केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि भारत पारंपरिक चिकित्सा (Traditional Medicine) के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है। देश इस दिशा में मजबूत शोध, वैश्विक सहयोग और गुणवत्ता व सुरक्षा के उच्च मानक स्थापित कर रहा है।
मंत्री ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, बल्कि यह सामुदायिक ज्ञान और मानवता की प्राकृतिक स्वास्थ्य समझ का भी खजाना है। आज दुनिया फिर से परंपरागत ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के संयोजन को महत्व दे रही है।
उन्होंने बताया कि भारत विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और जामनगर स्थित WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन के साथ मिलकर शोध को मजबूत करने, गुणवत्ता और सुरक्षा मानक बढ़ाने, तथा पारंपरिक चिकित्सा के लाभ सभी तक पहुँचाने पर काम कर रहा है।
आयुष मंत्रालय और डब्ल्यूएचओ ने मिलकर ‘दूसरे WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन’ से पहले नई दिल्ली में राजदूतों के लिए एक विशेष स्वागत समारोह आयोजित किया। यह समिट 17 से 19 दिसम्बर तक नई दिल्ली में होने वाला है।
इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों के राजदूतों, उच्चायुक्तों और प्रतिनिधियों को समिट के उद्देश्यों और पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष मंत्रालय ने कहा कि भारत, डब्ल्यूएचओ और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर शोध, गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “हमें विश्वास है कि यह वैश्विक संवाद पारंपरिक चिकित्सा में सार्थक अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देगा।”
डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह, जो डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की रीजनल डायरेक्टर एमेरिटस और पारंपरिक चिकित्सा की वरिष्ठ सलाहकार हैं, ने कहा, “पारंपरिक चिकित्सा ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’ (Health for All) हासिल करने का अहम हिस्सा है।”
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, 170 से अधिक सदस्य देशों में पारंपरिक चिकित्सा का उपयोग हो रहा है, और यह क्षेत्र पहले से कहीं ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रहा है।
राजदूत सिबी जॉर्ज, सचिव (पश्चिम), विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक ढांचे को आकार देने में अहम भूमिका निभा रहा है।
वहीं, डॉ. श्यामा कुरुविला, निदेशक, WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर, ने कहा कि यह समिट लोगों और प्रकृति के बीच संतुलन बहाल करने की वैश्विक मुहिम को आगे बढ़ाने का उद्देश्य रखती है, जो पारंपरिक चिकित्सा के विज्ञान और अभ्यास पर आधारित है।
-(इनपुटःएजेंसी)


