केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार स्वदेशी नवाचारों को अनुसंधान एवं विकास के चरण से आगे ले जाकर बाजार तक पहुंचाने के लिए स्टार्टअप और उद्योग जगत के बीच जुड़ाव को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने उद्योग जगत, निवेशकों, वैज्ञानिक संस्थानों और अन्य हितधारकों से स्टार्टअप के साथ साझेदारी करने तथा भारतीय तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाने में सहयोग देने का आग्रह किया।
ईएसटीआईसी-2026 में प्रदर्शनी का किया दौरा
जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में 27 से 29 अक्टूबर तक आयोजित इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी)-2026 में स्टार्टअप, वैज्ञानिक संस्थानों और विभागीय तकनीकों की प्रदर्शनी का दौरा किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन स्टार्टअप, वैज्ञानिक संस्थानों और उद्योग जगत को सहयोग की संभावनाएं तलाशने तथा स्वदेशी तकनीकों के व्यावसायिक उपयोग के रास्ते खोजने का मंच प्रदान करता है।
50 डीप-टेक स्टार्टअप और 13 विभागीय स्टॉल शामिल
प्रदर्शनी में भारत की वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमताओं को प्रदर्शित करने वाले 50 चुने हुए डीप-टेक स्टार्टअप, 13 विभागीय स्टॉल और 10 विभागीय तकनीकों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में विकसित स्वदेशी समाधानों को सामने लाना और उन्हें उद्योग जगत तथा संभावित भागीदारों से जोड़ना है।
अधिक प्रोटीन वाले चावल ने खींचा ध्यान
प्रदर्शनी में सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरडिसिप्लिनरी साइंस एंड टेक्नोलॉजी (सीएसआईआर-एनआईआईएसटी) द्वारा विकसित ‘सीएसआईआर डिजाइनर राइस’ भी प्रदर्शित किया गया। इस चावल में लगभग 20% प्रोटीन है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 54 बताया गया है, जिसके आधार पर इसे कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली श्रेणी में रखा गया है। चावल के विभिन्न हिस्सों और उसकी संरचना में बदलाव करके विकसित इस नवाचार का उद्देश्य बेहतर पोषण संबंधी गुणों वाले खाद्य उत्पाद तैयार करना है।
स्वदेशी माइक्रोकंट्रोलर से इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को बढ़ावा
प्रदर्शनी में सिग्नलचिप द्वारा विकसित एससीएमसी4212 माइक्रोकंट्रोलर यूनिट ‘जीत’ भी शामिल रही। इसमें ‘यति’ 32-बिट आरआईएससी-V सीपीयू और ‘आवर्त’ 32-बिट डिजिटल सिग्नल प्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया है। यह माइक्रोकंट्रोलर मेमोरी, पावर मैनेजमेंट और अन्य कार्यात्मक क्षमताओं को एकीकृत डिजाइन में समाहित करता है। इस तकनीक के संभावित उपयोगों में फ्लाइट कंट्रोलर, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) डिवाइस, स्मार्ट डिवाइस, रोबोटिक्स और औद्योगिक स्वचालन शामिल हैं। यह स्वदेशी सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन के क्षेत्र में भारत की घरेलू तकनीकी क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में एक प्रयास है।
बायो-आधारित पैकेजिंग में भी नवाचार
प्रदर्शनी में बायो-आधारित पैकेजिंग और दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले उत्पादों सहित सामग्री एवं स्थिरता से जुड़े नवाचार भी प्रदर्शित किए गए। ये तकनीकें दर्शाती हैं कि भारतीय वैज्ञानिक संस्थान, उद्यमी और प्रौद्योगिकी विकासकर्ता विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक समाधान तैयार करने पर काम कर रहे हैं। इनसे तकनीकी साझेदारी और व्यावसायिक उपयोग के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
अनुसंधान से व्यावसायिक उपयोग तक पहुंचाने पर जोर
जितेंद्र सिंह ने अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप, उद्योग जगत और सरकार के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक खोजों को ठोस आर्थिक एवं सामाजिक लाभों में बदलने के लिए नवाचारों का व्यावहारिक अनुप्रयोग और व्यापक स्तर पर अंगीकरण जरूरी है। ईएसटीआईसी-2026 के माध्यम से स्टार्टअप को संभावित साझेदारों से सीधे जुड़ने, अपनी तकनीकों के उपयोग के नए क्षेत्र तलाशने और कारोबार का विस्तार करने के अवसर मिल रहे हैं।
विकसित भारत@2047 के लक्ष्य से जुड़ा नवाचार
केंद्रीय मंत्री ने उद्योग जगत के प्रमुखों, निवेशकों और अनुसंधान संस्थानों से स्वदेशी तकनीक विकसित करने वालों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने तथा पारस्परिक लाभ वाली साझेदारियां बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नवाचार इकोसिस्टम में सहयोग मजबूत होने से तकनीकों को अपनाने की गति तेज होगी, घरेलू तकनीकी क्षमताएं सुदृढ़ होंगी और विकसित भारत@2047 के राष्ट्रीय विजन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। (इनपुट: पीआईबी)


