रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आगामी गुरुवार को नई दिल्ली में रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलोउसॉव से मुलाकात करेंगे। यह बैठक भारत और रूस के बीच बढ़ते रक्षा और रणनीतिक सहयोग के बीच हो रही है और हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय संवादों की श्रृंखला का हिस्सा है।
यह वार्ता उस समय हो रही है जब रूस की संसद, स्टेट डूमा, ने भारत और रूस के बीच हुए महत्वपूर्ण सैन्य लॉजिस्टिक्स समझौते- ‘रिक्रिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक सपोर्ट’ (RELOS) को मंजूरी दे दी है। यह समझौता 18 फरवरी को हस्ताक्षरित हुआ था और रूसी प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तिन की सरकार की ओर से हाल ही में इसे संसद में अनुमोदन के लिए भेजा गया था। स्टेट डूमा के स्पीकर व्याचेस्लाव वोलोडिन ने कहा कि यह मंजूरी भारत-रूस संबंधों की “रणनीतिक और व्यापक” प्रकृति को दर्शाती है।
डूमा की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के सैन्य विमानों, नौसैनिक जहाजों और अन्य सैन्य इकाइयों को अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम, मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों के दौरान एक-दूसरे की सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति देगा।
वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जल्द ही नई दिल्ली आने वाले हैं, जहाँ वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23वें वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। इस शिखर वार्ता में रक्षा सहयोग और व्यापार प्रमुख मुद्दों में शामिल होंगे। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने संकेत दिया है कि बैठक में भारत के लिए एक और S-400 वायु रक्षा प्रणाली की संभावना और रूस के पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57 पर सहयोग पर भी चर्चा हो सकती है। पेस्कोव ने Su-57 को “दुनिया का सर्वश्रेष्ठ विमान” बताया और यह भी संकेत दिया कि रूस भारत के साथ संयुक्त रक्षा-तकनीकी परियोजनाओं को और विस्तार देने के लिए तैयार है, जिनमें ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम जैसी मौजूदा साझेदारियाँ शामिल हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि नागरिक परमाणु सहयोग भारत-रूस संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा और रूस कॉम्पैक्ट रिएक्टर तकनीक की पेशकश करने के साथ-साथ भारत में चल रही परियोजनाओं जैसे कि कुडनकुलम परमाणु विद्युत परियोजना पर काम जारी रखेगा। कुल मिलाकर, RELOS के अनुमोदन और पुतिन की आगामी यात्रा के बीच यह बैठक भारत-रूस रक्षा साझेदारी को और गति देने वाली मानी जा रही है।


