प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत अपनी शक्ति का इस्तेमाल केवल स्वयं आगे बढ़ने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया और मानवता को सशक्त बनाने के लिए कर रहा है। मंगलवार को नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का विजन नियंत्रण की शक्ति से आगे बढ़कर सक्षम बनाने, प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़कर सहयोग करने और स्वयं सफल होने से आगे बढ़कर दूसरों को सफल बनाने की शक्ति का है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत की प्रगति सामूहिक विकास और साझा अवसरों में निहित है तथा देश किसी की कीमत पर आगे नहीं बढ़ता, बल्कि दुनिया के साथ और दुनिया के लिए आगे बढ़ता है।
भारत में पहली बार आयोजित हुआ ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम
प्रधानमंत्री ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के भारत में पहली बार आयोजित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की और माइकल ब्लूमबर्ग तथा उनकी पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय मामलों जैसे वैश्विक महत्व के विषयों पर दुनिया के प्रतिभाशाली लोगों को एक मंच पर लाने की फोरम की क्षमता महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि फोरम के लिए भारत का चयन सही समय पर सही स्थान का चयन है।
प्रौद्योगिकी, डेटा और नवाचार बन रहे शक्ति के नए मानदंड
पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी के तीसरे दशक में दुनिया तेजी से बदल रही है और आज प्रौद्योगिकी, डेटा, ज्ञान तथा नवाचार शक्ति के प्रमुख मानदंड बन गए हैं। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण है कि इस शक्ति का वास्तविक उद्देश्य क्या होना चाहिए- क्या इसका लाभ कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित रहे या इसके माध्यम से लाखों लोगों के लिए अवसरों का लोकतंत्रीकरण किया जाए। उन्होंने नियंत्रण से आगे बढ़कर सक्षम बनाने, प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़कर सहयोग करने और स्वयं सफल होने से आगे बढ़कर दूसरों को सफल बनाने की जरूरत पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह इसी ‘सशक्त बनाने की शक्ति’ के विजन के साथ फोरम में आए हैं।
शक्ति का वास्तविक मूल्य उसके उद्देश्य में निहित
प्रधानमंत्री ने शक्ति की अवधारणा को भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि ज्ञान, धन और शक्ति का वास्तविक मूल्य इस बात से तय होता है कि उनका इस्तेमाल कितनी नैतिकता और किस उद्देश्य के साथ किया जाता है। उन्होंने कहा कि आज की जटिल वैश्विक परिस्थितियों से निपटने के लिए शक्ति के इस गहन उद्देश्य को समझना जरूरी है। शक्ति का वास्तविक मूल्य केवल उसकी क्षमता में नहीं, बल्कि उसके उद्देश्य और उसके इस्तेमाल से पैदा होने वाले परिणामों में निहित है।
भारत की संस्कृति में गहराई से समाहित है सशक्तिकरण का विचार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘सशक्त बनाने की शक्ति’ केवल वैश्विक मंच से दिया जाने वाला कोई उपदेश नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति और शासन व्यवस्था में गहराई से समाहित विचार है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति के उदाहरण इस बात को स्पष्ट करते हैं कि किस तरह देश ने अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल लोगों को अवसर उपलब्ध कराने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह भारत के उदाहरणों के माध्यम से इस विचार को सामने रखना चाहते हैं।
डिजिटल शक्ति ने लोकतांत्रिक संवाद को दी नई गति
भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए प्रधानमंत्री ने देश की विशाल भाषाई और सामाजिक विविधता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में 80,000 से अधिक प्रकाशन और एक हजार से ज्यादा टेलीविजन चैनल हैं तथा डिजिटल युग में करोड़ों लोग यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे मंचों के माध्यम से व्यापक सार्वजनिक विमर्श में भाग ले रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बदलाव में डिजिटल शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और प्रौद्योगिकी ने लोकतांत्रिक संवाद को और व्यापक बनाया है।
सस्ता डेटा, कनेक्टिविटी और अवसरों का लोकतंत्रीकरण
पीएम मोदी ने कहा कि एक दशक से कुछ अधिक समय पहले तक मोबाइल फोन और इंटरनेट की पहुंच को मुख्य रूप से संपन्न वर्ग की सुविधा माना जाता था, लेकिन 2014 के बाद डेटा की कीमतों में भारी कमी कर डिजिटल पहुंच को व्यापक बनाया गया। इससे छोटे शहरों के विद्यार्थियों से लेकर गांवों के दुकानदारों तक लोगों को ज्ञान, शिक्षा और बाजारों तक तेजी से पहुंच मिली। उन्होंने कहा कि भारत में कनेक्टिविटी ने केवल लोगों को नहीं, बल्कि अवसरों को भी आपस में जोड़ा है।
रेहड़ी-पटरी विक्रेता से बड़े कारोबार तक एक ही डिजिटल व्यवस्था
प्रधानमंत्री ने भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था को वित्तीय समावेशन का बड़ा उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि देश में एक साधारण रेहड़ी-पटरी विक्रेता और बड़े कार शोरूम तक एक ही डिजिटल भुगतान व्यवस्था का इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने इसे समावेशी प्रौद्योगिकी की शक्ति बताते हुए कहा कि डिजिटल व्यवस्था ने वित्तीय सेवाओं को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने का काम किया है।
भारत अपनी डिजिटल क्षमता दुनिया के साथ साझा कर रहा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अपनी डिजिटल क्षमताओं और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का अनुभव ग्लोबल साउथ तथा अन्य साझेदार देशों के साथ साझा कर रहा है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान इस्तेमाल किए गए ओपन-सोर्स कोविन प्लेटफॉर्म का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत का घरेलू नवाचार दूसरे देशों के लिए भी संभावनाओं के द्वार खोल सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की क्षमता का उद्देश्य मानवता को सशक्त बनाना होना चाहिए।
कुछ सौ से बढ़कर 2.5 लाख से ज्यादा स्टार्टअप
पीएम मोदी ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की तेज वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि 2014 में कुछ सौ स्टार्टअप से बढ़कर आज इनकी संख्या 2.5 लाख से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि इनमें लगभग आधे स्टार्टअप छोटे शहरों से आते हैं और 45% से अधिक स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार है। उन्होंने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि नवाचार और समस्याओं के समाधान की क्षमता अब समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंच रही है।
शासन का उद्देश्य लोगों को निर्भर बनाना नहीं, सशक्त करना
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोक प्रशासन में सरकार की शक्ति का उद्देश्य लोगों को व्यवस्था पर निर्भर बनाए रखना नहीं, बल्कि उन्हें पूरी तरह सक्षम और सशक्त बनाना होना चाहिए। उन्होंने पिछले दशक में 25 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का विकास मॉडल सशक्तिकरण पर आधारित है और देश इसी रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।
जन धन-आधार-मोबाइल से कम हुआ भ्रष्टाचार
प्रधानमंत्री मोदी ने सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुंचाने में जन धन-आधार-मोबाइल त्रिमूर्ति और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से भ्रष्टाचार कम हुआ है, नागरिकों की सुविधा बढ़ी है और सरकार तथा लोगों के बीच सीधा संबंध मजबूत हुआ है। डिजिटल व्यवस्था ने सरकारी सहायता की पहुंच को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारत की विनिर्माण क्षमता बनी दुनिया के लिए मदद का माध्यम
कोविड-19 महामारी के दौरान टीकों की भारी कमी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवनरक्षक टीकों के निर्माण की क्षमता को कुछ देशों तक सीमित रखना उचित नहीं होता। उन्होंने कहा कि भारत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए 100 से अधिक देशों को टीकों की आपूर्ति की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विनिर्माण क्षमता केवल देश की जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि दूसरे देशों की सहायता का माध्यम भी बनी।
एआई का इस्तेमाल मानवता और पशु कल्याण के लिए भी
प्रधानमंत्री ने भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट का उल्लेख करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की संभावनाओं पर चर्चा को केवल मानव आवश्यकताओं तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि पशु कल्याण के लिए एआई के इस्तेमाल पर भी विचार किया गया। उन्होंने कहा कि यह भारत की उस सोच को दर्शाता है जिसमें प्रौद्योगिकी का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंचाने पर जोर दिया जाता है। भारत जितना अधिक सक्षम होगा, मानवता और दुनिया को उतना ही अधिक लाभ मिलेगा।
प्रतिस्पर्धा के साथ करुणा और नवाचार के साथ जिम्मेदारी जरूरी
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि प्रतिस्पर्धा, नवाचार और राष्ट्रीय शक्ति महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके साथ करुणा और वैश्विक चुनौतियों के समाधान की जिम्मेदारी भी जरूरी है। जलवायु परिवर्तन, जल प्रबंधन और उभरती प्रौद्योगिकियों के जिम्मेदार इस्तेमाल जैसे विषयों पर सामूहिक प्रयास की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शक्ति केवल आगे बढ़ने की क्षमता नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ने में सक्षम बनाने की क्षमता भी है।
तय समय से नौ साल पहले हासिल किया जलवायु लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि पेरिस समझौते के तहत 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 40% स्थापित विद्युत क्षमता हासिल करने का लक्ष्य भारत ने नवंबर 2021 में ही पूरा कर लिया था। उन्होंने कहा कि भारत ने यह लक्ष्य निर्धारित समय से नौ साल पहले हासिल किया और ऐसा करने वाला पहला जी20 देश बना। उन्होंने इसे भारत की बदलती ऊर्जा यात्रा का महत्वपूर्ण संकेत बताया।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 75 से बढ़कर करीब 300 गीगावाट
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 2014 में करीब 75 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर लगभग 300 गीगावाट हो गई है। उन्होंने कहा कि यह लगभग चार गुना विस्तार भारत की हरित ऊर्जा यात्रा और सतत विकास की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
सौर योजनाओं से परिवारों और किसानों का सशक्तिकरण
प्रधानमंत्री ने पीएम सूर्य घर और पीएम-कुसुम योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पहलें परिवारों और किसानों को अपनी सौर ऊर्जा पैदा करने तथा ऊर्जा लागत कम करने में सक्षम बना रही हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से 30 गीगावाट से अधिक क्षमता जुड़ी है और इसके परिणामस्वरूप हर साल 3 करोड़ टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी आ रही है। उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा की ये पहलें पर्यावरण संरक्षण के साथ नागरिकों के आर्थिक सशक्तिकरण में भी योगदान दे रही हैं।
वैश्विक शक्ति संघर्ष के बीच भारत का अलग रास्ता
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया में प्रभुत्व स्थापित करने की होड़ के बीच भारत स्थिरता, सहयोग और साझा विकास का अलग रास्ता अपना रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दशक भारत के इस विशिष्ट राष्ट्रीय दृष्टिकोण का प्रमाण है। भारत शक्ति की दौड़ में किसी को पीछे छोड़ने के बजाय अपनी क्षमता का इस्तेमाल व्यापक अवसर पैदा करने के लिए कर रहा है।
एक संकट खत्म होने से पहले सामने आ जाता है दूसरा संकट
पीएम नरेंद्र मोदी ने महामारी, क्षेत्रीय युद्धों तथा महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा और व्यापार से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया लगातार संकटों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया एक संकट से निकलने का रास्ता तलाशती है, तब तक एक नया संकट सामने आ जाता है। ऐसी परिस्थितियों में वैश्विक स्थिरता और विश्वसनीय साझेदारों की जरूरत और बढ़ जाती है।
आपूर्ति श्रृंखलाओं को दबाव का साधन बनाना चिंताजनक
प्रधानमंत्री ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा, खनिज, प्रौद्योगिकी और भुगतान प्रणालियों जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं का इस्तेमाल दबाव बनाने और प्रभुत्व स्थापित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दशकों के वैश्वीकरण से विकसित हुई परस्पर निर्भरता अब कई जगह महत्वपूर्ण अवरोध बिंदुओं में बदल रही है, जिनका इस्तेमाल भू-राजनीतिक दबाव के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया को ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिसमें परस्पर निर्भरता कमजोरी नहीं, बल्कि सहयोग की ताकत बने।
अनिश्चित दुनिया में भारत विश्वसनीय साझेदार
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों और जनसांख्यिकीय चुनौतियों के बीच दुनिया विश्वसनीय साझेदारों की तलाश कर रही है, जो संकट के समय आपूर्ति श्रृंखलाओं को बनाए रखें और अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि भारत इसी विश्वसनीयता और सहयोग की भावना के साथ वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका निभा रहा है।
भारत की प्रगति सबके साथ, सबको साथ लेकर
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि 21वीं सदी में भारत की प्रगति सहयोगात्मक और समावेशी विकास पर आधारित है। उन्होंने जेनेरिक दवाओं की वैश्विक आपूर्ति में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका, डिजिटल पहचान के क्षेत्र में देश की क्षमता और दुनिया भर में सेवाएं उपलब्ध कराने वाले 2,000 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्रों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति की कहानी सभी के साथ सहयोग करते हुए और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की कहानी है।
‘हम किसी की कीमत पर विकास नहीं करते’
प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्थिरता में भारत की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि जब भी दुनिया को किसी मजबूत और भरोसेमंद सहारे की जरूरत होती है, भारत जिम्मेदारी के साथ आगे आता है। उन्होंने कहा कि भारत का विकास किसी दूसरे देश की कीमत पर नहीं होता। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत दुनिया के साथ और दुनिया के लिए विकास करता है।
शून्य से लेकर वैश्विक पहलों तक भारत की साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने दुनिया को ‘शून्य’ की अवधारणा दी, लेकिन इसके लिए कभी रॉयल्टी की मांग नहीं की। उन्होंने कहा कि आज भी भारत उसी निःस्वार्थ भावना के साथ काम कर रहा है और अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल व्यापक मानव कल्याण के लिए कर रहा है।
दुनिया के साझा हित में भारत की वैश्विक पहल
पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा रोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन (सीडीआरआई), अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, आइएमईसी और मिशन लाइफ जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य सीमित भू-राजनीतिक हितों की पूर्ति करना नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर सभी के लिए लाभ सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि भारत ऐसी पहल कर रहा है, जिनसे हर जीवन को लाभ पहुंच सके।
‘एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड’ से ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ तक
प्रधानमंत्री ने भारत की वैश्विक सोच को रेखांकित करते हुए ‘एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड’, ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ और ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ की अवधारणाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी शक्ति का इस्तेमाल दुनिया को जोड़ने, एकजुट करने और सशक्त बनाने के लिए करता है। भारत के लिए शक्ति का अर्थ केवल अपनी क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि उस क्षमता से दूसरों को भी आगे बढ़ने का अवसर देना है।
7.8% आर्थिक वृद्धि और 700 अरब डॉलर से अधिक विदेशी मुद्रा भंडार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक मजबूती का उल्लेख करते हुए अप्रैल-जून तिमाही में 7.8% की आर्थिक वृद्धि दर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चालू खाता घाटा घटकर 0.61% रह गया है और देश का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक है। उन्होंने कहा कि भारत की बैंकिंग प्रणाली कई दशकों में अपनी सबसे मजबूत स्थिति में है और अनिश्चितताओं से भरी दुनिया में भारत विश्वसनीयता तथा स्थिरता प्रदान करता है।
सुधार भारत के लिए मजबूरी नहीं, दृढ़ विश्वास
पीएम मोदी ने भारत की संरचनात्मक मजबूती का उल्लेख करते हुए वस्तु एवं सेवा कर, दिवाला कानून, 29 श्रम संहिताओं को चार श्रम संहिताओं में समेकित करने और कारोबार से जुड़े सैकड़ों छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने जैसे सुधारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य एकीकृत राष्ट्रीय बाजार, बेहतर कारोबारी वातावरण और मजबूत आर्थिक ढांचा तैयार करना है। प्रधानमंत्री ने वैश्विक निवेशकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि भारत में सुधारों की गति जारी रहेगी और हमारे लिए सुधार कोई विवशता नहीं, बल्कि दृढ़ विश्वास हैं।
‘साथ चलें, साथ बोलें और एक-दूसरे को समझें’
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के समापन पर प्राचीन वैदिक मंत्र का उल्लेख करते हुए वैश्विक समुदाय से एक साथ चलने, एक साथ बोलने और एक-दूसरे को समझने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक शक्ति के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का समाधान संभव है और ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम साझा वैश्विक अवसरों के सृजन की इसी भावना को आगे बढ़ाने का प्रभावी मंच बन सकता है। (इनपुट: पीआईबी)


