भारत में बढ़ेगा जीसीसी सेक्टर का दबदबा, 2030 तक आकार 105 अरब डॉलर होने का अनुमान

भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) सेक्टर का आकार वर्ष 2030 तक 105 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। गुरुवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, यह वृद्धि सरकार की नीतियों, मजबूत प्रतिभा-कोष और उच्च स्तरीय अनुसंधान एवं विकास (R&D) गतिविधियों के विस्तार की वजह से हो रही है।

देश में वर्तमान में 1,700 से अधिक जीसीसी सक्रिय

देश में वर्तमान में 1,700 से अधिक जीसीसी सक्रिय हैं, जिन्होंने वित्त वर्ष 2024 में 64.6 अरब डॉलर का राजस्व अर्जित किया। ये केंद्र 19 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। वित्त वर्ष 2019 में इनका राजस्व 40.4 अरब डॉलर था, जो अब तक लगभग 9.8% की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। अनुमान है कि केंद्रों की संख्या 2030 तक बढ़कर 2,400 हो सकती है और इनमें 28 लाख से अधिक लोग काम कर सकते हैं। इससे भारत की वैश्विक कंपनियों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थिति और मजबूत होगी।

जीसीसी केंद्र मुख्य रूप से बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई, मुंबई और एनसीआर में स्थित हैं

जीसीसी वे केंद्र होते हैं जिन्हें कंपनियां विदेशों में अपने मुख्य संगठन के लिए विभिन्न सेवाएं प्रदान करने हेतु स्थापित करती हैं। ये केंद्र मुख्य रूप से बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई, मुंबई और एनसीआर में स्थित हैं। अब ये सिर्फ सपोर्ट सेवाओं तक सीमित नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग R&D, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और सेमीकंडक्टर जैसे उन्नत क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। इंजीनियरिंग R&D से जुड़े जीसीसी की वृद्धि अन्य केंद्रों की तुलना में करीब 1.3 गुना अधिक तेजी से हो रही है।

भारत का वैश्विक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग टैलेंट में 23% योगदान

रिपोर्ट के अनुसार, भारत वैश्विक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) वर्कफोर्स का लगभग 28% और वैश्विक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग टैलेंट का 23% योगदान देता है। वैश्विक भूमिकाओं की संख्या 6,500 से बढ़कर 2030 तक 30,000 से अधिक होने की संभावना है।

देश के युवा नई डिजिटल तकनीकों से लैस

भारत का जीसीसी हब बनने का सफर बुनियादी ढांचे के विकास, नवाचार, प्रतिभा निर्माण और सहायक नीतियों के समन्वय से संभव हुआ है। स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया और फ्यूचर स्किल्स प्राइम जैसे कार्यक्रम देश के युवाओं को नई डिजिटल तकनीकों से लैस कर रहे हैं।

जीसीसी की एयरोस्पेस, रक्षा और उन्नत विनिर्माण जैसे बड़े क्षेत्रों में भी अहम भूमिका

आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में बताया गया है कि जीसीसी अब केवल बैक-ऑफिस केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि एयरोस्पेस, रक्षा और उन्नत विनिर्माण जैसे बड़े क्षेत्रों में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, “जीसीसी अब कंपनी के सपोर्ट सेंटर से आगे बढ़कर स्ट्रैटेजिक सेंटर में बदल रहे हैं। यह परिवर्तन बहुत तेजी से हो रहा है।” (इनपुट: आईएएनएस)

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