एफसीआरए पर विदेशी टिप्पणियों को भारत ने किया खारिज, कहा- विधायी मामलों पर संसद लेती है फैसला

भारत ने ‘फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट अमेंडमेंट बिल (एफसीआरए)’ पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कुछ वर्गों की टिप्पणियों को खारिज करते हुए शुक्रवार को स्पष्ट किया कि देश से जुड़े विधायी मामले भारत के आंतरिक विषय हैं और इन पर निर्णय संसद करती है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका समेत कई देश विदेशी धन के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए अपने-अपने नियम और कानूनी ढांचे लागू करते हैं।

अमेरिका सहित कई देशों में विदेशी धन पर नियंत्रण : एमईए

नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय की नियमित मीडिया ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि मंत्रालय ने एफसीआरए संशोधन को लेकर की गई टिप्पणियों को देखा है। उन्होंने कहा कि भारत से जुड़े विधायी मामले आंतरिक विषय हैं, जिन पर निर्णय देश की संसद द्वारा लिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका समेत कई देश विदेशी धन के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं।

अमेरिकी सांसद ने एफसीआरए संशोधन पर की थी टिप्पणी

हाल ही में अमेरिकी सांसद राइली मूर ने भारत में विदेशी चंदे और दान से जुड़े कानूनों में प्रस्तावित संशोधनों पर टिप्पणी की थी। केंद्र सरकार संसद के मौजूदा मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में एफसीआरए संशोधन विधेयक पेश कर सकती है।

सरकार ने वित्तीय पारदर्शिता को बताया अहम

सरकार के 22 जुलाई को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, वैश्विक वित्तीय नेटवर्क, डिजिटल लेनदेन और सीमा-पार फंडिंग व्यवस्थाओं के तेजी से विस्तार ने वित्तीय पारदर्शिता, विदेशी प्रभाव और लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियां पैदा की हैं। इसी कारण कई लोकतांत्रिक देशों में विदेशी धन के प्रवाह को नियंत्रित करना सुशासन का सामान्य और स्वीकार्य हिस्सा बन गया है।

वैध सामाजिक और परोपकारी गतिविधियों पर रोक उद्देश्य नहीं

सरकार के मुताबिक, एफसीआरए को इसी व्यापक अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में समझा जाना चाहिए। इसका उद्देश्य वैध और वास्तविक सामाजिक या परोपकारी गतिविधियों को रोकना नहीं है। बल्कि यह ऐसा कानूनी ढांचा उपलब्ध कराता है, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय सहयोग जारी रह सके और विदेशी योगदान भारतीय कानूनों के अनुरूप प्राप्त, उपयोग और दर्ज किए जा सकें।

विदेशी योगदान के लिए कानूनी ढांचा उपलब्ध कराता है एफसीआरए

एफसीआरए वह कानून है, जो भारत में व्यक्तियों, संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीओ), ट्रस्ट और कंपनियों द्वारा विदेशों से मिलने वाले धन, प्रतिभूतियों या अन्य वस्तुओं को प्राप्त करने और इस्तेमाल करने से जुड़े नियम तय करता है। इसका संचालन गृह मंत्रालय करता है।

विदेशी फंडिंग के लिए तीन प्रमुख प्रावधान

एफसीआरए मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों को नियंत्रित करता है। यह निर्धारित करता है कि कौन विदेशी योगदान स्वीकार कर सकता है और किन शर्तों के तहत। इसके अलावा विदेशी धन को प्राप्त करने, उसका लेखा-जोखा रखने और रिपोर्ट करने की प्रक्रिया तय करता है। कानून कुछ सीमित और स्पष्ट रूप से परिभाषित विदेशी फंड से संचालित गतिविधियों पर भी रोक लगाता है, जो भारत की संप्रभुता, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।

कनाडा के कानून का भी दिया गया उदाहरण

सरकार के अनुसार, कनाडा ने 2024 में ‘फॉरेन इन्फ्लुएंस ट्रांसपेरेंसी एंड अकाउंटेबिलिटी एक्ट’ लागू किया था। इसके प्रस्तावना भाग में कहा गया है कि कनाडा और उसके सहयोगी देशों के बीच यह समझ बढ़ रही है कि विदेशी हस्तक्षेप को कम करने के लिए पंजीकरण तंत्र आवश्यक हैं। भारत 1976 से इसी तरह का कानूनी ढांचा बनाए हुए है।

अमेरिका में फारा के कड़े अनुपालन का उल्लेख

सरकार ने कहा कि अमेरिका, जिसने इस तरह के मॉडल की शुरुआत की थी, ने 2025 में 87 वर्ष पुराने ‘फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट’ (फारा) को अधिक सख्ती से लागू करने के लिए संघीय एजेंसियों को निर्देश दिए थे।

यूरोप और ब्रिटेन में भी विदेशी प्रभाव से जुड़े नियम

सरकार के मुताबिक, यूरोपीय संघ का प्रस्ताव एक यूरोबैरोमीटर सर्वेक्षण के बाद आया था, जिसमें 81 प्रतिशत यूरोपीय नागरिकों ने गुप्त विदेशी हस्तक्षेप को गंभीर समस्या बताया था। वहीं, ब्रिटेन की ‘फॉरेन इन्फ्लुएंस रजिस्ट्रेशन स्कीम’, जो राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 2023 का हिस्सा है, 1 जुलाई 2025 से लागू हुई।

लोकतांत्रिक देशों में पारदर्शिता पर बढ़ता जोर

भारत सरकार का कहना है कि एफसीआरए दुनिया के कई देशों में मौजूद इसी तरह के कानूनी ढांचों के अनुरूप है। इनमें से कई देशों ने हाल के वर्षों में विदेशी प्रभाव से जुड़े कानून बनाए हैं या मौजूदा कानूनों को मजबूत किया है। सरकार के अनुसार, अधिक पारदर्शिता की दिशा में यह रुझान लोकतांत्रिक देशों के बीच व्यापक सहमति को दर्शाता है।

विदेशी धन और प्रभाव को लेकर पारदर्शिता जरूरी : सरकार

सरकार के मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि यदि विदेशी धन, निर्देश या संस्थागत संबंध घरेलू सार्वजनिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं, तो उनमें पारदर्शिता हो। साथ ही, जानकारी छिपाने या नियमों का पालन नहीं करने की स्थिति में दंड का प्रावधान भी होना चाहिए।

विदेश सचिव की श्रीलंका यात्रा पर भी विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी

विदेश सचिव की श्रीलंका यात्रा के संबंध में रणधीर जायसवाल ने बताया कि यात्रा के दौरान विकास सहयोग, मछुआरों से जुड़े मुद्दों, विभिन्न विकास परियोजनाओं और चक्रवात ‘दितवाह’ के बाद शुरू किए गए नए कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।

श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व से हुई मुलाकात

विदेश सचिव ने यात्रा के दौरान श्रीलंका के सर्वोच्च नेतृत्व से मुलाकात की। उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से भी भेंट की। इसके अलावा श्रीलंका के विदेश मंत्री और अपने समकक्ष, श्रीलंका के विदेश सचिव के साथ भी बैठक की। इन बैठकों में दोनों पक्षों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। (इनपुट: आईएएनएस)