आयुष क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने पर सरकार-उद्योग का मंथन, निर्यात और नवाचार पर रहा जोर

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने आयुष मंत्रालय और आयुष निर्यात संवर्धन परिषद के सहयोग से नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में आयुष क्षेत्र पर सरकारी-उद्योग विचार-विमर्श सत्र का आयोजन किया। सत्र में 150 से अधिक सरकारी अधिकारियों, निर्यातकों, निर्माताओं, एमएसएमई, स्टार्टअप, शोधकर्ताओं, उद्योग संगठनों, राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया। बैठक का विषय था- “पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाओं में भारत के वैश्विक नेतृत्व को सुदृढ़ बनाना : आयुष क्षेत्र में नवाचार, गुणवत्ता, निर्यात और अंतरराष्ट्रीय सहयोग।”

वैश्विक नेतृत्व मजबूत करने की रणनीतियों पर चर्चा

सत्र में भारत के मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों, आयुष की वैश्विक ब्रांडिंग, निर्यात सुगमता, गुणवत्ता मानकों, डब्ल्यूएचओ-जीएमपी अनुपालन, आयुष गुणवत्ता चिह्न, वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, नवाचार, चिकित्सा मूल्य यात्रा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा नियामकीय और बाजार पहुंच संबंधी चुनौतियों पर व्यापक चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने भारतीय आयुष उत्पादों और सेवाओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव साझा किए।

वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र बनने की क्षमता रखता है भारत : अनुराग शर्मा

आयुष निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष और सांसद डॉ. अनुराग शर्मा ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को दुनिया भर में तेजी से स्वीकार किया जा रहा है और भारत समग्र स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में विश्वसनीय वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, गुणवत्ता आश्वासन, नवाचार और वैश्विक ब्रांडिंग को मजबूत करने के लिए सरकार, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई। उन्होंने निर्यातकों को बाजार विकास, क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय संपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से सहयोग देने में परिषद की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

वैश्विक आयुष ब्रांड बनाने पर जोर

वाणिज्य विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि आयुष क्षेत्र उभरता हुआ उच्च क्षमता वाला निर्यात क्षेत्र है और सरकार केवल निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय आयुष ब्रांड तैयार करना चाहती है। उन्होंने उद्योग जगत से नवाचार, ब्रांडिंग, मूल्यवर्धन और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि व्यापार सुविधाकर्ताओं और अन्य साझेदारों की भूमिका भारतीय आयुष उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वाणिज्य विभाग, आयुष निर्यात संवर्धन परिषद के साथ मिलकर जागरूकता, क्षमता निर्माण और हितधारकों तक पहुंच कार्यक्रम जारी रखेगा।

गुणवत्ता, ब्रांडिंग और वैश्विक मानकों पर फोकस

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि भारतीय आयुष उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के लिए आयुष चिह्न और आयुर्वेद आहार जैसी पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है। उन्होंने उद्योग जगत से आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में बढ़ती वैश्विक रुचि का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपस्थिति को और बेहतर बनाना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय मानकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

नीतिगत सुधारों के लिए सुझावों पर होगा काम

सत्र के समापन पर आयोजित खुली चर्चा में निर्यातकों, निर्माताओं, एमएसएमई, स्टार्टअप और अन्य हितधारकों ने बाजार पहुंच, नियामकीय सुगमता, कारोबार में आसानी, नवाचार, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर अपने सुझाव दिए। इन सुझावों का उपयोग भविष्य की नीतिगत पहलों, निर्यात प्रोत्साहन कार्यक्रमों और वाणिज्य विभाग, आयुष मंत्रालय तथा आयुष निर्यात संवर्धन परिषद के संयुक्त प्रयासों में किया जाएगा, ताकि ‘ब्रांड इंडिया आयुष’ को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाया जा सके। (इनपुट: पीआईबी)