नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 21वीं सदी में टेक्नोलॉजी, डेटा, ज्ञान और नवाचार ही शक्ति के नए स्रोत हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि इस शक्ति का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण ‘पावर टू कंट्रोल’ से आगे ‘पावर टू एम्पावर’ का है। भारत अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल केवल अपनी प्रगति के लिए नहीं, बल्कि दुनिया और मानवता के लिए नए अवसर पैदा करने के लिए कर रहा है।
भारत में पहली बार हुआ ब्लूमबर्ग इकोनॉमी फोरम
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के भारत में पहली बार आयोजित होने का स्वागत करते हुए माइकल ब्लूमबर्ग और उनकी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह मंच हर साल दुनिया के बेहतरीन दिमागों को एक साथ लाता है, जहां अर्थव्यवस्था, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और वैश्विक मामलों पर चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि भारत में इस आयोजन का होना सही समय पर सही जगह का चयन है।
टेक्नोलॉजी और डेटा बन रहे शक्ति के नए स्रोत
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि 21वीं सदी के तीसरे दशक में शक्ति की परिभाषा तेजी से बदल रही है। आज टेक्नोलॉजी, डेटा, ज्ञान और इनोवेशन शक्ति के प्रमुख स्रोत हैं। ऐसे में सवाल यह नहीं है कि शक्ति किसके पास है, बल्कि यह है कि उसका इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्या टेक्नोलॉजी केवल कुछ लोगों को आगे बढ़ाएगी या करोड़ों लोगों के लिए नए अवसर पैदा करेगी? क्या ज्ञान कुछ लोगों की ताकत बना रहेगा या सभी की क्षमता बढ़ाएगा? इसी सोच से ‘पावर टू एम्पावर’ का विचार सामने आता है।
भारत की परंपरा में शक्ति के सही इस्तेमाल पर जोर
प्रधानमंत्री ने संस्कृत के एक श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान, धन और शक्ति जिसके पास भी हो, उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाता है, यही सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शक्ति का वास्तविक मूल्य उसके उद्देश्य में है। उन्होंने कहा कि ‘पावर टू एम्पावर’ का मानवीय भाव भारत के लिए नया नहीं है। हजारों वर्षों की भारतीय परंपरा ने शक्ति का इस्तेमाल दूसरों के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए करने की सीख दी है और भारत ने इसे अपनी शासन व्यवस्था तथा कार्यसंस्कृति में लागू करके दिखाया है।
डिजिटल शक्ति ने जोड़े अवसर
प्रधानमंत्री ने भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए कहा कि देश में 100 से अधिक भाषाएं, करीब 80 हजार पंजीकृत समाचार पत्र और प्रकाशन तथा 1,000 से अधिक सैटेलाइट टीवी चैनल हैं। सोशल मीडिया के दौर में भारत में 500 मिलियन से अधिक यूट्यूब और 500 मिलियन से अधिक इंस्टाग्राम यूजर्स हैं। उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग मुद्दों और विचारों पर खुलकर बहस होती है और इसमें डिजिटल पावर की बड़ी भूमिका है। 12-13 साल पहले मोबाइल और इंटरनेट तक पहुंच खुद एक शक्ति थी, लेकिन 2014 के बाद भारत ने मोबाइल डेटा को किफायती बनाने पर जोर दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि छोटे शहर का विद्यार्थी डिजिटल लर्निंग से जुड़ सका, गांव का दुकानदार नए ग्राहकों तक पहुंच सका और युवा ऑनलाइन पाठ्यक्रमों से जुड़ सके। उन्होंने कहा कि भारत में कनेक्टिविटी ने केवल लोगों को नहीं जोड़ा, बल्कि अवसरों को भी जोड़ा है। यही ‘पावर टू एम्पावर’ है।
डिजिटल पेमेंट ने बढ़ाया वित्तीय समावेशन
प्रधानमंत्री मोदी ने विदेश से आए प्रतिनिधियों से भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम का अनुभव लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि देश में एक स्ट्रीट वेंडर और बड़े कार शोरूम का कारोबार और पैमाना भले अलग हो, लेकिन दोनों एक ही डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने इसे समावेशी टेक्नोलॉजी की ताकत बताते हुए कहा कि भारत अपनी डिजिटल क्षमताओं को केवल देश तक सीमित नहीं रख रहा है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुभव दूसरे देशों के साथ साझा किए जा रहे हैं, ताकि वे अपनी जरूरतों के अनुसार डिजिटल सिस्टम विकसित कर सकें।
भारत की डिजिटल क्षमता दुनिया के लिए भी उपयोगी
पीएम नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 के दौरान विकसित किए गए कोविन प्लेटफॉर्म का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यह ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म था और भारत का लगातार प्रयास है कि उसकी क्षमताएं दूसरे देशों के लिए भी नई संभावनाओं के दरवाजे खोलें। उन्होंने कहा कि भारत का सामर्थ्य मानवता को सशक्त करने वाला होना चाहिए।
स्टार्टअप इकोसिस्टम में छोटे शहरों की बढ़ती भूमिका
नवाचार की शक्ति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक विचार को उत्पाद और समस्या को समाधान में बदलना बड़ी क्षमता है। जब यह अवसर समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचता है तो उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले भारत में कुछ सौ स्टार्टअप थे, जबकि अब इनकी संख्या 2.5 लाख से अधिक हो गई है। करीब आधे स्टार्टअप छोटे शहरों और कस्बों से आते हैं। 45% से अधिक स्टार्टअप में कम-से-कम एक महिला निदेशक या पार्टनर है। इससे स्पष्ट है कि नवाचार के अवसर अधिक लोगों तक पहुंच रहे हैं और नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं।
सरकार की शक्ति का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के पास अधिकार और शक्ति होती है, लेकिन इसका उद्देश्य नागरिकों को सिस्टम पर निर्भर बनाना नहीं, बल्कि उन्हें सक्षम और सशक्त बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी दृष्टिकोण के साथ भारत ने पिछले एक दशक में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। JAM ट्रिनिटी और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के जरिए सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाई गई है। इससे भ्रष्टाचार कम हुआ, नागरिकों की सुविधा बढ़ी और सरकार तथा नागरिक के बीच सीधा संपर्क स्थापित हुआ।
कोविड के दौरान भारत ने दुनिया के साथ साझा की वैक्सीन क्षमता
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान वैक्सीन निर्माण क्षमता बेहद महत्वपूर्ण थी। उस समय सवाल था कि क्या इसका लाभ केवल कुछ देशों तक सीमित रहेगा या उन देशों और लोगों तक भी पहुंचेगा जिनके पास ऐसी क्षमता नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत ने मानवता को सशक्त करने वाला रास्ता चुना और 100 से अधिक देशों को वैक्सीन की आपूर्ति की। भारत की विनिर्माण क्षमता दूसरे देशों के लिए सहायता का माध्यम बनी।
AI का इस्तेमाल मानवता के साथ प्रकृति और जीव-जंतुओं के लिए
पीएम नरेंद्र मोदी ने भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें मानवता के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग के साथ-साथ पशुओं को एआई से लाभ पहुंचाने के विषय पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारत जितना सक्षम होगा, उतना ही वह मानवता और दुनिया के लिए उपयोगी साबित होगा।
प्रतिस्पर्धा के साथ करुणा भी जरूरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि शक्ति केवल आगे बढ़ने की क्षमता नहीं है, बल्कि दूसरों को भी आगे बढ़ाने की क्षमता है। भारत मानता है कि प्रतिस्पर्धा जरूरी है, लेकिन करुणा भी होनी चाहिए। इनोवेशन जरूरी है, लेकिन उसके लाभ का विस्तार भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शक्ति जरूरी है, लेकिन वैश्विक चुनौतियों के समाधान में योगदान देना भी उतना ही आवश्यक है। जलवायु परिवर्तन, जल शासन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और उभरती टेक्नोलॉजी के जिम्मेदार इस्तेमाल जैसे क्षेत्रों में दुनिया को ऐसी शक्ति की जरूरत है, जो समाधान और नए अवसर पैदा करे।
जलवायु लक्ष्यों को समय से पहले हासिल किया
प्रधानमंत्री मोदी ने पेरिस समझौते के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि 2015 में भारत ने 2030 तक अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 40% गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल करने का लक्ष्य रखा था। भारत ने नवंबर 2021 में ही यह लक्ष्य हासिल कर लिया, यानी निर्धारित समय से करीब नौ साल पहले। उन्होंने कहा कि भारत ऐसा करने वाला पहला G20 देश बना। यह केवल एक लक्ष्य हासिल करने की बात नहीं थी, बल्कि देश की बदलती ऊर्जा यात्रा का संकेत भी था।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में चार गुना बढ़ोतरी
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि 2014 में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता करीब 75 गीगावॉट थी, जो अब करीब 300 गीगावॉट हो चुकी है। यानी इस क्षेत्र में करीब चार गुना क्षमता जोड़ी गई है। उन्होंने कहा कि भारत के ऊर्जा संक्रमण से नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। पीएम सूर्य घर और पीएम-कुसुम जैसी योजनाओं के जरिए घरों और किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से भारत को 30 गीगावॉट से अधिक सौर क्षमता हासिल हुई है और हर साल 30 मिलियन टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी का अनुमान है।
संकटों के दौर में दुनिया को भरोसे की जरूरत
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का यह दशक अभूतपूर्व वैश्विक चुनौतियां लेकर आया है। दुनिया ने महामारी देखी, अलग-अलग क्षेत्रों में युद्ध देखे और व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों तथा ऊर्जा आपूर्ति में बाधाएं देखीं। उन्होंने कहा कि जिन चीजों ने कभी दुनिया को जोड़ा था, वही आज हथियार बनती जा रही हैं। सप्लाई चेन, ऊर्जा, खनिज, भुगतान और टेक्नोलॉजी दबाव और दबदबे के माध्यम बन रहे हैं। ऐसे समय में दुनिया के सामने सबसे बड़ा सवाल भरोसे का है। भरोसा इस बात का कि जरूरत के समय आपूर्ति जारी रहेगी, किए गए वादे निभाए जाएंगे और संकट के समय साझेदार देश साथ खड़े रहेंगे।
दुनिया के लिए भरोसेमंद साझेदार है भारत
पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी में भारत की प्रगति सबके साथ और सबको साथ लेकर आगे बढ़ने की कहानी है। जब दुनिया को सस्ती दवाओं की जरूरत होती है तो हर पांच में से एक जेनेरिक दवा भारत से आती है। डिजिटल पहचान और पेमेंट समाधान के क्षेत्र में भारत का मॉडल दुनिया के सामने है। उन्होंने कहा कि दुनिया को प्रतिभाओं की जरूरत होती है तो भारत के कुशल युवाओं पर भरोसा किया जाता है। भारत में 2,000 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर हैं, जो दुनियाभर की कंपनियों को सेवाएं दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “We do not grow at anyone’s cost. We grow with the world, and for the world.” उन्होंने कहा कि जब दुनिया को स्थिर और भरोसेमंद आधार की जरूरत होती है, तो भारत अपना दायित्व समझते हुए हाथ आगे बढ़ाता है।
भारत वैश्विक पहलों के जरिए साझा समाधान दे रहा
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी क्षमताओं का श्रेय या रॉयल्टी नहीं मांगता। उन्होंने शून्य का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया गर्व से कहती है कि भारत ने दुनिया को शून्य दिया, जिसका लाभ पूरी मानवता को हुआ, लेकिन भारत ने इसके लिए कभी रॉयल्टी नहीं मांगी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, बिग कैट अलायंस, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर और मिशन लाइफ जैसी पहलों का उल्लेख किया।
‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ भारत की सोच
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’, ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ और ‘वन अर्थ, वन हेल्थ’ जैसे विचार भारत की वैश्विक सोच को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया को जोड़ने और खुद दुनिया से जुड़ने पर जोर देता है। शक्ति का इस्तेमाल दूसरों को सशक्त करने के लिए होना चाहिए।
मजबूत आर्थिक बुनियाद पर आगे बढ़ रहा भारत
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि अनिश्चितताओं से भरी दुनिया में भारत विश्वसनीयता और स्थिरता का भरोसा देता है। इस साल अप्रैल-जून तिमाही में भारत की आर्थिक विकास दर 7.8% रही। उन्होंने कहा कि 12-13 साल पहले भारत का चालू खाता घाटा GDP के 4% से अधिक था, जबकि पिछले साल यह घटकर करीब 0.61% रह गया। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक है और बैंकिंग सिस्टम कई दशकों में सबसे मजबूत स्थिति में है।
सुधारों की रफ्तार को बताया ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की आर्थिक मजबूती के कारण उसकी सॉवरेन रेटिंग में भी सुधार हो रहा है। सरकार स्पष्ट नीति दिशा के साथ लगातार सुधार कर रही है। उन्होंने GST को टैक्स के जटिल तंत्र को राष्ट्रीय बाजार में बदलने वाला सुधार बताया। इसके साथ ही दिवाला कानून, 29 श्रम कानूनों को चार सरल श्रम संहिताओं में बदलने और कारोबार से जुड़ी सैकड़ों छोटी गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने जैसे कदमों का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ यहीं नहीं रुकने वाली। उन्होंने कहा, “हमारे लिए रिफॉर्म कोई कंपल्शन नहीं, हमारा कन्विक्शन है।”
साथ चलने और संवाद से बढ़ती है सामूहिक शक्ति
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने वेदों के मंत्र ‘संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसका संदेश है- साथ चलें, साथ संवाद करें और एक-दूसरे को समझने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि साथ चलने से शक्ति बढ़ती है, संवाद से समझ बढ़ती है और एक-दूसरे को समझने से बड़ी वैश्विक चुनौतियों का मिलकर समाधान निकाला जा सकता है। यही ‘पावर टू एम्पावर’ की भावना है- अपनी शक्ति को केवल अपनी प्रगति तक सीमित न रखना, बल्कि उससे दूसरों के लिए भी नए अवसर पैदा करना। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम का मंच इसी भावना को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। (इनपुट: पीआईबी)


