केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के समवेत सभागार में लेखक युगल जोशी के उपन्यास ‘कहो कालिदास!’ का लोकार्पण किया। महाकवि कालिदास और उनकी रचनाओं को समर्पित यह उपन्यास उनके जीवन और व्यक्तित्व से जुड़े अनुत्तरित पहलुओं को रचनात्मक कल्पना के माध्यम से सामने लाने का प्रयास है। समारोह में IGNCA के अध्यक्ष राम बहादुर राय, नीति आयोग की सदस्य डॉ. जोरम अनिया, लेखक युगल जोशी समेत लेखक, विद्वान, कलाकार, पत्रकार, प्रकाशक, साहित्य प्रेमी और छात्र उपस्थित रहे।
कालिदास की सात कृतियों पर आधारित उपन्यास
मंजुल पब्लिशिंग हाउस द्वारा प्रकाशित ‘कहो कालिदास!’ महाकवि कालिदास की सात कालजयी रचनाओं और उनके अपेक्षाकृत अज्ञात जीवन की कल्पना-प्रधान कथा है। कालिदास की साहित्यिक प्रतिभा पर व्यापक रूप से चर्चा हुई है, लेकिन उनके जीवन और काल के संबंध में कोई सर्वसम्मत विवरण उपलब्ध नहीं है। उपन्यास इसी ऐतिहासिक मौन के बीच लेखक की रचनात्मक दृष्टि से कालिदास के व्यक्तित्व और प्रेरणाओं को समझने का प्रयास करता है।
पांच प्रेम कथाओं में बुनी गई रचना
युगल जोशी के अनुसार, उपन्यास में कालिदास की रचनाओं से झलकने वाले उनके हृदय और मन की अनुभूतियों, अनुभवों, अनुराग-विराग और जीवन-दृष्टि को कथा का आधार बनाया गया है। पांच प्रेम कथाओं में गुंथी यह रचना तत्कालीन भारतीय समाज और राजनीति की पृष्ठभूमि में विकसित होती है। इसमें कालिदास की सात प्रमुख रचनाओं के माध्यम से प्रेम, आकर्षण, रति, विरह, प्रतीक्षा और स्मृति जैसे मानवीय भावों को अभिव्यक्ति दी गई है।
‘कालिदास के जीवन के मौन को वाणी देने का प्रयास’
लोकार्पण समारोह में गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह आयोजन केवल पुस्तक विमोचन नहीं, बल्कि महाकवि कालिदास के जीवन और व्यक्तित्व के इर्द-गिर्द व्याप्त मौन को वाणी देने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि कालिदास विश्व के महानतम कवियों में से एक हैं, लेकिन उनके जीवन और व्यक्तित्व से जुड़े अनेक पहलू अब भी अज्ञात हैं। ‘कहो कालिदास!’ लेखक की रचनात्मक व्याख्या के जरिए कालिदास और उनकी दुनिया को आवाज देने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि शीर्षक में घनिष्ठता, जिज्ञासा और संवाद का भाव है, जो कालिदास की अमर रचनाओं के माध्यम से उनके व्यक्तित्व को समझने की कोशिश को दर्शाता है।
युवा पीढ़ी को शास्त्रीय साहित्य से जोड़ने पर जोर
IGNCA के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने उपन्यास के कलात्मक और साहित्यिक मूल्य पर चर्चा करते हुए भारतीय शास्त्रीय साहित्य को रचनात्मक माध्यमों से युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कालिदास का साहित्य आज भी प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें मानवीय इच्छाओं, संबंधों, समाज और सत्ता जैसे शाश्वत प्रश्नों की अभिव्यक्ति मिलती है। उन्होंने पाठकों, विशेषकर युवाओं, से ‘कहो कालिदास!’ को बारीकी से पढ़ने और इसके माध्यम से कालिदास के साहित्यिक संसार की गहराई को समझने का आग्रह किया।
समकालीन हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण रचना बताया
नीति आयोग की सदस्य डॉ. जोरम अनिया ने उपन्यास को समकालीन हिंदी साहित्य की महत्वपूर्ण रचना बताया। उन्होंने लेखक के उस प्रयास की सराहना की, जिसके जरिए कालिदास के साहित्यिक संसार को आधुनिक पाठकों के लिए जीवंत बनाया गया है। उन्होंने कहा कि ‘कहो कालिदास!’ का शीर्षक कवि के साथ एक घनिष्ठ संवाद स्थापित करने की कोशिश को दर्शाता है। उपन्यास कालिदास को केवल इतिहास की दूरस्थ आकृति के रूप में नहीं देखता, बल्कि उनकी कालजयी रचनाओं के पीछे छिपे मानवीय अनुभवों को समझने का प्रयास करता है।
IGNCA के कलानिधि विभाग ने किया विमोचन
‘कहो कालिदास!’ का विमोचन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के कलानिधि विभाग द्वारा किया गया। यह कृति कालिदास के साहित्य, उनके समय और उनकी रचनाओं में मौजूद मानवीय संवेदनाओं को कथा के माध्यम से समकालीन पाठकों के सामने रखने का प्रयास करती है।


