Print

आयुष हेल्थ इंश्योरेंस को विस्तार देने के लिए सरकार ने बनाई नई व्यवस्था

केंद्र सरकार ने आयुष उपचारों को स्वास्थ्य बीमा के दायरे में व्यापक रूप से शामिल करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार ने बताया कि भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) के दिशा-निर्देशों के तहत बीमा कंपनियों को आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी सहित सभी आयुष चिकित्सा पद्धतियों को अन्य चिकित्सा प्रणालियों के समान बीमा कवरेज प्रदान करना होगा।

सरकार के अनुसार, 29 मई 2024 को जारी IRDAI मास्टर सर्कुलर के तहत बीमा कंपनियों को ऐसे उत्पाद, ऐड-ऑन और राइडर उपलब्ध कराने होंगे, जिनमें आयुष उपचार भी शामिल हों। साथ ही कंपनियों को बोर्ड से अनुमोदित अंडरराइटिंग नीति अपनानी होगी, ताकि पॉलिसीधारकों को अपनी पसंद की चिकित्सा पद्धति चुनने का विकल्प मिल सके।

स्वास्थ्य बीमा में आयुष उपचारों की पारदर्शिता और मानकीकरण को बढ़ावा देने के लिए आयुष मंत्रालय ने वर्ष 2026 में आयुष उपचारों के लिए बीमा कवरेज की बेंचमार्क दरों को संशोधित किया है। इसमें मानकीकृत उपचार पैकेज, अतिरिक्त प्रक्रियाएं और संचालन संबंधी दिशा-निर्देश शामिल किए गए हैं।

मंत्रालय ने देशभर में आयुष उपचारों के लिए बीमा कवरेज बढ़ाने के उद्देश्य से पांच जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं। इन कार्यक्रमों में बीमा कंपनियों और आयुष संस्थानों को ROHINI (Registry of Hospitals in Network of Insurance) में पंजीकरण, बीमा कंपनियों के साथ सूचीबद्ध होने, डिजिटल दस्तावेजीकरण और क्लेम प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

आयुष मंत्रालय ने अप्रैल 2026 में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) भी कराया। इसका उद्देश्य केंद्र और राज्यों के सरकारी आयुष अस्पतालों को एक साझा व्यवस्था के तहत बीमा कंपनियों के नेटवर्क से जोड़ना है, ताकि बीमाधारकों को आयुष उपचार आसानी से उपलब्ध हो सके।

इसके अलावा, आयुष स्वास्थ्य बीमा को बढ़ावा देने के लिए AIIA, नई दिल्ली में एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) भी स्थापित की गई है। यह इकाई आयुष अस्पतालों के सूचीबद्धीकरण, बीमा कंपनियों के साथ समन्वय, शिकायत निवारण और आयुष स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग करेगी।

-PIB