पीएम ई-ड्राइव से बैटरी लोकलाइजेशन तक, ईवी हब बनने की राह पर भारत

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तेजी से परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा बन रही है। ईवी बिक्री में 2016 के बाद करीब 46 गुना वृद्धि, घरेलू विनिर्माण के विस्तार, चार्जिंग नेटवर्क के विकास और सरकारी प्रोत्साहनों ने भारत को वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन इकोसिस्टम में उभरती ताकत के रूप में स्थापित किया है। सरकार की एफएएमई, पीएम ई-ड्राइव, पीएलआई-ऑटो और पीएलआई-एसीसी जैसी योजनाएं मांग बढ़ाने के साथ-साथ बैटरी, वाहन और कंपोनेंट विनिर्माण के स्थानीयकरण पर जोर दे रही हैं।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बना रणनीतिक बदलाव का आधार

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विस्तार केवल प्रदूषण कम करने तक सीमित नहीं है। यह ऊर्जा सुरक्षा, पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाने, रोजगार सृजन और कम-कार्बन विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। शहरों में दैनिक आवागमन से लेकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी तक ईवी परिवहन के तौर-तरीकों को बदल रहे हैं।

2015 में शुरू हुई इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की नई यात्रा

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को व्यवस्थित नीतिगत समर्थन 2015 में नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान और एफएएमई इंडिया योजना के साथ मिला। इन पहलों का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात बिल घटाने, शहरी वायु प्रदूषण कम करने और परिवहन क्षेत्र के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को नियंत्रित करने के साथ ईवी के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना था।

एफएएमई योजना ने तैयार की शुरुआती जमीन

एनईएमएमपी 2020 के तहत 2015 में शुरू की गई एफएएमई इंडिया योजना ने ईवी खरीद पर प्रोत्साहन देने के साथ चार्जिंग अवसंरचना और विनिर्माण को समर्थन दिया। इसका पहला चरण मार्च 2019 तक चला, जबकि दूसरा चरण अप्रैल 2024 तक लागू रहा। कोविड के बाद वित्त वर्ष 2021-22 से ईवी अपनाने की गति में उल्लेखनीय तेजी आई और इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों ने बाजार में मजबूत जगह बनाई।

ईवी अपनाने की दर में बड़ा उछाल

ईवी की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2015-16 में महज 0.08 प्रतिशत थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 8.26 प्रतिशत हो गई। यह बदलाव भारतीय उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

2016 के 50 हजार से 2025 में 23 लाख ईवी बिक्री

भारत में 2016 में लगभग 50 हजार ईवी की बिक्री हुई थी, जो 2025 में बढ़कर करीब 23 लाख यूनिट हो गई। इस दौरान बिक्री में लगभग 46 गुना वृद्धि हुई। इसी अवधि में वैश्विक ईवी बिक्री लगभग 9.18 लाख से बढ़कर 2024 में 1.878 करोड़ यूनिट हुई, यानी वैश्विक बाजार में करीब 20 गुना वृद्धि दर्ज की गई।

उत्तर प्रदेश बना सबसे बड़ा ईवी बाजार

2025 में उत्तर प्रदेश 4 लाख से अधिक ईवी बिक्री के साथ देश का सबसे बड़ा ईवी बाजार रहा। राज्य की हिस्सेदारी कुल बिक्री में करीब 18 प्रतिशत रही। महाराष्ट्र 2.66 लाख यूनिट और करीब 12 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे, जबकि कर्नाटक 2 लाख यूनिट और 9 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

दोपहिया और तिपहिया वाहनों ने बढ़ाई रफ्तार

2025 में मोटर चालित दोपहिया वाहनों की करीब 12.8 लाख और तिपहिया वाहनों की करीब 8 लाख यूनिट बिक्री हुई। इन दोनों सेगमेंट ने ईवी अपनाने को व्यापक बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। पिछले दशक में ईवी रजिस्ट्रेशन में 62 प्रतिशत से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर भी दर्ज हुई है।

ईवी निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि

घरेलू बाजार के साथ भारतीय ईवी की अंतरराष्ट्रीय मांग भी बढ़ रही है। ईवी निर्यात का मूल्य 2020 में 12 लाख अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024 में 84 लाख अमेरिकी डॉलर हो गया। नेपाल, इंडोनेशिया और जापान भारतीय ईवी के प्रमुख निर्यात बाजारों में शामिल हैं।

चार्जिंग नेटवर्क का तेजी से विस्तार

भारत में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग अवसंरचना भी तेजी से बढ़ रही है। जुलाई 2026 तक देश में 52,718 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन मौजूद थे, जिनमें 16,561 स्टेशनों पर फास्ट चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध थी। ‘ई-अमृत’ टूल के जरिए उपयोगकर्ता अपनी लोकेशन के आधार पर नजदीकी चार्जिंग स्टेशन तलाश सकते हैं।

आईईएमआई से राज्यों के ईवी प्रदर्शन की निगरानी

नीति आयोग ने अगस्त 2025 में इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स लॉन्च किया। यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की प्रगति का आकलन करता है। परिवहन का विद्युतीकरण, चार्जिंग अवसंरचना की तैयारी और ईवी अनुसंधान एवं नवाचार से जुड़े 16 संकेतकों के आधार पर राज्यों का मूल्यांकन किया जाता है। दिल्ली, महाराष्ट्र और चंडीगढ़ ‘फ्रंटरनर’ श्रेणी में रहे।

घरेलू विनिर्माण से मजबूत हो रही सप्लाई चेन

भारत अब केवल ईवी असेंबली बाजार से आगे बढ़कर बैटरी पैक, मोटर, ड्राइवट्रेन, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, वायरिंग और चार्जिंग उपकरणों के घरेलू उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। टाटा मोटर्स, महिंद्रा, टीवीएस और बजाज ऑटो जैसी कंपनियां ईवी प्लेटफॉर्म, अनुसंधान एवं विकास और उत्पादन क्षमता में निवेश कर रही हैं।

‘ई विटारा’ ने दिखाया भारत का निर्यात सामर्थ्य

अगस्त 2025 में सुजुकी की पहली ग्लोबल स्ट्रैटेजिक बैटरी ईवी ‘ई विटारा’ की लॉन्चिंग भारत के ईवी विनिर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। भारत में निर्मित इन वाहनों को यूरोप और जापान समेत 100 से अधिक देशों में निर्यात करने का लक्ष्य रखा गया है।

करीब 400 स्टार्टअप बदल रहे ईवी इकोसिस्टम

भारत में करीब 400 ईवी स्टार्टअप काम कर रहे हैं। ये कंपनियां चार्जिंग अवसंरचना, बैटरी तकनीक, कम लागत वाले विनिर्माण और डेटा आधारित समाधान विकसित कर रही हैं। ईवी क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल वॉयस-इनेबल्ड नेविगेशन, रियल-टाइम ट्रैफिक सूचना, इंटेलिजेंट रूट प्लानिंग और कनेक्टेड फीचर्स के जरिए ड्राइविंग अनुभव को बेहतर बनाने में भी हो रहा है।

वित्त वर्ष 2025 में 1.4 अरब डॉलर से अधिक निवेश

ईवी इकोसिस्टम में निवेश भी तेज हुआ है। वित्त वर्ष 2025 में इस क्षेत्र ने 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की पूंजी जुटाई, जो 2024 की तुलना में करीब 27 प्रतिशत अधिक थी। इसमें ईवी विनिर्माता कंपनियों को करीब 1.2 अरब डॉलर मिले।

29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने बनाई ईवी नीति

दिसंबर 2025 तक 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने ईवी नीति अधिसूचित कर दी थी, जबकि चार अन्य राज्यों में नीतियां मसौदा स्तर पर थीं। तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य ईवी विनिर्माण और निवेश के प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहे हैं।

दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों को बदलने की योजना

जून 2026 में दिल्ली-एनसीआर में पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों तथा बसों को बदलने के लिए 9,585 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी गई। दो साल की इस योजना के तहत दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में करीब 2.07 लाख कमर्शियल वाहनों को बदले जाने का लक्ष्य है, जिसमें 1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसें शामिल हैं।

पीएम ई-ड्राइव से ईवी मांग और विनिर्माण को प्रोत्साहन

2024 में शुरू की गई पीएम ई-ड्राइव योजना का बजट 10,900 करोड़ रुपये है। इसका लक्ष्य मांग प्रोत्साहन, घरेलू विनिर्माण और चार्जिंग अवसंरचना के विस्तार के जरिए ईवी अपनाने को बढ़ाना है। योजना के तहत 28 लाख से अधिक ईवी को समर्थन देने का लक्ष्य है। जनवरी 2026 तक 22.12 लाख ईवी की बिक्री हो चुकी थी।

सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण पर जोर

पीएम ई-ड्राइव के तहत 14,028 ई-बसों के लिए 4,391 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इनमें 13,800 बसें बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे और सूरत जैसे सात बड़े शहरों के लिए निर्धारित हैं। देशभर में ईवी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए 2,000 करोड़ रुपये और वाहन परीक्षण एजेंसियों के आधुनिकीकरण के लिए 780 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

पीएम ई-बस सेवा योजना से 10 हजार बसों का लक्ष्य

पीएम ई-बस सेवा-पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म योजना के तहत सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल में 10,000 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने का लक्ष्य है। प्रत्येक बस के लिए 12 वर्ष तक भुगतान सुरक्षा कवर दिया जाता है। फरवरी 2026 में गुजरात के भावनगर में 50 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाई गई।

इलेक्ट्रिक कार विनिर्माण के लिए निवेश आधारित नीति

भारत में इलेक्ट्रिक पैसेंजर कारों के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना के तहत कंपनियों के लिए कम से कम 4,150 करोड़ रुपये का निवेश आवश्यक है। इसमें तीसरे वर्ष तक कम से कम 25 प्रतिशत और पांचवें वर्ष तक 50 प्रतिशत घरेलू मूल्यवर्धन हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

पीएलआई-ऑटो से ईवी विनिर्माण को बढ़ावा

2021 में शुरू पीएलआई-ऑटो योजना का उद्देश्य आधुनिक ऑटोमोटिव तकनीक में घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाना है। योजना में कम से कम 50 प्रतिशत घरेलू मूल्यवर्धन के साथ विनिर्माण को प्रोत्साहन दिया जाता है। जनवरी 2026 तक स्वीकृत आवेदकों को 2,377.56 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन दिए गए, जिनमें 2,319.88 करोड़ रुपये ई-दोपहिया, ई-तिपहिया, ई-चौपहिया और ई-बस विनिर्माताओं को दिए गए।

घरेलू बैटरी विनिर्माण पर 18,100 करोड़ रुपये का दांव

पीएलआई-एसीसी योजना के तहत 18,100 करोड़ रुपये के बजट से देश में 50 GWh एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। यह योजना 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2029 तक अपने प्रमुख कार्यान्वयन चरण में है। चूंकि ईवी की कुल लागत में बैटरी की हिस्सेदारी करीब 35-40 प्रतिशत होती है, इसलिए घरेलू बैटरी उत्पादन को ईवी की लागत और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ईवी पर केवल 5 प्रतिशत जीएसटी

भारत में इलेक्ट्रिक कारों, दोपहिया और तिपहिया वाहनों पर 5 प्रतिशत की रियायती जीएसटी दर लागू है। इससे पारंपरिक वाहनों की तुलना में ईवी पर कर भार कम रहता है और इनकी खरीद को प्रोत्साहन मिलता है।

2030 तक 30 प्रतिशत ईवी बिक्री का लक्ष्य

भारत ने 2030 तक कुल वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही 2030 तक देशभर में 13.2 लाख चार्जिंग स्टेशन स्थापित कर ईवी इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

ईवी बाजार के 191 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

भारत का ईवी बाजार 2025 में करीब 3.71 अरब अमेरिकी डॉलर का था। इसके 2034 तक 54.94 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़कर 191.04 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इसी तरह ईवी बैटरी बाजार 2025 के 2.71 अरब डॉलर से बढ़कर 2034 तक 15.90 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

सीएएफई मानकों से बढ़ेगा स्वच्छ वाहनों का दबाव

सरकार सीएएफई-III और सीएएफई-IV के अगले चरणों की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित उत्सर्जन सीमा सीएएफई-III के लिए 91.7 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर और सीएएफई-IV के लिए 70 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर है। सुपर-क्रेडिट मैकेनिज्म जैसे प्रावधानों के जरिए वाहन निर्माताओं को ईवी बिक्री बढ़ाकर उत्सर्जन अनुपालन में मदद मिल सकती है।

भारत वैश्विक ईवी विनिर्माण केंद्र बनने की ओर

बढ़ती मांग, घरेलू बैटरी विनिर्माण, स्थानीय सप्लाई चेन, चार्जिंग नेटवर्क, सरकारी प्रोत्साहन और अनुसंधान एवं विकास में निवेश भारत को वैश्विक ईवी विनिर्माण केंद्र की दिशा में आगे ले जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में बैटरी स्थानीयकरण, आपूर्ति श्रृंखला के एकीकरण और चार्जिंग अवसंरचना का विस्तार भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के प्रमुख आधार होंगे। इससे इलेक्ट्रिक दोपहिया, कॉम्पैक्ट ईवी, बैटरी पैक और ड्राइवट्रेन उपकरणों के निर्यात के लिए भी नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। (इनपुट: पीआईबी)