भारत ने रोम में खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) की वानिकी संबंधी समिति के 28वें सत्र (सीओएफओ 28) में वन एवं भू-दृश्य पुनर्स्थापन के क्षेत्र में अपनी पहलों और उपलब्धियों को रेखांकित किया। 28 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक आयोजित हो रहे इस सत्र में भारत ने सतत वन प्रबंधन, जलवायु कार्रवाई और लचीले वन भू-दृश्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को देश-प्रेरित कार्यान्वयन, क्षमता विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और जमीनी स्तर पर मापनीय परिणामों का समर्थन करना चाहिए।
सतत वन प्रबंधन को बताया पुनर्स्थापन की एकीकृत रूपरेखा
सीओएफओ 28 में भारत ने वन एवं भू-दृश्य पुनर्स्थापन पर एफएओ के फोकस का स्वागत किया। भारत ने कहा कि सतत वन प्रबंधन राष्ट्रीय परिस्थितियों और स्थानीय समुदायों की आवश्यकताओं के अनुरूप काम करते हुए भू-दृश्य स्तर पर पुनर्स्थापन के समाधान के लिए एक एकीकृत रूपरेखा उपलब्ध कराता है। एफएओ के इस सत्र में भी वन एवं भू-दृश्य पुनर्स्थापन को प्रमुख विषयों में शामिल किया गया है।
वन और वृक्ष आवरण 8.274 करोड़ हेक्टेयर
भारत ने अपने वन संसाधनों को बढ़ाने में हुई प्रगति को रेखांकित करते हुए बताया कि देश का वन और वृक्ष आवरण 8.274 करोड़ हेक्टेयर है, जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का 25.17% है। भारत सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2023 के आकलन में वन और वृक्ष आवरण 8,27,356.95 वर्ग किलोमीटर दर्ज किया गया था, जो भौगोलिक क्षेत्र का 25.17% है।
कार्बन सिंक बढ़ाने के लक्ष्य पर जोर
भारत ने बताया कि वन और वृक्ष देश की जलवायु प्रतिबद्धताओं के केंद्र में हैं। देश ने 2021 तक 2.29 बिलियन टन CO₂ समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक सृजित किया है और 2005 के स्तर की तुलना में 2035 तक 3.5 से 4.0 बिलियन टन CO₂ समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक सृजित करने के लक्ष्य को और महत्वाकांक्षी बनाया है। भारत सरकार के उपलब्ध आंकड़ों में 2005 के आधार वर्ष की तुलना में अतिरिक्त कार्बन सिंक की उपलब्धि 2.29 बिलियन टन CO₂ समतुल्य दर्ज की गई है।
बॉन चैलेंज के तहत 2.176 करोड़ हेक्टेयर भूमि पुनर्स्थापन के दायरे में
भारत ने 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर क्षरित और वन-विहीन भूमि को पुनर्स्थापित करने की बॉन चैलेंज के तहत अपनी प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। भारत के अनुसार, इसमें से 2.176 करोड़ हेक्टेयर भूमि को पहले ही पुनर्स्थापन के दायरे में लाया जा चुका है। इसके साथ ही अरावली ग्रीन वॉल के तहत लगभग 64.5 लाख हेक्टेयर क्षरित भूमि की पुनर्स्थापना के लिए पहचान की गई है।
मैंग्रोव पुनर्स्थापन और रामसर स्थलों पर फोकस
भारत ने तटीय भू-दृश्यों के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए एमआईएसएचटीआई पहल को भी प्रदर्शित किया। इसके तहत मैंग्रोव के पुनर्स्थापन के साथ जलवायु लचीलेपन को मजबूत करने और स्थानीय आजीविकाओं को समर्थन देने पर जोर दिया जा रहा है। भारत ने यह भी रेखांकित किया कि देश में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 101 हो गई है।
‘एक पेड़ माँ के नाम’ पहल का भी किया उल्लेख
भारत ने ‘एक पेड़ माँ के नाम- प्लांट4मदर’ पहल को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया। इसे संपूर्ण-सरकार और संपूर्ण-समाज की पहल के रूप में प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि इसके तहत 3.5 बिलियन से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। भारत ने इसे बड़े पैमाने पर जनभागीदारी के माध्यम से हरित आवरण और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाली पहल के रूप में रेखांकित किया।
विकासशील देशों के लिए सतत वित्तपोषण की जरूरत बताई
भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को वैश्विक प्रतिबद्धताओं से आगे बढ़कर देश-प्रेरित कार्यान्वयन, क्षमता विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और जमीनी स्तर पर मापनीय परिणामों को समर्थन देना चाहिए। भारत ने विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए प्रभावी और सतत वित्तपोषण की आवश्यकता पर जोर दिया तथा एफएओ से जलवायु, जैव विविधता और मिश्रित वित्त तक पहुंच बनाने तथा दीर्घकालिक पुनर्स्थापन कार्यक्रम विकसित करने के लिए सहायता मजबूत करने का आह्वान किया।
दक्षिण-दक्षिण और त्रिकोणीय सहयोग बढ़ाने पर जोर
भारत ने एफएओ के वानिकी कार्य, वैश्विक वन लक्ष्यों और वन से संबंधित अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं के बीच बेहतर सामंजस्य की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही ज्ञान, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों के आदान-प्रदान के लिए दक्षिण-दक्षिण और त्रिकोणीय सहयोग बढ़ाने की बात कही।
2027-2036 संयुक्त राष्ट्र वनीकरण और पुनर्वनीकरण दशक के लिए प्रतिबद्धता
भारत ने सतत वन प्रबंधन के अनुरूप प्रस्तावित संयुक्त राष्ट्र वनीकरण और पुनर्वनीकरण दशक 2027-2036 को आकार देने में एफएओ और सदस्य देशों के साथ काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसका उद्देश्य क्षरित पारिस्थितिकी तंत्रों के पुनर्स्थापन से लेकर लचीले, उत्पादक और समावेशी वन भू-दृश्यों तक एक सुसंगत निरंतरता विकसित करना है। (इनपुट: पीआईबी)


