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भारत अगली कृषि क्रांति का नेतृत्व कर सकता है: विश्व बैंक समूह

विश्व बैंक समूह ने मंगलवार को कहा कि दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत, कृषि और खाद्य क्षेत्र में परिवर्तन के माध्यम से रोजगार, निवेश, आर्थिक वृद्धि और गरीबी उन्मूलन के बड़े अवसर हासिल कर सकता है। इसके लिए सरकार की प्रमुख पहलों का प्रभावी उपयोग महत्वपूर्ण होगा।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) ने विश्व बैंक समूह की अगुवाई वाली ‘सैपलिंग’ पहल के सहयोग से अहमदाबाद में क्षेत्रीय उच्च स्तरीय नीति संवाद का उद्घाटन किया।

‘सैपलिंग हाई-लेवल पॉलिसी डायलॉग’ में विश्व बैंक समूह ने कहा कि कृषि क्षेत्र में परिवर्तन केवल खेती तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण, लॉजिस्टिक्स, विपणन और मूल्य संवर्धन पर भी ध्यान देना होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण एशिया अपने विकास के एक महत्वपूर्ण चरण में खड़ा है। क्षेत्र का कृषि क्षेत्र सालाना 700 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का है और लगभग 43 प्रतिशत कार्यबल को रोजगार देता है। इसके बावजूद कृषि का क्षेत्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान केवल लगभग 16 प्रतिशत है।

विशेषज्ञों ने बताया कि दक्षिण एशिया में हर वर्ष उत्पादित खाद्य पदार्थों का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा नष्ट या बर्बाद हो जाता है, जो लगभग 30 करोड़ लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त है।

उन्होंने कहा कि कृषि परिवर्तन का अगला चरण केवल उत्पादन बढ़ाने में नहीं, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण, आपूर्ति श्रृंखला और मूल्य संवर्धन गतिविधियों के विस्तार में है। इससे लाखों उत्पादक रोजगार सृजित हो सकते हैं, खाद्य नुकसान कम होगा और किसानों की आय बढ़ेगी।

भारत में खाद्यान्न उत्पादन 1950-51 के 5.1 करोड़ टन से बढ़कर आज 33 करोड़ टन से अधिक हो चुका है।

पिछले एक दशक में प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात भी दोगुने से अधिक बढ़कर लगभग 4.9 अरब डॉलर से बढ़कर 10 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। वर्तमान में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र विनिर्माण मूल्य संवर्धन में लगभग 9 प्रतिशत और भारत के कुल निर्यात में करीब 13 प्रतिशत का योगदान देता है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अभी भी इस क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण का कुल रोजगार में हिस्सा अभी भी सीमित है और कृषि उत्पादन का बड़ा हिस्सा बिना प्रसंस्करण के ही बाजार तक पहुंचता है। कोल्ड चेन, भंडारण सुविधाओं, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और बाजार संपर्क को मजबूत करके इस क्षेत्र में मूल्य संवर्धन को काफी बढ़ाया जा सकता है।

इस परिवर्तन को गति देने के लिए विश्व बैंक समूह ‘एग्रीकनेक्ट’ और ‘सैपलिंग’ के संयुक्त मॉडल पर काम कर रहा है।

‘एग्रीकनेक्ट’ एक वैश्विक मंच है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक 30 करोड़ किसानों को बाजारों से जोड़ना है। इसके लिए बुनियादी ढांचे में निवेश, नीतिगत सुधार और निजी पूंजी जुटाने पर जोर दिया जा रहा है।

यह पहल पहले से ही भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका सहित कई देशों में परियोजनाओं और सुधार कार्यक्रमों को समर्थन दे रही है।

नीति संवाद में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने सरकारों, उद्योग जगत, निवेशकों और विकास संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

निवेशकों से कोल्ड चेन, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स हब, प्रसंस्करण क्लस्टर, कृषि-औद्योगिक पार्क और उभरते कृषि उद्यमों में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया गया।

साथ ही कंपनियों को एकीकृत मूल्य श्रृंखलाएं विकसित करने, गुणवत्ता नियंत्रण और ट्रेसबिलिटी के लिए डिजिटल तकनीकों को अपनाने तथा कौशल विकास और क्षमता निर्माण में निवेश करने की सलाह दी गई।

-(इनपुटःएजेंसी)

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