पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए सक्रिय हो गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी 9 से 10 अप्रैल तक कतर की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे।
Ministry of Petroleum and Natural Gas के अनुसार, इस दौरे का उद्देश्य एलएनजी (LNG) यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को लेकर चर्चा करना है, क्योंकि ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है।
कतर की सरकारी कंपनी QatarEnergy ने हाल ही में लंबी अवधि के एलएनजी सप्लाई समझौतों पर “फोर्स मेज्योर” घोषित किया था, जिससे कई देशों को गैस सप्लाई प्रभावित हुई है। हालांकि भारत का नाम सीधे तौर पर इसमें शामिल नहीं था, लेकिन भारत कतर से एलएनजी खरीदने वाले बड़े देशों में से एक है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के हमलों से कतर के एलएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान हुआ है, जिससे उसकी करीब 17% निर्यात क्षमता प्रभावित हुई है। कई प्लांट बंद होने से उत्पादन में बड़ी कमी आई है और इसे ठीक करने में 3 से 5 साल लग सकते हैं।
इस स्थिति से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है, खासकर यूरोप और एशिया के देशों में।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से बात कर ऊर्जा ढांचे पर हुए हमलों की निंदा की थी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षित आवाजाही की जरूरत पर जोर दिया था।
इस बीच, भारत ने वैकल्पिक व्यवस्था भी शुरू कर दी है। भारतीय कंपनियां अब अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस से एलएनजी खरीद रही हैं, ताकि जरूरत पूरी की जा सके।
भारत ने 2025 में करीब 25.5 मिलियन टन एलएनजी आयात किया था और सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक देश की कुल ऊर्जा में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 15% तक बढ़ाई जाए।
-(इनपुटःएजेंसी)


