मध्य पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान के बीच नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के महत्व के बढ़ने के साथ भारत ग्लोबल साउथ में नवीकरणीय ऊर्जा के सतत उपयोग और सहयोग को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। ‘द मनीला टाइम्स’ में प्रकाशित एक लेख में यह बात कही गई है।
लेख में भारत को ‘तकनीक और ज्ञान साझा करने वाला केंद्र’ बताते हुए कहा गया है कि भारत ने फ्रांस के साथ मिलकर 2015 में इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) की स्थापना की थी। ISA का मुख्यालय दिल्ली-एनसीआर में है।
यह संधि आधारित अंतर-सरकारी संगठन अब 124 हस्ताक्षरकर्ता सदस्य देशों वाला मंच बन चुका है। इसका लक्ष्य 2030 तक मुख्य रूप से ग्लोबल सोलर फैसिलिटी के माध्यम से सौर ऊर्जा क्षेत्र में 1 लाख करोड़ डॉलर के निवेश को जुटाना है। ग्लोबल सोलर फैसिलिटी ISA द्वारा बनाया गया भुगतान गारंटी कोष है, जिसका उद्देश्य सौर ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देना है।
लेख में कहा गया है कि एशियाई विकास बैंक (ADB) और अन्य एशियाई देश नवीकरणीय ऊर्जा को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के प्रयास कर रहे हैं और ऐसे समय में भारत की पहल को विशेष महत्व मिल रहा है।
लेख के अनुसार, नवंबर 2026 में नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय नई दिल्ली में भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो आयोजित करेगा। इसमें 50,000 से अधिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इसका आयोजन ISA की नौवीं सभा और चौथे इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन ग्रीन हाइड्रोजन के साथ किया जाएगा।
भारत और फिलीपींस के बीच स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण सहयोग विकसित हुआ है, जिसे नवीकरणीय ऊर्जा पर संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है।
भारत ने यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और नीदरलैंड के साथ भी ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदारियां स्थापित की हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया के साथ हाल में हुआ नया ऊर्जा समझौता शामिल है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग किया गया है।
लेख में कहा गया है कि भारत का घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार 2070 तक नेट-जीरो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने की उसकी महत्वाकांक्षा को मजबूती दे रहा है। 2026 के मध्य तक भारत की संचयी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 288 गीगावाट हो गई है और देश 2030 तक 500 गीगावाट के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
भारत ISA को वित्तीय जोखिम कम करने और तकनीक हस्तांतरण के प्रमुख माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते हुए अफ्रीका में विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को भी बढ़ावा दे रहा है। इसके तहत दूरदराज और ऊर्जा की कमी वाले अफ्रीकी क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा मिनी-ग्रिड स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है।
यह साझेदारी अफ्रीका सोलर फैसिलिटी के माध्यम से संचालित होती है, जो निजी वाणिज्यिक पूंजी को आकर्षित करने के लिए मिश्रित वित्तपोषण मंच के रूप में काम करती है।
लेख में कहा गया है कि इन सभी प्रयासों के जरिए भारत दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में अपनी कूटनीतिक और आर्थिक ताकत को ग्लोबल साउथ में सतत विकास के क्षेत्र में नेतृत्व में बदलने का प्रयास कर रहा है।
-आईएएनएस


