गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम) ने सार्वजनिक खरीद के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए कुल 18.4 लाख करोड़ रुपये का सकल व्यापार मूल्य (जीएमवी) पार कर लिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में ही 5 लाख करोड़ रुपये का जीएमवी दर्ज किया गया, जो इसकी तेज़ी से बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
डिजिटल सार्वजनिक खरीद का मजबूत मंच
जेम एक पारदर्शी, कुशल और समावेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में उभरा है, जो सरकारी खरीद प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए विभिन्न उद्यमों को सरकारी मांग से जोड़ता है। यह सार्वजनिक व्यय में पारदर्शिता और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा दे रहा है।
एमएसई और स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी
प्लेटफॉर्म पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसई) की भागीदारी उल्लेखनीय रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल ऑर्डरों का 68% एमएसई द्वारा पूरा किया गया, जो कुल जीएमवी का 47.1% है।
महिला और एससी-एसटी उद्यमों को बढ़ावा
जेम पर 2.1 लाख से अधिक महिला-नेतृत्व वाले एमएसई पंजीकृत हैं, जिन्हें 28,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर मिले हैं। वहीं, अनुसूचित जाति और जनजाति के उद्यमों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं।
स्टार्टअप्स ने भी दिखाई दमदार मौजूदगी
स्टार्टअप उद्यमों ने भी इस प्लेटफॉर्म पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन्हें 19,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर मिले, जो 36% से अधिक की वृद्धि दर्शाते हैं।
तकनीक से पारदर्शिता और दक्षता में बढ़ोतरी
जेम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल) और उन्नत विश्लेषण का उपयोग किया जा रहा है। इससे खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है और अनियमितताओं की पहचान आसान हुई है।
राज्यों की भागीदारी में भी बढ़ोतरी
केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों के साथ-साथ अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में राज्यों द्वारा की गई खरीद में 38.3% की वृद्धि दर्ज की गई है।
विश्वास और पारदर्शिता का बढ़ता प्रतीक
जेम के सीईओ मिहिर कुमार ने कहा कि 18.4 लाख करोड़ रुपये का जीएमवी पार करना इस प्लेटफॉर्म में खरीदारों और विक्रेताओं के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। (इनपुट: पीआईबी)


