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GAGAN से मजबूत हो रही भारत की एयरोस्पेस और स्वदेशी नेविगेशन क्षमता

भारत की लागत-प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्षमता, इंजीनियरिंग प्रतिभा और स्वदेशी तकनीक के दम पर एयरोस्पेस क्षेत्र में उसकी क्षमताएं तेजी से मजबूत हो रही हैं। जेफरीज की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, इससे वैश्विक विमानन और अंतरिक्ष इकोसिस्टम में भारत के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। इसी बदलाव के बीच भारत का स्वदेशी GAGAN (GPS Aided GEO Augmented Navigation) सिस्टम उन्नत विमानन तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में उभरा है।

एयरोस्पेस में बढ़ रहे वैश्विक अवसर

रिपोर्ट में एयरोस्पेस को उन उभरते औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल किया गया है, जहां वैश्विक मांग और आपूर्ति के बीच मौजूद अंतर से भारत को लाभ मिल सकता है। बोइंग और एयरबस भारत से हर साल करीब 1.4-1.6 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद खरीदते हैं। वहीं Aequs, Azad Engineering, DYTC, BHFC, Motherson और Sansera जैसी भारतीय कंपनियां वैश्विक मूल उपकरण विनिर्माताओं (OEM) और टियर-1 आपूर्तिकर्ताओं के रूप में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।

ISRO और AAI ने मिलकर विकसित किया GAGAN

GAGAN को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। यह सैटेलाइट-बेस्ड ऑगमेंटेशन सिस्टम (SBAS) है, जो GPS की सटीकता बढ़ाने के साथ विमानन सुरक्षा के लिए जरूरी इंटीग्रिटी जानकारी उपलब्ध कराता है।

2015 से पूरी तरह परिचालन में है GAGAN

GAGAN वर्ष 2015 से पूरी तरह परिचालन में है। इसके साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिनके पास परिचालन SBAS मौजूद है। जून 2026 में नागरिक विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने GAGAN का इस्तेमाल करते हुए कमर्शियल जेट विमान पर भारत की पहली सैटेलाइट आधारित लैंडिंग सिस्टम अप्रोच का सफल परीक्षण किया।

स्वदेशी नेविगेशन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार

GAGAN नेटवर्क में 15 भारतीय रेफरेंस स्टेशन, दो भारतीय मास्टर कंट्रोल सेंटर और तीन भारतीय लैंड अपलिंक स्टेशन शामिल हैं। इस नेटवर्क को संचार प्रणाली और GAGAN पेलोड से लैस तीन जियोस्टेशनरी उपग्रहों का समर्थन प्राप्त है।

तीन उपग्रह भेजते हैं सुधारित नेविगेशन सिग्नल

GSAT-8, GSAT-10 और GSAT-15 उपग्रह उपयोगकर्ताओं को सुधारित नेविगेशन सिग्नल और इंटीग्रिटी संबंधी जानकारी प्रसारित करते हैं। GAGAN भूमध्यरेखीय क्षेत्र के लिए प्रमाणित होने वाला पहला SBAS भी है। यह अमेरिका के WAAS, यूरोप के EGNOS और जापान के MSAS जैसे अंतरराष्ट्रीय सिस्टम के साथ इंटरऑपरेबल है।

विमानन के अलावा कई क्षेत्रों में उपयोग

GAGAN का इस्तेमाल विमानन के अलावा समुद्री नेविगेशन, सड़क परिवहन, रेलवे, आपदा प्रबंधन, रक्षा, दूरसंचार, सर्वेक्षण और मैपिंग जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकता है। इससे देश में सटीक स्थान आधारित सेवाओं के विस्तार की संभावनाएं बढ़ती हैं।

NavIC का पूरक है GAGAN

GAGAN भारत के स्वदेशी क्षेत्रीय नेविगेशन सिस्टम NavIC का पूरक है। NavIC भारत और देश की सीमा से करीब 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाएं उपलब्ध कराता है। वहीं GAGAN विमानन क्षेत्र में सटीक नेविगेशन के लिए GPS सिग्नल को बेहतर बनाता है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ रही भारत की नेविगेशन पहुंच

भारत के व्यापक नेविगेशन इकोसिस्टम की अंतरराष्ट्रीय पहुंच भी बढ़ रही है। वर्ष 2025 में भारत ने दक्षिण अफ्रीका के साथ NavIC रेफरेंस स्टेशन स्थापित करने के लिए समझौता किया था। इससे सैटेलाइट आधारित नेविगेशन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूती मिली है।

उच्च तकनीक और स्वदेशी वैल्यू एडिशन की ओर बढ़ता भारत

GAGAN का विकास और भारत के एयरोस्पेस विनिर्माण आधार का विस्तार उस व्यापक औद्योगिक बदलाव को दर्शाता है, जिसकी ओर जेफरीज की रिपोर्ट इशारा करती है। भारत अब केवल घरेलू क्षमताओं के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च मूल्य वाली तकनीक, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और स्वदेशी वैल्यू एडिशन की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।