जोहान्सबर्ग में जी20 समिट के दौरान हुए तीन-देशीय Australia-Canada-India Technology and Innovation Partnership (ACITI) समझौते को विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन, तकनीकी संप्रभुता और सप्लाई चेन मजबूती के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक ब्लूप्रिंट मान रहे हैं।
One World Outlook में प्रकाशित विश्लेषण के अनुसार, जब दुनिया सप्लाई बाधाओं, जलवायु चुनौतियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आ रहे बड़े बदलावों का सामना कर रही है, तब ACITI एक ऐसा मॉडल बनकर उभरता है जिसे समान विचारधारा वाले लोकतांत्रिक देश आगे बढ़ा सकते हैं।
तीनों देशों की ताकतें एक-दूसरे को पूरक बनाती हैं।
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ऑस्ट्रेलिया और कनाडा उन महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals) के भंडार रखते हैं, जो बैटरी, ईवी और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी हैं।
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भारत एक बड़ी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता वाला देश है, जहां विशाल घरेलू बाजार के साथ AI और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) में तेजी से प्रगति हो रही है।
विश्लेषण में कहा गया है कि तीनों मिलकर एक ऐसा साझा इकोसिस्टम बनाते हैं, जो साफ ऊर्जा तकनीक को तेज़ी से आगे बढ़ाने, सप्लाई चेन के विविधीकरण और वैश्विक स्तर पर सुरक्षित, भरोसेमंद मानक तय करने में सक्षम है।
सप्लाई चेन विविधीकरण इस समझौते का मुख्य फोकस है।
कोविड-19 के दौरान सप्लाई चेन टूटने और इंडो-पैसिफिक में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने दिखाया कि कुछ चुनिंदा स्रोतों पर निर्भरता बड़ा जोखिम बन सकती है।
ACITI का उद्देश्य लिथियम, कोबाल्ट, रेयर अर्थ जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के लिए मजबूत और भरोसेमंद वैल्यू चेन तैयार करना है, जिससे न सिर्फ जोखिम कम होंगे बल्कि टिकाऊ और सर्कुलर इकोनॉमी को भी बढ़ावा मिलेगा।
ग्रीन एनर्जी इनोवेशन भी इस साझेदारी का प्रमुख हिस्सा है।
तीनों देश हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण और एडवांस क्लीन-टेक सिस्टम जैसी तकनीकों पर मिलकर रिसर्च और डेवलपमेंट करेंगे।
जहां ऑस्ट्रेलिया और कनाडा नेट-जीरो लक्ष्यों की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं भारत की ऊर्जा आवश्यकता और उत्पादन क्षमता इन तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने में मदद कर सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह सहयोग दुनिया के लिए स्वच्छ ऊर्जा बदलाव के नए मानक बना सकता है।
लेख में यह भी कहा गया है कि ACITI जिम्मेदार AI विकास और पब्लिक-इंटरेस्ट टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए भी एक सकारात्मक कदम है।
-(इनपुटःएजेंसी)


