नारियल के छिलके से वैश्विक कारोबार तक, भारत का कॉयर उद्योग रच रहा नई कहानी

भारत दुनिया में नारियल के रेशे और उससे बने उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर 21,000 से अधिक नारियल फाइबर इकाइयां पंजीकृत हैं, जिनसे 2.3 लाख लोग जुड़े हैं। पिछले एक दशक में नारियल फाइबर और उससे बने उत्पादों के निर्यात में 305.70% की वृद्धि दर्ज की गई है। पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों, मूल्यवर्धन, रोजगार सृजन और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने वाला यह पारंपरिक क्षेत्र अब नवाचार और सतत विकास के साथ भारत के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की बढ़ती मांग

नारियल के रेशे से बने पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ उत्पाद जैसे चटाई, गद्दे, रस्सियां, ब्रश और अन्य उपयोगी वस्तुएं दैनिक जीवन का हिस्सा बनती जा रही हैं। नारियल का रेशा नारियल के बाहरी, सख्त छिलके से निकाला जाने वाला प्राकृतिक रेशेदार पदार्थ है। इन प्राकृतिक रेशों को संसाधित कर कई तरह के व्यावसायिक और मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जाते हैं।

पारंपरिक उद्योग से आधुनिक इकोसिस्टम तक

नारियल फाइबर क्षेत्र भारत के सबसे पुराने और पारंपरिक उद्योगों में से एक है। यह पर्यावरण-अनुकूल विनिर्माण का ऐसा क्षेत्र है, जिसमें नारियल के छिलकों से रेशे निकालकर उन्हें विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पादों में बदला जाता है। इससे एक ओर कृषि अवशेष का बेहतर उपयोग होता है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और पारंपरिक समुदायों के लिए रोजगार एवं आय के अवसर पैदा होते हैं।

वैश्विक उत्पादन में भारत की बड़ी हिस्सेदारी

भारत दुनिया में नारियल के रेशे और उससे बने उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। वैश्विक उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग दो-तिहाई है। भारतीय नारियल फाइबर उद्योग का कारोबार लगभग 16,000 करोड़ रुपए का है और यह देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब 1% का योगदान देता है।

6,614.40 करोड़ रुपए का निर्यात

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से नारियल के रेशे और उससे बने उत्पादों का निर्यात 6,614.40 करोड़ रुपए रहा। अमेरिका, चीन, नीदरलैंड, स्पेन और ब्रिटेन प्रमुख निर्यात गंतव्य रहे। नारियल का गूदा, रेशा, सूत और गुंथी हुई चटाई भारत से निर्यात किए जाने वाले प्रमुख नारियल उत्पादों में शामिल हैं।

रोजगार में महिलाओं की बड़ी भागीदारी

भारतीय नारियल फाइबर क्षेत्र में 21,000 से अधिक इकाइयां हैं। यह क्षेत्र प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से 7 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार प्रदान करता है, जिनमें लगभग 80% ग्रामीण परिवारों की महिलाएं हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आय, कौशल और आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा मिल रहा है।

कॉयर विकास योजना से क्षेत्र को समर्थन

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ‘कॉयर विकास योजना’ (सीवीवाई) के माध्यम से कॉयर क्षेत्र के सतत विकास और विस्तार को बढ़ावा दे रहा है। योजना का उद्देश्य कॉयर कारीगरों और उद्योगों को तकनीकी, कौशल, विपणन और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।

तकनीक और कौशल विकास पर जोर

कॉयर विकास योजना के तहत नई प्रौद्योगिकियों, मशीनों और उत्पादों के विकास पर जोर दिया जाता है। इसके अलावा कौशल प्रशिक्षण और प्रचार कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तथा घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नारियल फाइबर और उससे बने उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा दिया जाता है।

बाजार विस्तार और निर्यात प्रोत्साहन

योजना के तहत व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों और अन्य प्रचार गतिविधियों के माध्यम से जागरूकता पैदा की जाती है। बिक्री बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में नारियल फाइबर निर्यातकों की भागीदारी को भी सुगम बनाया जाता है। क्षेत्र से संबंधित आंकड़ों का संकलन और प्रकाशन भी योजना का हिस्सा है।

12 वर्षों में निर्यात चार गुना से अधिक

वर्ष 2014-15 से पिछले 12 वर्षों के दौरान नारियल फाइबर क्षेत्र ने उल्लेखनीय प्रगति की है। नारियल फाइबर और उससे बने उत्पादों का निर्यात वित्त वर्ष 2014-15 में 1,630.33 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 6,614.40 करोड़ रुपए हो गया। इस दौरान निर्यात में 305.70% की वृद्धि दर्ज की गई, जो चार गुना से अधिक की बढ़ोतरी है।

उद्यम पंजीकरण से औपचारिक अर्थव्यवस्था से जुड़ाव

उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर 21,000 से अधिक नारियल फाइबर इकाइयां पंजीकृत हैं। इन इकाइयों में 2.3 लाख लोग कार्यरत हैं और ये औपचारिक एमएसएमई इकोसिस्टम का हिस्सा हैं। इससे छोटे उद्यमों को औपचारिक आर्थिक व्यवस्था से जुड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के अवसर मिलते हैं।

68,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण

विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के तहत 68,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया है। इनमें 80% से अधिक महिलाएं हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक और बाजार की जरूरतों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

150 से अधिक नई मशीनें और तकनीकें

नारियल फाइबर क्षेत्र में 150 से अधिक नवोन्मेषी मशीनें, प्रौद्योगिकियां और मूल्यवर्धित उत्पाद सक्रिय किए गए हैं। तकनीकी नवाचार से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और नए बाजारों के लिए उपयुक्त उत्पाद विकसित करने में मदद मिल रही है।

निर्यातकों और उद्यमियों को वित्तीय सहायता

विदेशों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में 1,000 से अधिक निर्यातकों की भागीदारी को सुगम बनाया गया। निर्यात बाजार प्रोत्साहन के तहत 850 से अधिक उद्यमियों को 20 करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इसके अलावा देशभर में 1,400 से अधिक प्रचार कार्यक्रम आयोजित किए गए और 950 से अधिक प्रदर्शनियों में भागीदारी की गई।

रंजना कदम ने खड़ा किया अपना कॉयर उद्यम

महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले की रंजना रामचंद्र कदम ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत अपना उद्यम स्थापित किया। कॉयर बोर्ड के मार्गदर्शन में उन्होंने कॉयर इकाई शुरू की। कॉयर बोर्ड कार्यालय के सहयोग से उन्होंने शेड का निर्माण कराया और व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक मशीनरी एवं उपकरण प्राप्त किए। उनकी इकाई वर्तमान में कॉयर की रस्सियां, तकिए और डोरमैट का निर्माण करती है तथा छह लोगों को पूर्णकालिक रोजगार प्रदान करती है।

प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन से संपूर्ण प्लस एग्रो फर्टिलाइजर को बढ़ावा

केरल के कोझिकोड स्थित संपूर्ण प्लस एग्रो फर्टिलाइजर एंटरप्राइजेज को कॉयर बोर्ड के उप-क्षेत्रीय कार्यालय, कन्नूर और केंद्रीय कॉयर अनुसंधान संस्थान (सीसीआरआई), कलावूर से मिले प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन से मजबूती मिली। उद्यम के संचालक सुरेंद्रन पी. ने कॉयर पिथ बायो-फर्टिलाइजर के उत्पादन और उपयोग पर व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों, प्रदर्शनों और जागरूकता सत्रों में भाग लिया।

एक साल में 500 से अधिक ग्राहक जुड़े

महज एक वर्ष के भीतर उद्यम ने 500 से अधिक ग्राहकों का आधार तैयार कर लिया। इकाई ने 20 टन से अधिक कॉयर पिथ बायो-फर्टिलाइजर की बिक्री दर्ज की है। वर्तमान में उद्यम 5 श्रमिकों को रोजगार देता है, जिनमें 2 महिलाएं शामिल हैं।

अल्लम गौथमी ने प्रशिक्षण को उद्यम में बदला

आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले की अल्लम गौथमी ने पांच वर्ष पहले कॉयर बोर्ड प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त किया। तकनीकी मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उन्होंने एडिगो कॉयर प्रोडक्ट्स नाम से अपना उद्यम स्थापित किया। उन्हें पीएमईजीपी के तहत वित्तीय सहायता भी मिली।

35 लाख रुपए का वार्षिक कारोबार

आज उनकी इकाई का वार्षिक कारोबार करीब 35 लाख रुपए है और वह लगभग 10 लाख रुपए का वार्षिक लाभ अर्जित करती है। इस उद्यम ने छह महिलाओं को रोजगार दिया है। गौथमी कॉयर बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय, राजामुंद्री और मंडल परिषद के अधिकारियों के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित करती हैं। उन्होंने करीब 120 महिलाओं को कॉयर मैट बुनाई, रस्सी बनाने और हस्तशिल्प उत्पादन का प्रशिक्षण दिया है।

जी. साबू ने शुरू की कॉयर कताई इकाई

केरल के अलाप्पुझा निवासी जी. साबू ने पीएमईजीपी के तहत और कलावूर स्थित कॉयर बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय के सहयोग से वर्ष 2024 में कॉयर कताई इकाई शुरू की। संचालन शुरू होने के बाद इकाई ने अलाप्पुझा की स्थानीय कॉयर समितियों और निर्माताओं को कॉयर सूत और रस्सी की नियमित आपूर्ति स्थापित की है।

स्थानीय महिलाओं को मिला रोजगार

इस उद्यम ने आसपास के गांवों के 8-10 स्थानीय श्रमिकों को प्रत्यक्ष रोजगार दिया है, जिनमें अधिकतर महिलाएं हैं। इकाई के मासिक कारोबार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे उद्यमी को स्थिर आय और कर्मचारियों को नियमित वेतन मिल रहा है।

सतत विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार

नारियल फाइबर क्षेत्र अब केवल पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं है। तकनीकी नवाचार, कौशल विकास, निर्यात प्रोत्साहन और मूल्यवर्धन ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला रोजगार और हरित विनिर्माण से जोड़ दिया है। नारियल के छिलकों को उपयोगी उत्पादों में बदलने वाला यह क्षेत्र संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर रहा है।

विकसित भारत के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका

आजीविका सृजन, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण उद्यमिता, निर्यात विस्तार और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन के माध्यम से नारियल फाइबर क्षेत्र भारत के सतत आर्थिक विकास में योगदान दे रहा है। पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजारों से जोड़कर यह क्षेत्र 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहा है। (इनपुट: पीआईबी)

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