केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने मंगलवार को गुजरात के अहमदाबाद में सैपलिंग (उन्नत पोषण और विकास के लिए दक्षिण एशियाई नीति नेतृत्व) संवाद-2026 का उद्घाटन किया। “अन्लॉकिंग वैल्यू: दक्षिण एशिया में रोजगार सृजन और सतत विकास के लिए खाद्य प्रसंस्करण को आगे बढ़ाना” विषय पर आयोजित यह दो दिवसीय क्षेत्रीय उच्च-स्तरीय नीति संवाद भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और विश्व बैंक समूह के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
खाद्य प्रसंस्करण को बताया कृषि और समृद्धि के बीच सेतु
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण कृषि और समृद्धि के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में रोजगार सृजन, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने भारत की बढ़ती भूमिका को वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण केंद्र के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि मूल्यवर्धन, तकनीक अपनाने और क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से दक्षिण एशिया की खाद्य अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतिगत पहल और अवसंरचना विकास के प्रयास वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण में मदद कर रहे हैं।
200 से अधिक प्रतिनिधि हुए शामिल
दो दिवसीय इस संवाद में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, विकास भागीदारों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, नवप्रवर्तकों और दक्षिण एशियाई देशों के प्रतिनिधियों सहित लगभग 200 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण इकोसिस्टम को मजबूत करना और क्षेत्र में समावेशी, लचीली तथा टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के निर्माण पर विचार-विमर्श करना है।
गुजरात ने खाद्य प्रसंस्करण को बताया कृषि परिवर्तन का इंजन
गुजरात सरकार के कृषि मंत्री जीतूभाई वाघानी ने विभिन्न देशों की भागीदारी का स्वागत करते हुए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को कृषि परिवर्तन का प्रमुख इंजन बताया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र रोजगार, मूल्यवर्धन और आर्थिक विकास को गति देने वाला महत्वपूर्ण माध्यम है। वाघानी ने कृषि और उद्योग के बीच की खाई को कम करने के लिए गुजरात में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान के परिसर की स्थापना का भी समर्थन किया।
कई महत्वपूर्ण विषयों पर हुआ मंथन
संवाद में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा की जा रही है। इनमें दक्षिण एशिया में खाद्य प्रसंस्करण के अवसरों का विस्तार, कृषि आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाना, अनौपचारिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का औपचारिककरण, तकनीक आधारित नवाचार, खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता मानक, निवेश जुटाना और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है। इन सत्रों में नेस्ले, बायर, राबोबैंक, अजिनोमोटो, आईटीसी, नाबार्ड और फूड इंडस्ट्री एशिया सहित कई प्रमुख वैश्विक और भारतीय संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
नवाचार मेले में प्रदर्शित हुई नई तकनीकें
कार्यक्रम के साथ आयोजित नवाचार मेले में कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स, डिजिटल ट्रेसिबिलिटी, टिकाऊ पैकेजिंग, स्मार्ट प्रोसेसिंग तकनीक और आधुनिक भंडारण प्रणालियों से जुड़े नवाचारों का प्रदर्शन किया गया। इसका उद्देश्य नवप्रवर्तकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के बीच सहयोग को मजबूत करना है।
खाद्य प्रसंस्करण पर नई रिपोर्ट जारी
इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने “भारत में खाद्य प्रसंस्करण के स्तर का आकलन” शीर्षक से एक रिपोर्ट भी जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में खाद्य प्रसंस्करण का समग्र स्तर वर्ष 2016 के लगभग 10 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2023 में लगभग 17 प्रतिशत हो गया है। रिपोर्ट में फलों, सब्जियों और डेयरी उत्पादों जैसे नाशवान क्षेत्रों में मूल्यवर्धन की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया गया है। साथ ही अवसंरचना को मजबूत करने, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने के लिए नीतिगत सुझाव भी दिए गए हैं।
क्षेत्रीय सहयोग और निवेश बढ़ाने पर फोकस
कार्यक्रम का उद्देश्य दक्षिण एशियाई देशों के बीच ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना, क्षेत्रीय सहयोग मजबूत करना, निजी निवेश आकर्षित करना और एमएसएमई क्षेत्र को समर्थन देना है। आयोजकों को उम्मीद है कि यह संवाद खाद्य प्रसंस्करण आधारित विकास, रोजगार सृजन और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के निर्माण के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। (इनपुट: पीआईबी)


