गृह मंत्री अमित शाह ने सहकारिता मंत्रालय के 5वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नई दिल्ली में सहकारिता मंत्रालय के 5वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया। इस दौरान, अमित शाह ने जैविक उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा 140 करोड़ की आबादी और विश्व भर के लोगों के स्वास्थ्य की चिंता भी हमारी ही है। भारत के किसानों को जैविक उत्पादन बढ़ाना चाहिए।

अमित शाह ने कहा, “केमिकल उर्वरकों के उपयोग को बंद करने से उत्पादन कम हो जाएगा, यह एक गलतफहमी है। पिछले पांच वर्षों में यह सिद्ध हो चुका है कि केमिकल उर्वरकों का उपयोग कम करने पर उत्पादन कम नहीं होता, बल्कि बढ़ता है और भूमि का संरक्षण भी होता है।” उन्होंने कहा कि हम शुगर और डेयरी क्षेत्र में 100 प्रतिशत सर्कुलर इकोनॉमी ला रहे हैं। इसके माध्यम से डीएपी का विकल्प बनने वाला खाद तैयार होगा। यह देसी खाद डीएपी से सस्ता और गुणवत्ता में बेहतर होगा, जो खेतों को अधिक लाभ पहुंचाएगा।

केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा कि 62 वर्षों तक कृषि मंत्रालय के अंतर्गत मात्र एक संयुक्त सचिव के स्तर पर सहकारिता का कार्य संचालित होता था। आज पूर्ण रूप से स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय सभी राज्यों और देशभर की 8 लाख 30 हजार सहकारी समितियों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि बीते पांच वर्षों में हमने न केवल अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं, बल्कि हमारी सहकारी व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी, तकनीकी रूप से सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने का काम भी किया है। पहले सहकारिता सीमित रूप से केवल प्राथमिक क्षेत्र तक ही थी। हमने कृषि ऋण, डेयरी, उर्वरक वितरण और ग्रामीण सेवाओं को प्राथमिक स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक जोड़ा है। साथ ही सेकेंडरी और टर्शरी क्षेत्रों को भी इससे जोड़ने का कार्य किया है। भंडारण, उत्पादन, निर्यात, जैविक उत्पादन, परंपरागत बीजों का उत्पादन, उच्च उत्पादकता वाले बीजों का निर्माण, डिजिटल सेवाएं, बैंकिंग, मोबिलिटी, लॉजिस्टिक्स और हरित ऊर्जा – इन सभी क्षेत्रों को एक माला में पिरोने का काम पांच वर्षों में किया गया है।

सहकारिता मंत्री ने कहा कि बहुत वर्षों बाद सहकारिता मंत्रालय की पहल से आज राष्ट्रीय स्तर की तीन सहकारी समितियों के साथ मिलाकर कुल नौ राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियां बनाई गई हैं। इन नौ समितियों के माध्यम से देश से लेकर गांव तक सहकारिता को नौ अलग-अलग क्षेत्रों में पिरोया गया है।

उन्होंने कहा कि जैसे इफको, कृभको, अमूल और एनडीडीबी ने सहकारिता आंदोलन की पहचान बनाई है और पूरे विश्व स्तर पर इसे प्रतिष्ठित किया है, उसी प्रकार हमारी नौ राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियाँ भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की बड़ी सहकारी समितियां बन जाएंगी।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि हमने तीसरा काम सहकारी क्षेत्र में क्रेडिट का प्रवाह बढ़ाने का किया है। सहकारी बैंकों को आधुनिक बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा गया है। डिजिटल भुगतान शुरू किया गया, साइबर सुरक्षा सुनिश्चित की गई, ई-केवाईसी शुरू की गई, और डिजिटल लोन जैसी व्यवस्थाओं के साथ धीरे-धीरे हमारे अर्बन कोऑपरेटिव बैंक और डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक आगे बढ़ रहे हैं। डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंकों का कुल व्यवसाय पहले 19.6 लाख करोड़ रुपये था, जो आज 25 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है।

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