कारण 100 प्रतिशत टैरिफ का खतरा पैदा हो गया है। इसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना होगा। हालांकि भारत सरकार अमेरिका के साथ लगातार बातचीत कर रही है ताकि भारतीय निर्यात पर इसका असर न्यूनतम रहे।”
सीआईआई ग्लोबल ट्रेड सेमिनार का महत्व
मुंबई में आयोजित सीआईआई ग्लोबल ट्रेड सीनारियो के 7वें संस्करण को लेकर आडवाणी ने कहा कि यह कार्यक्रम वैश्विक व्यापार की बदलती परिस्थितियों को समझने का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। उन्होंने बताया, “यह सम्मेलन बहुत महत्वपूर्ण है। इसका सातवां संस्करण है और इसे हर वर्ष मुंबई में आयोजित किया जाता है क्योंकि महाराष्ट्र भारत का सबसे बड़ा निर्यातक राज्य है। महाराष्ट्र और गुजरात दोनों पश्चिमी क्षेत्र में आते हैं और हम सीआईआई के पश्चिमी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।”उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यापार माहौल में भारतीय उद्योगों के सामने अवसर और चुनौतियां दोनों हैं। ऐसे मंच सरकार, उद्योग और निर्यातकों के बीच संवाद को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
बंदरगाह क्षमता बढ़ाने की जरूरत
देश की लॉजिस्टिक्स और निर्यात क्षमताओं पर बात करते हुए आडवाणी ने कहा कि भारत को अपनी बंदरगाह क्षमता में बड़े पैमाने पर विस्तार करने की जरूरत है। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) को अच्छा बंदरगाह बताया, लेकिन कहा कि देश के विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए मौजूदा क्षमता पर्याप्त नहीं है। आडवाणी ने कहा, “जेएनपीए एक अच्छा पोर्ट है, लेकिन भारतीय निर्माताओं के लिए 10 मिलियन टीईयू की क्षमता पर्याप्त नहीं है। देश को इससे कहीं अधिक पोर्ट क्षमता की जरूरत है। हमें खुशी है कि वधावन पोर्ट विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना कई दशकों से विचाराधीन रही है और करीब 30 वर्ष पहले पहली बार इसकी घोषणा की गई थी।”
वधावन पोर्ट परियोजना पर उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े ग्रीनफील्ड पोर्ट प्रोजेक्ट में तकनीकी चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन सरकार ने परियोजना को अंतिम रूप देते समय विभिन्न पहलुओं पर विचार किया होगा। आडवाणी ने विश्वास जताया कि सरकार और उद्योग जगत के संयुक्त प्रयासों से भारत वैश्विक व्यापार की चुनौतियों का सामना करने और नए अवसरों का लाभ उठाने में सफल रहेगा। (इनपुट-एजेंसी)


