भारत और उज्बेकिस्तान ने सहयोग बढ़ाने पर की चर्चा, जयशंकर ने एनएएम समर्थन का दिया भरोसा

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को नई दिल्ली में उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने तथा सहयोग के नए क्षेत्रों में विस्तार पर चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि यह बैठक भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को और मजबूत बनाने में अहम योगदान देगी।

विस्तारित पड़ोस का महत्वपूर्ण हिस्सा है उज्बेकिस्तान

जयशंकर ने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान को अपने विस्तारित पड़ोस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है। दोनों देशों के बीच लोगों, विचारों और व्यापार का लगातार दोनों दिशाओं में आदान-प्रदान होता रहा है। उन्होंने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों की जड़ें इतिहास और संस्कृति में भी गहराई से जुड़ी हुई हैं।

राजनीतिक और संस्थागत संपर्क लगातार मजबूत

विदेश मंत्री ने कहा कि आधुनिक समय में भी दोनों देशों के राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर नियमित संपर्क रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह देखकर खुशी होती है कि भारत-उज्बेकिस्तान संबंध लगातार आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देशों के नेताओं के बीच करीबी संवाद बना हुआ है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति के प्रति विशेष सम्मान रखते हैं।

निर्माण से ऊर्जा और डिजिटल तकनीक तक सहयोग

जयशंकर ने कहा कि पिछले वर्षों में भारत और उज्बेकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों का दायरा काफी बढ़ा है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच निर्माण, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग है। उन्होंने कहा कि भारत इन संबंधों को खनन क्षेत्र तक भी आगे ले जाना चाहता है।

एक अरब डॉलर के व्यापार को बढ़ाने पर जोर

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच वर्तमान में करीब एक अरब डॉलर का व्यापार होता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को पूरा विश्वास है कि यह आंकड़ा और बढ़ना चाहिए। व्यापार और आर्थिक सहयोग के विस्तार को द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संसदीय मैत्री समूह से बढ़ेगा जनप्रतिनिधियों का संवाद

जयशंकर ने कहा कि भारत ने भारत-उज्बेकिस्तान संसदीय मैत्री समूह का गठन किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के जनप्रतिनिधियों के बीच नियमित संवाद से द्विपक्षीय रिश्तों को और मजबूती मिलेगी। संसदीय स्तर पर संपर्क बढ़ने से दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग को भी गति मिलने की उम्मीद है।

आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी पर समान रुख

विदेश मंत्री ने कहा कि विकासशील देशों के रूप में भारत और उज्बेकिस्तान की कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर सोच समान है। आतंकवाद, उग्रवाद और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे विषयों पर दोनों देश सहयोग करते हैं। दोनों कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों पर साथ काम करते हैं, जिनमें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) भी शामिल है।

आतंकवाद के खिलाफ उज्बेकिस्तान के रुख की सराहना

जयशंकर ने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान की सरकार और जनता द्वारा आतंकवाद के हर रूप और स्वरूप के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाने की सराहना करता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के अपने-अपने अनुभव और चुनौतियां हैं, लेकिन भारत और उज्बेकिस्तान ने आतंकवाद को पनाह देने वाली गतिविधियों और सीमा पार आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई है।

ब्रिक्स में उज्बेकिस्तान के सहयोग की सराहना

जयशंकर ने कहा कि इस वर्ष भारत ब्रिक्स का अध्यक्ष है और उन्होंने ब्रिक्स की गतिविधियों तथा पहलों में साझेदार देश के रूप में उज्बेकिस्तान के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत ब्रिक्स से जुड़े प्रयासों में उज्बेकिस्तान के सहयोग को महत्व देता है।

एनएएम अध्यक्षता के लिए भारत का समर्थन

विदेश मंत्री ने उज्बेकिस्तान को वर्ष 2027 से 2029 तक गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनएएम) की अध्यक्षता के लिए भारत के समर्थन का आश्वासन भी दिया। उन्होंने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान की इस भूमिका का समर्थन करेगा, जिससे दोनों देशों के बीच बहुपक्षीय सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद है। (इनपुट: आईएएनएस)