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एफटीए से भारत की वैश्विक भागीदारी और होगी मजबूत : पीयूष गोयल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत की मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) रणनीति का उद्देश्य देश की दीर्घकालिक विकास महत्वाकांक्षाओं को गति देना, निवेश आकर्षित करना, नवाचार को बढ़ावा देना, गुणवत्ता मानकों में सुधार करना और रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।

यहां आयोजित इंडिया ग्लोबल इनोवेशन कनेक्ट की पांचवीं वार्षिक बैठक के समापन सत्र को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि ये समझौते भारत को वैश्विक व्यापार और मूल्य श्रृंखलाओं के साथ अधिक गहराई से जोड़ने में मदद कर रहे हैं तथा आर्थिक परिवर्तन को मजबूती दे रहे हैं।

उन्होंने कहा, “विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते करने की भारत की रणनीति का उद्देश्य वैश्विक जुड़ाव बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना, नवाचार को प्रोत्साहित करना, रोजगार सृजित करना, गुणवत्ता मानकों को उन्नत करना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत की भागीदारी बढ़ाना है।”

गोयल ने कहा कि यूरोप, उत्तरी अमेरिका, खाड़ी क्षेत्र, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों के पास उच्च प्रति व्यक्ति आय, उन्नत तकनीक और पर्याप्त पूंजी संसाधन हैं, जबकि भारत के पास युवा कार्यबल, प्रतिस्पर्धी लागत और तेजी से बढ़ता घरेलू बाजार है।

उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत ने 38 देशों को कवर करने वाले नौ मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

मंत्री के अनुसार, ये समझौते नए बाजारों तक पहुंच प्रदान कर रहे हैं, उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं और भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ते हुए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं।

यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ हुए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि इस समझौते ने भारत और स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन तथा आइसलैंड के बीच व्यापार, निवेश और नवाचार आधारित सहयोग के लिए मजबूत ढांचा तैयार किया है।

उन्होंने बताया कि इस समझौते के तहत ईएफटीए देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने की प्रतिबद्धता जताई है।

गोयल ने कहा कि भारत इस समझौते के क्रियान्वयन के दूसरे वर्ष में है और इसके तहत निवेश से जुड़े विषयों पर सक्रिय रूप से चर्चा जारी है।

उन्होंने कहा कि निवेश संबंधी प्रतिबद्धता इस समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भारत और उसके साझेदार देशों दोनों के लिए लाभकारी और संतुलित व्यवस्था सुनिश्चित करती है।

-(इनपुटःआईएएनएस)

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