पाकिस्तान के बलूचिस्तान में ग्वादर पोर्ट को कभी देश के आर्थिक भविष्य और ‘दुबई मॉडल’ की दिशा में बड़े कदम के तौर पर पेश किया गया था, लेकिन सुरक्षा संकट, स्थानीय असंतोष और सीमित निवेश ने इस परियोजना की महत्वाकांक्षाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों और बलूच कार्यकर्ताओं का आरोप है कि विकास परियोजनाओं के साथ सुरक्षा अभियान भी बढ़े हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर स्थानीय आबादी पर पड़ा है।
सुरक्षा घेरे में चीनी परियोजनाएं
स्थानीय असंतोष के बीच चीनी परिसरों के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई है। चीनी प्रतिष्ठानों के आसपास बाड़ लगाने और निगरानी कैमरे लगाए जाने की खबरें सामने आई हैं। अधिकार समूहों का आरोप है कि सुरक्षा अभियानों के दौरान बलूच परिवारों को भी निगरानी और कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
मानवाधिकार उल्लंघनों के गंभीर आरोप
ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान के अनुसार, फरवरी 2026 में अकेले बलूचिस्तान में 200 से अधिक जबरन गुमशुदगी और 87 हत्याएं दर्ज की गईं। संगठन ने इनमें से अधिकांश घटनाओं के लिए कथित तौर पर फ्रंटियर कॉर्प्स को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, ऐसे आंकड़ों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग मामलों में चुनौतीपूर्ण है।
महिलाओं पर भी कार्रवाई के आरोप
बलूच कार्यकर्ताओं का कहना है कि सुरक्षा अभियानों का असर अब महिलाओं पर भी बढ़ रहा है। उनके अनुसार, केच में 22 वर्षीय एक महिला को उसके घर से कथित तौर पर उठा लिया गया, जबकि क्वेटा में एक नर्सिंग छात्रा को उसके हॉस्टल से ले जाने का आरोप लगाया गया है। इस्लामाबाद में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाली सैकड़ों महिलाओं को भी गिरफ्तार किए जाने की बात कही गई है, जिनमें कार्यकर्ता महरंग बलोच शामिल हैं।
गुमशुदगी को लेकर बढ़ी चिंता
अधिकार समूहों ने दावा किया है कि 2026 में गुमशुदा लोगों में एक गर्भवती महिला और 15 वर्षीय लड़की भी शामिल हैं। इन दावों ने बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और सुरक्षा अभियानों को लेकर पहले से मौजूद चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
चीन की सुरक्षा चिंताएं भी बढ़ीं
ग्वादर और कराची के आसपास हुए हमलों में चीनी इंजीनियरों और कर्मचारियों की मौत ने चीन की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया है। बीजिंग ने भी कई मौकों पर इस बात पर जोर दिया है कि सुरक्षित माहौल के बिना आर्थिक गतिविधियों और निवेश को बढ़ावा देना मुश्किल होगा। ग्वादर में वास्तविक निवेश भी शुरुआती महत्वाकांक्षाओं की तुलना में काफी सीमित रहा है।
ग्वादर एयरपोर्ट के उद्घाटन पर उठा सवाल
ग्वादर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के उद्घाटन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग व्यक्तिगत रूप से पाकिस्तान नहीं पहुंचे। उद्घाटन इस्लामाबाद से वीडियो लिंक के जरिए किया गया। इससे परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था और उसके आसपास के हालात को लेकर सवाल उठे।
‘क्राउन ज्वेल’ पर स्थानीय सवाल
बलूचिस्तान में परियोजना को लेकर एक बड़ा सवाल यह भी है कि जिस बंदरगाह को पाकिस्तान की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं का ‘क्राउन ज्वेल’ बताया गया, वहां सुरक्षा इतनी बड़ी चुनौती क्यों बनी हुई है कि शीर्ष स्तर के नेताओं की प्रत्यक्ष मौजूदगी भी सीमित दिखाई देती है।
विकास परियोजना और स्थानीय असंतोष
बलूच कार्यकर्ताओं का आरोप है कि ग्वादर का विकास स्थानीय लोगों की जरूरतों के बजाय पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान और चीन के रणनीतिक हितों को ध्यान में रखकर किया गया। उनका कहना है कि जमीन और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े फैसलों में स्थानीय समुदायों की पर्याप्त भागीदारी नहीं रही।
‘दुबई मॉडल’ के दावे पर सवाल
ग्वादर को पाकिस्तान के लिए दुबई जैसे व्यापारिक और आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षा जताई गई थी। लेकिन सुरक्षा चुनौतियों, स्थानीय विरोध, सीमित निवेश और बुनियादी ढांचे से जुड़ी बाधाओं ने इस मॉडल की व्यवहारिकता पर सवाल खड़े किए हैं। इस पूरी प्रक्रिया की कीमत मछुआरों, परिवारों और लापता लोगों के परिजनों को चुकानी पड़ रही है—ऐसा बलूच अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है।


