खेलों से ग्लोबल स्पोर्ट्स हब तक, पीएम मोदी ने बताया नए भारत का खेल विजन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियन गेम्स 2026 के भारतीय दल को संबोधित करते हुए कहा कि खिलाड़ियों की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों की सफलता है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने तिरंगे की शान और मान बढ़ाया है। प्रधानमंत्री ने भारतीय दल के 85 मेडल जीतने, महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों, नए खेलों में पहली बार पदक जीतने और विभिन्न स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अब खेलों में बड़ी ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने खिलाड़ियों, कोच, सपोर्ट स्टाफ और परिवारों को बधाई दी तथा कहा कि भारत बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स की मेजबानी करेगा, टॉप स्पोर्टिंग नेशंस में शामिल होगा और ग्लोबल स्पोर्ट्स हब बनेगा। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों से हर संकल्प पर ‘वी विल डू इट’ का उद्घोष भी कराया।

खिलाड़ियों से मिलना खुद ऊर्जा से भर देता है

प्रधानमंत्री ने केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया, खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे, युवा खिलाड़ियों, कोच और अन्य अतिथियों का अभिवादन करते हुए कहा कि खिलाड़ियों के बीच आना उन्हें भी ऊर्जा से भर देता है। उन्होंने कहा कि इतने सारे पदक विजेताओं से एक साथ मिलना कोई मामूली बात नहीं है। यह बहुत सुखद एहसास है। उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ी इस बात के उदाहरण हैं कि जब जुनून जीत में बदलता है तो वह मेडल के साथ चेहरे पर चमक भी लेकर आता है और देश भी गौरवान्वित होता है।

खिलाड़ियों की सफलता पूरे देश की सफलता

पीएम मोदी ने कहा कि खिलाड़ियों ने 140 करोड़ देशवासियों को गौरव करने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी सफलता तिरंगे की शान बढ़ाना है। खिलाड़ियों ने तिरंगे की शान और मान बढ़ाया है, इसलिए उनकी सफलता केवल उनकी नहीं, बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों की सफलता है। उन्होंने सभी देशवासियों की ओर से खिलाड़ियों को बधाई दी और उनके कोच, सपोर्ट स्टाफ तथा परिवारों का भी हृदय से अभिनंदन किया।

एपीजे अब्दुल कलाम को किया नमन

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की जन्म जयंती भी है। उनका जीवन और विजन सभी के लिए प्रेरणा है। उन्होंने एपीजे अब्दुल कलाम को भी सादर नमन किया।

हॉकी में पुरुष और महिला दोनों टीमों ने जीता गोल्ड

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि एशियन गेम्स इस बार कई मायनों में भारत के लिए यादगार रहे। उन्होंने कहा कि भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमें दोनों यहां मौजूद हैं और दोनों ने गोल्ड मेडल जीता है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से महिला हॉकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि टीम ने गोल्ड मेडल जीतकर 44 साल के लंबे इंतजार को खत्म किया है।

क्रिकेट में लगातार दूसरी बार पदक और रिकॉर्ड की बराबरी

प्रधानमंत्री ने कहा कि क्रिकेट में भारत की पुरुष और महिला दोनों टीमों ने लगातार दूसरी बार मेडल जीता है। इतना ही नहीं, दोनों टीमों ने अपना ही रिकॉर्ड दोहराया है।

कबड्डी में भी पुरुष और महिला टीमों का स्वर्णिम प्रदर्शन

पीएम मोदी ने कहा कि कबड्डी में भारत की पुरुष और महिला दोनों टीमों ने गोल्ड मेडल जीता है। उन्होंने इसे एशियन गेम्स में भारत की सफलता की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

तीरंदाजी में पांच गोल्ड, शूटिंग और मुक्केबाजी में शानदार प्रदर्शन

प्रधानमंत्री ने कहा कि तीरंदाजी में भारत ने पांच गोल्ड मेडल जीते। शूटिंग में शानदार प्रदर्शन हुआ। उन्होंने बॉक्सिंग और कुश्ती में मिली बड़ी सफलताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एथलेटिक्स में नए रिकॉर्ड बने, 28 साल बाद वेटलिफ्टिंग में भारत को मेडल मिला और 1982 के बाद पहली बार मैराथन में भारत को सफलता मिली। उन्होंने इन उपलब्धियों को बेहद सुखद बताया।

85 में से 38 मेडल महिला खिलाड़ियों के नाम

पीएम मोदी ने भारतीय बेटियों की खास तौर पर सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने जो 85 मेडल जीते हैं, उनमें से 38 मेडल महिला खिलाड़ियों ने जीते हैं। इनमें 11 गोल्ड मेडल भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये मेडल केवल एक संख्या नहीं हैं, बल्कि नए भारत की सशक्त तस्वीर हैं।

नए खेलों में पहली बार भारत ने जीते मेडल

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत ऐसे खेलों में भी मेडल जीत रहा है, जिनमें एशियन गेम्स के इतिहास में भारत को पहले कभी पदक नहीं मिला था। उन्होंने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स, सॉफ्ट टेनिस और सेलिंग की कुछ स्पर्धाओं का उल्लेख किया, जिनमें भारतीय खिलाड़ियों ने पहली बार मेडल जीतकर नया इतिहास रचा है।

खिलाड़ियों से कराया ‘वी विल डू इट’ का संकल्प

पीएम मोदी ने कहा कि अब भारत को खेलों में और बड़ी ऊंचाइयों तक जाना है। उन्होंने खिलाड़ियों से पूछा कि उन्हें और ज्यादा करना है या नहीं और इसके बाद कई संकल्पों के साथ उनसे ‘वी विल डू इट’ का उद्घोष कराया। उन्होंने कहा- हर मैदान पर तिरंगे की शान, वी विल डू इट। खेलों में भारत की नई पहचान, वी विल डू इट। हर खेल में नए चैंपियंस, वी विल डू इट। हमारे नाम और नए रिकॉर्ड्स, वी विल डू इट।

मेजर ध्यानचंद का परिश्रम खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस स्टेडियम में कार्यक्रम हो रहा है, वह मेजर ध्यानचंद के नाम पर है। हॉकी के प्रति उनका समर्पण इतना अधिक था कि वह रात में भी घंटों हॉकी की प्रैक्टिस करते थे। उन्होंने कहा कि मेजर ध्यानचंद का परिश्रम बार-बार याद दिलाता है कि संकल्प और सपने एक दिन में पूरे नहीं होते। इसके लिए वर्षों का धैर्य और लगातार परिश्रम अनिवार्य होता है।

12 वर्षों में खेल इकोसिस्टम पर लगातार काम

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने भी बीते 12 वर्षों में धैर्य और परिश्रम के साथ अपने खिलाड़ियों और स्पोर्ट्स इकोसिस्टम पर बहुत लगन से काम किया है। उन्होंने कहा कि एक समय बड़े टूर्नामेंट में भारत केवल गिने-चुने मेडल ला पाता था। कई खेलों के बारे में देश में पता ही नहीं होता था कि वे भी खेले जाते हैं। ओलंपिक जैसा बड़ा आयोजन होता था और आधे से ज्यादा खेलों में भारत का कोई प्रतिनिधित्व ही नहीं होता था। उन्होंने सवाल किया कि अगर भारत प्रतियोगिता में हिस्सा ही नहीं लेगा तो मेडल कहां से आएंगे।

निराशावादी मानसिकता हटाने का लिया संकल्प

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने संकल्प लिया कि इस निराशावादी मानसिकता को हटाया जाएगा। इसका परिणाम है कि आज हर ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर भारत का प्रतिनिधित्व बढ़ रहा है।

पारदर्शी और आधुनिक खेल इकोसिस्टम तैयार किया

पीएम मोदी ने कहा कि देश में यह बदलाव उसी भावना से आया है, जिसकी बदौलत खिलाड़ियों ने सफलता हासिल की है। बीते 10-12 वर्षों में देश ने लगन और निष्ठा के साथ निरंतर प्रयास किए हैं और दूरगामी विजन के साथ काम किया है। उन्होंने कहा कि खेलों के लिए एक पारदर्शी और आधुनिक इकोसिस्टम बनाया गया है। सरकार ने टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) और ‘खेलो इंडिया स्कीम’ शुरू की और समय के साथ इनका दायरा भी व्यापक बनाया।

खेलो इंडिया और खेल महासंघों के लिए 36,000 करोड़ रुपए से अधिक

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘खेलो इंडिया’ के विस्तार और स्पोर्ट्स फेडरेशंस को मजबूत करने के लिए 36,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि आवंटित की गई है। उन्होंने बताया कि आज देश में 1,000 से ज्यादा ‘खेलो इंडिया सेंटर’ बनाए जा चुके हैं।

देशभर में तैयार हो रहा स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर

पीएम मोदी ने कहा कि स्टेडियम और मिनी स्टेडियम, मल्टी-पर्पज हॉल और खेलों के लिए जरूरी अन्य सुविधाएं तैयार की गई हैं। एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल ग्राउंड, हॉकी ग्राउंड और स्विमिंग पूल समेत हजारों छोटे-बड़े स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर छोटे और बड़े शहरों में बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत खिलाड़ियों को सीधे मदद भी दी जा रही है। उन्हें आउट-ऑफ-पॉकेट अलाउंस दिया जा रहा है।

टॉप्स के तहत खिलाड़ियों को हर महीने 50 हजार रुपए

प्रधानमंत्री ने बताया कि टॉप्स स्कीम के तहत खिलाड़ियों को 50 हजार रुपए प्रति माह मिल रहे हैं। यदि किसी खेल में कोचिंग के लिए देश से बाहर जाने की जरूरत होती है तो सरकार उसे भी सुविधाजनक बनाने के लिए आर्थिक सहायता दे रही है।

युवाओं को प्रतियोगिता के ज्यादा अवसर

पीएम मोदी ने कहा कि युवाओं को खेलने और प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के ज्यादा से ज्यादा अवसर देने के लिए विंटर गेम्स जैसे आयोजन शुरू किए गए हैं। सांसद खेल प्रतियोगिताएं भी शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि देश ने नई स्पोर्ट्स पॉलिसी और खेलो भारत नई नीति बनाई है।

दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए भी बेहतर सुविधाएं

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के दिव्यांग खिलाड़ी भी अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य से भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं। उनके लिए खेलों में बेहतर अवसर और आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इसी वजह से आज हर खिलाड़ी को भरोसा होता है कि उसकी पूरी यात्रा में देश उसके साथ खड़ा है। जब खिलाड़ी को यह अहसास रहता है तो वह देश के लिए क्या करके दिखाता है, इसका उदाहरण एशियन गेम्स के खिलाड़ी स्वयं हैं।

15 से 17 साल के खिलाड़ियों ने बढ़ाया देश का गौरव

पीएम मोदी ने कहा कि इस बार एशियन गेम्स में टीम इंडिया के कई खिलाड़ी ऐसे थे, जिनकी उम्र केवल 15 से 17 साल थी। इतनी कम उम्र में इन खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन से देश का गौरव बढ़ाया और देशवासियों का दिल जीता। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि सफलता के लिए उम्र कोई बंदिश नहीं होती। बल्कि खेलों में कम उम्र से शुरुआत करना एक अतिरिक्त लाभ होता है।

5 से 15 वर्ष के बच्चों में प्रतिभा पहचानने पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि खेलों में प्रतिभा की पहचान कम उम्र से ही हो। पांच से 15 वर्ष के बच्चों में खेल प्रतिभाओं की पहचान और उनकी ट्रेनिंग पर विशेष फोकस किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में हजारों नए खिलाड़ियों को ‘खेलो इंडिया’ और ‘इमर्जिंग खेलो इंडिया’ के माध्यम से आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे।

2028 ओलंपिक से 2036 की मेजबानी तक की तैयारी

पीएम मोदी ने कहा कि आने वाली खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी को और मजबूत करना है। 2028 में लॉस एंजिलिस ओलंपिक होंगे। 2030 में भारत कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा और 2036 में ओलंपिक की मेजबानी करना भारत की आकांक्षा है। उन्होंने कहा कि इसी लक्ष्य को देखते हुए उन्होंने लाल किले से टैलेंट हंट अभियान चलाने की बात कही है। आज गांव-गांव तक जाकर प्रतिभाओं की तलाश की जा रही है और उन्हें तराशा भी जा रहा है। उन्होंने कहा कि यही खिलाड़ी आने वाले समय में भारत के लिए मेडल लेकर आएंगे।

बड़े सपने, बड़े संकल्प और उन्हें पूरा करने का आत्मविश्वास

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के सपने बड़े हैं, संकल्प भी बड़े हैं और इन्हें पूरा करने का आत्मविश्वास भी आज हिंदुस्तान और हर हिंदुस्तानी के पास है। उन्होंने खिलाड़ियों के साथ कहा- भारत में बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स, वी विल डू इट। टॉप स्पोर्टिंग नेशंस में भारत, वी विल डू इट। ग्लोबल स्पोर्ट्स हब बने भारत, वी विल डू इट। भारत में वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर, वी विल डू इट। भारत के हर कोने से एक चैंपियन, वी विल डू इट।

एशियन गेम्स की सफलता बदलते भारत के मिजाज का उदाहरण

पीएम मोदी ने कहा कि एशियन गेम्स में भारत की सफलता देश के बदलते मिजाज का भी उदाहरण है। यह इस बात का उदाहरण है कि आज देश का युवा हर बुलंदी को छूने के लिए अधीर है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई मुकाम नहीं है, जो भारत के युवाओं के हौसलों से बड़ा हो और ऐसा कोई लक्ष्य नहीं है, जो देश की युवाशक्ति के सामर्थ्य से बाहर हो। संभावनाओं का असीम आकाश सामने है और भारत का युवा खुद अपनी मंजिल तय कर रहा है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम

प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी आत्मविश्वास के चलते देखते ही देखते भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है। देश के युवा स्पेस सेक्टर में अपनी कंपनियां बना रहे हैं, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं और डिफेंस सेक्टर में नई तकनीक विकसित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भी नए प्रयोग कर रहे हैं।

छोटे शहरों और गांवों के युवा भी आगे बढ़ रहे

पीएम मोदी ने कहा कि यह बदलाव केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। जैसे खेलों में आज दूर-दराज की प्रतिभाओं को अवसर मिल रहा है, वैसे ही स्टार्टअप, रिसर्च और दूसरे उद्यमों में छोटे शहरों और गांवों के युवा नए आइडिया लेकर आगे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस आत्मविश्वास के पीछे एक बड़ा भरोसा है। बीते एक दशक में देश ने जो व्यवस्थाएं विकसित की हैं, उनसे युवाओं को भरोसा मिला है कि वे बड़े सपने देख सकते हैं। उन्हें विश्वास है कि अपने सपनों को आगे बढ़ाने के लिए देश का पूरा सामर्थ्य उनके साथ खड़ा है।

खेलों से जुड़े क्षेत्रों में भी बन रहे नए करियर

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रयासों का लाभ केवल मैदान में खेलने वाले खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है। स्पोर्ट्स कोचिंग, फिजियोथेरेपी, स्पोर्ट्स मैनेजमेंट और स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग जैसे क्षेत्रों में भी युवाओं के लिए नए करियर के अवसर बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेलों के विकास के साथ-साथ इनसे जुड़े अनेक प्रोफेशन भी आगे बढ़ रहे हैं। इससे युवाओं के लिए रोजगार और उद्यम के नए रास्ते बने हैं।

खिलाड़ियों से नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की अपील

पीएम मोदी ने खिलाड़ियों से कहा कि वे जिस भी क्षेत्र में हैं, उन्हें अपनी सफलता के लिए परिश्रम तो करना ही है, साथ ही नई पीढ़ी को गढ़ने की जिम्मेदारी भी उठानी है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के पास इंटरनेशनल टूर्नामेंट का अनुभव है। इसलिए उनका आग्रह है कि वे उन बच्चों को भी कुछ समय जरूर दें, जो उनकी तरह आगे बढ़ने का सपना देख रहे हैं।

अपने गांव और शहर के बच्चों से मिलने का आग्रह

प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से कहा कि वे जब भी अवसर मिले, अपने गांव और शहर के बच्चों से मिलें। अलग-अलग स्कूलों में जाएं और जिन मैदानों पर उन्होंने खेलना शुरू किया था, वहां जरूर जाएं। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के अनुभव बच्चों के बहुत काम आ सकते हैं। संभव है कि उनकी एक छोटी-सी बात किसी बच्चे को खेलों में आगे बढ़ने का हौसला दे दे।

खेल जीवन में अनुशासन और संघर्ष की सीख देते हैं

पीएम मोदी ने कहा कि देश के युवाओं को खिलाड़ियों से केवल खेल की प्रेरणा नहीं मिलती। खेलों की भूमिका केवल मैदान तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि खेल जीवन में अनुशासन सिखाते हैं, गिरकर फिर खड़े होने और हारकर जीतने की सीख देते हैं। एक लक्ष्य के लिए लंबे समय तक अटल रहना और परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालना भी खेल सिखाते हैं। यही खिलाड़ी वाली भावना जीवनभर काम आती है।

‘जो खेलेगा, वो खिलेगा’

प्रधानमंत्री ने कहा कि वह हमेशा कहते हैं, ‘जो खेलेगा, वो खिलेगा।’ उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि वे खेलते रहें और खिलते रहें। उन्होंने आने वाली प्रतियोगिताओं और भविष्य के सभी प्रयासों के लिए खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों का उत्साह और आत्मविश्वास ही नए भारत की सबसे बड़ी ताकत है। इसी आत्मविश्वास के साथ भारत को नई बुलंदियों तक पहुंचाना है।

विकसित भारत से आत्मनिर्भर भारत तक के संकल्प

प्रधानमंत्री ने अंत में खिलाड़ियों के साथ कई राष्ट्रीय संकल्पों का उद्घोष किया। उन्होंने कहा- विकसित भारत, वी विल डू इट। विकसित भारत एट ट्वेंटी फोर्टी सेवन, वी विल डू इट। टॉप थ्री इकोनॉमी, वी विल डू इट। आत्मनिर्भर भारत, वी विल डू इट। ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब, वी विल डू इट। टेक्नोलॉजी में भारत की लीडरशिप, वी विल डू इट। उन्होंने अंतरिक्ष में भारत के कदम, ओलंपिक की मेजबानी और नए खेलों में मेडल जीतने के संकल्प के साथ भी खिलाड़ियों से ‘वी विल डू इट’ का उद्घोष कराया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत यह करके दिखाएगा और अंत में खिलाड़ियों के साथ ‘यस, वी विल डू इट’ का उद्घोष किया। (इनपुट: पीआईबी)

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