प्रतिक्रिया | Sunday, July 21, 2024

17/06/24 | 10:03 am

भारत ने यूक्रेन शांति सम्मेलन के घोषणापत्र से स्वयं को अलग रखा

भारत ने स्विट्जरलैंड में आयोजित यूक्रेन शांति सम्मेलन में जारी संयुक्त वक्तव्य और संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षकर करने से इनकार कर दिया तथा यूक्रेन के संबंध में कूटनीति और संवाद के जरिए संघर्ष का समाधान तलाशने की अपनी पुरानी नीति को कायम रखा है।

सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में संयुक्त राष्ट्र चार्टर का हवाला देते हुए युक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता पर जोर दिया गया था। इसमें रूस से सभी क्षेत्रों से सेना को वापस बुलाने की मांग शामिल थी। जिसका करीब 80 देशों ने समर्थन किया। भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका सहित ग्लोबल साउथ के 12 देशों ने संयुक्त वक्तव्य पर हस्ताक्षर नहीं किए।

सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ राजनयिक पवन कपूर ने भारत का दृष्टिकोण प्रगट करते हुए कहा कि हमारा मानना है कि इस तरह के समाधान के लिए संघर्ष के दोनों पक्षों के बीच ईमानदार और व्यावहारिक जुड़ाव की आवश्यकता है।

उल्लेखनीय है कि इस सम्मेलन में रूस को आमंत्रित नहीं किया गया था। इसके साथ चीन ने इस सम्मेलन में शामिल होने से इनकार कर दिया था।

विदेश मंत्रालय ने शांति सम्मेलन के संदर्भ में जारी एक विज्ञप्ति में कहा कि भारत ने इस सम्मेलन और अन्य बैठकों में इसलिए भाग लिया था ताकि संघर्ष का समाधान बातचीत और कुटनीति के माध्यम से शांतिपूर्ण ढंग से तलाशा जा सके। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवश्यक है कि इससे जुड़े दोनों पक्षों (रूस, यूक्रेन) के बीच ईमानदारी के साथ विचार-विमर्श हो।

विज्ञप्ति में आगे कहा गया कि भारत यूक्रेन में यथाशीघ्र स्थायी शांति के लिए दोनों पक्षों के साथ संपर्क बनाए रखेगा।

ज्ञात हो कि पिछले दो वर्षों से जारी यूक्रेन संघर्ष के दौरान भारत ने पश्चिमी देशों के दवाबों की परवाह न करते हुए रूस की आलोचना करने से इनकार कर दिया था। साथ ही भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात जारी रखा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीसरी बार सत्ता में आने के बाद सरकार ने अपनी पुरानी नीति को जारी रखा।

(इनपुट- हिन्दुस्थान समाचार)

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आखरी अपडेट: 21st Jul 2024