वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल में ‘उमंग वाटिका’ का उद्घाटन, उत्तर भारत का पहला सरकारी सेंसरी गार्डन

देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल जुड़ गई है। वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल में आज “उमंग वाटिका” — सेंसरी गार्डन का उद्घाटन किया गया। यह उत्तर भारत का पहला सेंसरी गार्डन है, जिसे किसी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में स्थापित किया गया है।

इस सेंसरी गार्डन का मुख्य उद्देश्य बच्चों, विशेष रूप से न्यूरो-डेवलपमेंटल आवश्यकताओं वाले बच्चों, के लिए संवेदनात्मक बनाना, भावनात्मक संतुलन और समग्र विकास को प्रोत्साहित करना है।

उमंग वाटिका को इस प्रकार विकसित किया गया है कि यह चिकित्सा उपचार के साथ-साथ थेरेपी, पुनर्वास और मानसिक सशक्तिकरण में भी सहायक सिद्ध हो सके।

उद्घाटन अवसर पर वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल के निदेशक डॉ. (प्रो.) संदीप बंसल ने कहा कि अस्पतालों की भूमिका केवल शारीरिक उपचार तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बच्चों के भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उमंग वाटिका समावेशी, करुणामय और बाल-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक सशक्त कदम है, जो चिकित्सा व्यवस्था को अधिक मानवीय बनाता है।

इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारु बाम्बा, वीएमएमसी की प्राचार्य डॉ. गीतिका खन्ना, बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप देबता सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक, अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

यह परियोजना सार्वजनिक–निजी भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका परिकल्पन और क्रियान्वयन आस्था (ASTHA) द्वारा किया गया, जबकि आर स्क्वेयर्ड फाउंडेशन ने वित्तीय सहयोग प्रदान किया। निर्माण कार्य सीपीडब्ल्यूडी और सफदरजंग अस्पताल द्वारा किया गया तथा डिज़ाइन इनपुट किलिकिली संस्था ने दिए। इस पूरी पहल में अस्पताल के बाल तंत्रिका विज्ञान विभाग ने रणनीतिक मार्गदर्शन की भूमिका निभाई।

उमंग वाटिका केवल एक उद्यान नहीं, बल्कि आशा, संवेदना और समावेशन का प्रतीक है। यह बच्चों के उपचार अनुभव को सकारात्मक बनाने के साथ-साथ उनके जीवन में मुस्कान और आत्मविश्वास लौटाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है।